हिमाचल पथ परिवहन निगम (एचआरटीसी) की बस संख्या HP-37D-1654 शुक्रवार, 17 जुलाई 2026 को पुडबा–पालमपुर मार्ग पर लाहड़ चौकी के समीप अचानक आग की चपेट में आ गई। राहत की बात यह रही कि बस में सवार सभी 12 यात्रियों को समय रहते सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया और इस घटना में किसी प्रकार की जनहानि या कोई शारीरिक चोट नहीं हुई।
एचआरटीसी के अनुसार बस का संचालन चालक यशपाल तथा परिचालक धर्मेंद्र कुमार द्वारा किया जा रहा था। बस 17 जुलाई की सुबह 8:10 बजे पुडबा से पालमपुर के लिए रवाना हुई थी। लाहड़ चौकी के निकट पहुंचते ही बस की सेल्फ स्टार्टर असेंबली में अचानक शॉर्ट सर्किट हो गया, जिससे आग लग गई। देखते ही देखते आग ने विकराल रूप धारण कर पूरी बस को अपनी चपेट में ले लिया और बस पूरी तरह जलकर नष्ट हो गई।
निगम ने स्पष्ट किया है कि 16 जुलाई 2026 को कार्यशाला में बस का अंतिम निरीक्षण किया गया था, जिसमें विद्युत प्रणाली या डीजल रिसाव जैसी कोई तकनीकी खराबी सामने नहीं आई थी। इसके अलावा 17 जुलाई को पुडबा से रवाना होने से पहले चालक द्वारा की गई सामान्य जांच में भी किसी प्रकार की खराबी नहीं पाई गई थी।
घटना के बाद चालक, परिचालक तथा बस में यात्रा कर रहे सभी यात्रियों के लिखित बयान दर्ज किए गए। सभी के बयानों में यह तथ्य सामने आया कि बस सामान्य रूप से चल रही थी और लाहड़ चौकी के पास पहुंचते ही सेल्फ स्टार्टर के निकट अचानक आग भड़क उठी, जिसने कुछ ही मिनटों में पूरी बस को अपनी चपेट में ले लिया।
एचआरटीसी के रिकॉर्ड के अनुसार संबंधित बस पिछले लगभग एक माह से पालमपुर–पठानकोट, पालमपुर–चंडीगढ़, पालमपुर–जम्मू सहित विभिन्न स्थानीय एवं लंबी दूरी के मार्गों पर नियमित रूप से संचालित हो रही थी। इस अवधि में बस में एक भी ब्रेकडाउन दर्ज नहीं हुआ, जिससे यह स्पष्ट होता है कि बस तकनीकी रूप से पूरी तरह फिट थी।
घटना की जांच के लिए मंडलीय स्तर पर गठित समिति, जिसमें मंडलीय प्रबंधक धर्मशाला, क्षेत्रीय प्रबंधक धर्मशाला, क्षेत्रीय प्रबंधक पालमपुर तथा नगरोटा बगवां एवं पालमपुर के जेटीओ शामिल थे, ने विस्तृत जांच की। समिति ने तकनीकी निरीक्षण, अभिलेखों और संबंधित व्यक्तियों के बयानों के आधार पर निष्कर्ष निकाला कि बस में आग सेल्फ स्टार्टर असेंबली के समीप अचानक हुए शॉर्ट सर्किट के कारण लगी थी।
एचआरटीसी ने कहा है कि घटना की सभी परिस्थितियों की जांच पूरी कर ली गई है और उपलब्ध तथ्यों के आधार पर इसे आकस्मिक तकनीकी दुर्घटना माना गया है। यात्रियों की सुरक्षित निकासी चालक और परिचालक की सतर्कता का परिणाम रही, जिससे एक बड़ा हादसा टल गया।