हिमालय साहित्य संस्कृति एवं पर्यावरण मंच एवं ओकार्ड इंडिया के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित काव्य सम्मेलन में वरिष्ठ और युवा साहित्यकार एक मंच पर आए
शिमला। शिमला के ऐतिहासिक गेयटी थिएटर सभागार में साहित्य, संवेदना और सृजन का अद्भुत संगम देखने को मिला। हिमालय साहित्य संस्कृति एवं पर्यावरण मंच तथा ओकार्ड इंडिया के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित काव्य सम्मेलन एवं साहित्य संवाद में प्रदेशभर से आए वरिष्ठ और नवोदित रचनाकारों ने अपनी रचनाओं से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। पूरे आयोजन के दौरान कविता, ग़ज़ल, विचार और अनुभवों की स्वर-लहरियाँ सभागार में गूंजती रहीं।
कार्यक्रम में पद्मश्री डॉ. उमेश कुमार भारती मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। अध्यक्षता प्रख्यात साहित्यकार प्रो. इंद्र सिंह ठाकुर ने की, जबकि डॉ. राजेश कुमार वर्मा और डॉ. राजन तनवर विशिष्ट अतिथि के रूप में मंचासीन रहे।
हिमालय साहित्य संस्कृति एवं पर्यावरण मंच के अध्यक्ष एस.आर. हरनोट ने बताया कि साहित्य संवाद का उद्देश्य युवा एवं नवोदित रचनाकारों को वरिष्ठ साहित्यकारों के सान्निध्य में अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने का अवसर प्रदान करना है। उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी को साहित्य से जोड़ना और उनकी रचनात्मक अभिव्यक्ति को प्रोत्साहित करना मंच की सर्वोच्च प्राथमिकता है।
सम्मेलन में किन्नौर, नूरपुर, बिलासपुर, पालमपुर, सोलन, अर्की, रामपुर, चायल, धामी, सुन्नी और शिमला सहित प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों से आए लगभग 38 रचनाकारों ने अपनी कविताओं, ग़ज़लों और अन्य साहित्यिक विधाओं की प्रभावशाली प्रस्तुतियाँ दीं। हर रचना के बाद सभागार तालियों की गूंज से देर तक गूंजता रहा।
चर्चित शायर अभिषेक तिवारी ने कार्यक्रम का प्रभावशाली संचालन करते हुए हिमालय साहित्य संस्कृति एवं पर्यावरण मंच की साहित्यिक यात्रा, उद्देश्यों तथा हिमाचल में साहित्यिक चेतना को सशक्त बनाने के निरंतर प्रयासों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उनके उद्बोधन के साथ ही काव्य सम्मेलन का औपचारिक शुभारंभ हुआ।
मुख्य अतिथि पद्मश्री डॉ. उमेश कुमार भारती ने कहा कि साहित्य केवल शब्दों का संग्रह नहीं, बल्कि समाज की संवेदनाओं और समय की चेतना का जीवंत दस्तावेज़ है। उन्होंने युवाओं से निरंतर अध्ययन, चिंतन और सृजनात्मक लेखन से जुड़े रहने का आह्वान किया।
अध्यक्षीय संबोधन में प्रो. इंद्र सिंह ठाकुर ने कहा कि साहित्य मनुष्य को बेहतर इंसान बनने की प्रेरणा देता है। उन्होंने हिमालय साहित्य संस्कृति एवं पर्यावरण मंच द्वारा प्रदेशभर के युवा और नवोदित रचनाकारों को लगातार मंच उपलब्ध कराने की सराहना करते हुए इसे एक महत्वपूर्ण सांस्कृतिक पहल बताया।
विशिष्ट अतिथि डॉ. राजन तनवर और डॉ. राजेश कुमार वर्मा ने कहा कि ऐसे आयोजन साहित्यिक परंपराओं को आगे बढ़ाने के साथ-साथ नई प्रतिभाओं को पहचान दिलाने का प्रभावी माध्यम हैं। उन्होंने मंच की निरंतर साहित्यिक गतिविधियों की सराहना की।
काव्य पाठ में जगदीश बाली, ओम प्रकाश शर्मा, डॉ. करम सिंह, डॉ. रोशन लाल जिंटा, स्नेह नेगी, सलिल शमशेरी, हेमलता, गोपाल झिलटा, पवन शर्मा, पूजा सूद, डोगर, वसुंधरा धर्मानी, दीप्ति सारस्वत, जगदीश कश्यप, राधा सिंह, अनामिका चौहान, तनुप्रिया सिंह, कृतिका शर्मा, विश्वमोहिनी, नवीन कुमार खरयाल, साक्षी वर्मा, पंकज तंवर, निधि, विनायक, सौम्या किरण, कंपिला शर्मा, मंजू शर्मा, कमला भोयल और उमा ठाकुर नधैक सहित अनेक रचनाकारों ने अपनी रचनाओं का प्रभावशाली पाठ कर साहित्य प्रेमियों की भरपूर सराहना प्राप्त की।
कार्यक्रम के अंत में डॉ. करम सिंह ने सभी अतिथियों, साहित्यकारों, प्रतिभागियों, आयोजकों एवं श्रोताओं का आभार व्यक्त किया।
यह सम्मेलन केवल काव्य पाठ तक सीमित नहीं रहा, बल्कि अनुभवी और युवा साहित्यकारों के बीच सार्थक संवाद का एक जीवंत मंच बना। ऐतिहासिक गेयटी थिएटर का सभागार पूरे दिन कविता, विचार और संवेदनाओं से सराबोर रहा तथा उपस्थित साहित्य प्रेमी शब्दों और सृजन की नई ऊर्जा के साथ लौटे।