जन्म के एक घंटे के अंदर बच्चे को मां का दूध पिलाना शुरू करे -- मंजुला शर्मा
भराड़ी टिक्कर। स्वास्थ्य खण्ड घुमारवीं के अंतर्गत आयुष्मान आरोग्य मंदिर कोठी के आंगनवाड़ी केंद्र भराड़ी टिक्कर में विश्व स्तनपान सप्ताह के अवसर पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रशिक्षित स्वास्थ्य शिक्षिका **मंजुला शर्मा** ने की। इस दौरान करीब 25 महिलाओं ने भाग लिया और मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारियां प्राप्त कीं।
प्रशिक्षित स्वास्थ्य शिक्षिका मंजुला शर्मा ने कहा कि विश्व स्तनपान सप्ताह मनाने का मुख्य उद्देश्य माताओं को स्तनपान के महत्व के बारे में जागरूक करना है, ताकि नवजात शिशुओं और छोटे बच्चों को स्तनपान के माध्यम से बेहतर पोषण एवं रोगों से लड़ने की क्षमता प्रदान की जा सके। उन्होंने कहा कि मां का दूध शिशु के लिए संपूर्ण आहार है और इससे बच्चे के शारीरिक एवं मानसिक विकास में महत्वपूर्ण योगदान मिलता है।
उन्होंने बताया कि **विश्व स्तनपान सप्ताह प्रत्येक वर्ष 1 से 7 अगस्त तक मनाया जाता है।** इस दौरान महिलाओं को स्तनपान की सही जानकारी देने के साथ-साथ इससे जुड़े भ्रम और गलत धारणाओं को दूर करने का प्रयास किया जाता है।
### जन्म के एक घंटे के भीतर पिलाएं मां का पहला दूध
मंजुला शर्मा ने बताया कि नवजात शिशु को जन्म के **एक घंटे के भीतर मां का पहला पीला और गाढ़ा दूध, जिसे कोलोस्ट्रम कहा जाता है, अवश्य पिलाना चाहिए।** उन्होंने कहा कि कोलोस्ट्रम शिशु के लिए अमृत के समान होता है। इसमें ऐसे महत्वपूर्ण पोषक तत्व और प्रतिरक्षी तत्व होते हैं, जो नवजात की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करने में मदद करते हैं।
उन्होंने माताओं को सलाह दी कि बच्चे के जन्म के बाद शुरुआती छह महीनों तक शिशु को **केवल मां का दूध** ही दिया जाए। इस अवधि में बच्चे को पानी, शहद, घुट्टी अथवा अन्य किसी प्रकार का तरल पदार्थ देने से बचना चाहिए। मां के दूध में बच्चे की जरूरत के अनुसार आवश्यक पोषक तत्व मौजूद होते हैं।
उन्होंने कहा कि पर्याप्त मात्रा में मां का दूध पीने वाले बच्चों का शारीरिक एवं मानसिक विकास बेहतर होता है तथा स्तनपान बच्चों को दस्त और निमोनिया जैसे संक्रमणों से बचाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। स्तनपान से बच्चे की रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत होती है और उसके मस्तिष्क के विकास में भी सहायता मिलती है। साथ ही मां और बच्चे के बीच भावनात्मक जुड़ाव एवं प्यार का रिश्ता भी मजबूत होता है।
### छह माह बाद पूरक आहार भी जरूरी
मंजुला शर्मा ने बताया कि छह महीने की उम्र पूरी होने के बाद बच्चे को मां के दूध के साथ **उपयुक्त पूरक आहार** देना शुरू करना चाहिए और दो वर्ष या उससे अधिक समय तक स्तनपान जारी रखा जा सकता है। इससे बच्चे को आवश्यक पोषण मिलता है और उसके समुचित विकास में मदद मिलती है।
उन्होंने स्तनपान के माताओं के लिए होने वाले लाभों की जानकारी देते हुए बताया कि स्तनपान कराने से महिलाओं में स्तन एवं अंडाशय के कैंसर के जोखिम को कम करने में मदद मिलती है। इसके अलावा यह मधुमेह और रक्तचाप के नियंत्रण, हृदय स्वास्थ्य तथा प्रसव के बाद वजन कम करने में भी लाभकारी हो सकता है।
### सरकारी योजनाओं की भी दी जानकारी
कार्यक्रम के दौरान मंजुला शर्मा ने महिलाओं को मां और बच्चे की सुरक्षा के लिए सरकार की ओर से संचालित विभिन्न स्वास्थ्य कार्यक्रमों एवं योजनाओं की भी जानकारी दी। उन्होंने **जननी सुरक्षा योजना प्लस, जननी शिशु सुरक्षा कार्यक्रम, निःशुल्क प्रसव तथा 108 एवं 102 आपातकालीन एम्बुलेंस सेवाओं** के बारे में विस्तारपूर्वक बताया।
उन्होंने महिलाओं से इन योजनाओं का अधिक से अधिक लाभ उठाने तथा अपने आसपास की अन्य महिलाओं को भी इन स्वास्थ्य सुविधाओं के बारे में जागरूक करने का आह्वान किया।
उन्होंने कहा कि मां और शिशु का बेहतर स्वास्थ्य परिवार और समाज के स्वस्थ भविष्य की आधारशिला है। इसलिए प्रत्येक महिला को स्तनपान के महत्व के बारे में सही जानकारी होना जरूरी है।
कार्यक्रम में **आंगनबाड़ी कार्यकर्ता सोमा देवी**, आशा कार्यकर्ताओं **रजनी देवी, लता देवी एवं ममता देवी** सहित लगभग 25 महिलाएं उपस्थित रहीं। कार्यक्रम के दौरान महिलाओं ने स्तनपान एवं मातृ-शिशु स्वास्थ्य से संबंधित जानकारी प्राप्त की और स्वास्थ्य संबंधी महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की।