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धर्मशाला | उपायुक्त कांगड़ा ने की जिला टीबी डेथ ऑडिट समिति की बैठक की अध्यक्षता, गंभीर टीबी मरीजों के बेहतर उपचार एवं समन्वित प्रयासों पर दिया बल

Updated on Wednesday, July 15, 2026 07:49 AM IST

धर्मशाला, 14 जुलाई। राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन कार्यक्रम (एनटीईपी) के अंतर्गत जिला टीबी डेथ ऑडिट समिति एवं प्रमुख प्रदर्शन संकेतक (Key Performance Indicators) समीक्षा बैठक का आयोजन आज उपायुक्त कांगड़ा की अध्यक्षता में किया गया। बैठक में वर्ष 2026 की दूसरी तिमाही (Q2) के *टीबी डेथ ऑडिट, कार्यक्रम की प्रगति तथा कांगड़ा को **टीबी मुक्त जिला* बनाने के लिए तैयार की गई कार्ययोजना की विस्तृत समीक्षा की गई।

बैठक में वर्ष 2026 की दूसरी तिमाही के दौरान हुई *14 टीबी मृत्यु मामलों* के डेथ ऑडिट पर विस्तार से चर्चा की गई। समिति ने पाया कि अधिकांश मृत्यु उन्नत सह-रोगों (Co-morbidities), कैंसर, हृदय संबंधी बीमारियों, यकृत रोग तथा अन्य गैर-टीबी कारणों से हुईं। साथ ही यह भी रेखांकित किया गया कि गंभीर रोगियों की शीघ्र पहचान, समय पर भर्ती, सह-रोगों का समन्वित प्रबंधन तथा प्रभावी गृह भ्रमण (होम विजिट) से टीबी रोगियों के उपचार परिणामों में और सुधार लाया जा सकता है।

उपायुक्त ने निर्देश दिए कि *सिविल अस्पताल नूरपुर, सिविल अस्पताल पालमपुर, सिविल अस्पताल देहरा, जोनल अस्पताल धर्मशाला तथा डॉ. राजेंद्र प्रसाद राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय एवं अस्पताल, टांडा* को टीबी रोगियों के इनडोर उपचार हेतु सुदृढ़ किया जाए। उन्होंने कहा कि सभी गंभीर टीबी मरीजों को आवश्यकता अनुसार तत्काल अस्पताल में भर्ती कर गुणवत्तापूर्ण उपचार उपलब्ध कराया जाए, ताकि मृत्यु दर में कमी लाई जा सके।

उपायुक्त ने टीबी एवं *गैर-संचारी रोग (एनसीडी) कार्यक्रमों* के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने के निर्देश भी दिए। उन्होंने कहा कि मधुमेह, उच्च रक्तचाप, कैंसर, दीर्घकालिक श्वसन रोगों तथा अन्य सह-रोगों से ग्रसित उच्च जोखिम वाले टीबी मरीजों की पहचान कर उन्हें प्राथमिकता के आधार पर नियमित निगरानी एवं गृह भ्रमण के दायरे में लाया जाए।

उन्होंने जिला क्षय रोग केंद्र तथा ब्लॉक स्तर की टीमों को निर्देश दिए कि टीबी मरीजों के *गृह भ्रमण (होम विजिट)* को और अधिक प्रभावी बनाया जाए, ताकि उपचार की नियमित निगरानी, पोषण एवं सामाजिक आवश्यकताओं का आकलन तथा मरीज की स्थिति बिगड़ने पर समय रहते उच्च संस्थान में रेफर किया जा सके। इसके अतिरिक्त गंभीर एवं अंतिम अवस्था के मरीजों के लिए *पैलेटिव केयर (Palliative Care)* सेवाओं को भी सुदृढ़ करने पर बल दिया गया।

बैठक में *टीबी मुक्त भारत अभियान 2.0*, यूनिवर्सल ड्रग ससेप्टिबिलिटी टेस्टिंग (UDST), टीबी प्रिवेंटिव ट्रीटमेंट (TPT), डिफरेंशिएटेड टीबी केयर (DTBC), उपचार सफलता, निक्षय मित्र पहल, सामुदायिक स्क्रीनिंग तथा होम विजिट की प्रगति की समीक्षा की गई। उपायुक्त ने निर्देश दिए कि कार्यक्रम की नियमित समीक्षा कर उच्च जोखिम वाले क्षेत्रों एवं संवेदनशील आबादी पर विशेष ध्यान दिया जाए।

उपायुक्त ने जिला कांगड़ा में *टीबी रोग भार (TB Burden)* का विस्तृत अध्ययन करवाने के भी निर्देश दिए, जिससे रोग के हॉटस्पॉट, संवेदनशील आबादी तथा संक्रमण के प्रमुख कारणों की पहचान कर वैज्ञानिक एवं साक्ष्य-आधारित रणनीति तैयार की जा सके।

बैठक में उच्च जोखिम वाले शहरी क्षेत्रों, भीड़भाड़ वाले संस्थानों एवं कार्यस्थलों पर सक्रिय टीबी स्क्रीनिंग को प्राथमिकता देने, *आयुष्मान आरोग्य शिविरों* के माध्यम से टीबी एवं एनसीडी की संयुक्त स्क्रीनिंग आयोजित करने, कुपोषित एवं कमजोर मरीजों के लिए पोषण सहायता सुदृढ़ करने, टीबी प्रिवेंटिव ट्रीटमेंट का विस्तार करने तथा पंचायतों, स्वयं सहायता समूहों, निक्षय मित्रों एवं टीबी फोरम के माध्यम से जनभागीदारी बढ़ाने पर भी बल दिया गया। साथ ही जिला एवं ब्लॉक स्तर पर नियमित समीक्षा बैठकें आयोजित करने तथा जन-जागरूकता गतिविधियों को और अधिक प्रभावी बनाने का निर्णय लिया गया।

उपायुक्त ने कहा कि *टीबी मुक्त कांगड़ा* का लक्ष्य केवल स्वास्थ्य विभाग का नहीं, बल्कि पूरे समाज एवं सभी विभागों की साझा जिम्मेदारी है। उन्होंने सभी संबंधित विभागों, स्वास्थ्य संस्थानों एवं फील्ड कार्यकर्ताओं से समन्वित रूप से कार्य करते हुए प्रत्येक टीबी मरीज को समय पर जांच, गुणवत्तापूर्ण उपचार, समुचित सहयोग तथा सम्मानजनक देखभाल सुनिश्चित करने का आह्वान किया।

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