ज्वालामुखी/अजमेर। राजस्थान के अजमेर स्थित प्रसिद्ध 5508 शालिग्राम भवन के दिव्य शालिग्राम भगवान इन दिनों हिमाचल प्रदेश के धार्मिक प्रवास पर हैं। भगवान विष्णु के स्वरूप माने जाने वाले इन शालिग्रामों के दर्शन के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। 5508 शालिग्रामों का यह दुर्लभ संग्रह देशभर में आस्था और श्रद्धा का प्रमुख केंद्र माना जाता है। शालिग्राम भगवान की पूजा को सनातन परंपरा में विशेष महत्व प्राप्त है और इन्हें भगवान विष्णु का साक्षात स्वरूप माना जाता है।
हाल ही में यह दिव्य यात्रा कांगड़ा जिले के बस्दी कोहाला में समाजसेवी मुनीश शर्मा के आवास पर पहुंची, जहां स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं ने बड़ी श्रद्धा के साथ भगवान के दर्शन किए तथा पूजा-अर्चना कर आशीर्वाद प्राप्त किया।
इसके उपरांत शालिग्राम भगवान की यह यात्रा विश्व प्रसिद्ध शक्तिपीठ नगरी ज्वालामुखी पहुंची। यहां आचार्य दिनेश शर्मा (माता बगलामुखी बनखंडी पुजारी) के आवास पर विशेष पूजा-अर्चना का भव्य आयोजन किया गया। भक्तों ने गंगाजल, तुलसी, पुष्प और चंदन से शालिग्राम भगवान का अभिषेक कर भक्ति भाव व्यक्त किया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने उपस्थित होकर शालिग्राम भगवान के दर्शन किए और वैदिक मंत्रोच्चार के बीच पूजा-अर्चना कर परिवार की सुख-समृद्धि एवं मंगलकामना की। आचार्य दिनेश शर्मा ने कहा कि शालिग्राम भगवान का यह प्रवास ज्वालामुखी शक्तिपीठ की पावन भूमि पर अत्यंत शुभ है।
श्रद्धालुओं का कहना है कि एक साथ इतने अधिक शालिग्रामों के दर्शन का अवसर अत्यंत दुर्लभ होता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार शालिग्राम भगवान के दर्शन एवं पूजन से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा, सुख-शांति और आध्यात्मिक उन्नति प्राप्त होती है।
धार्मिक वातावरण और भक्ति भाव से ओत-प्रोत इस यात्रा ने क्षेत्र में आध्यात्मिक चेतना का संदेश दिया है। श्रद्धालुओं ने इस दिव्य अवसर को अपने जीवन का सौभाग्य बताते हुए भविष्य में भी ऐसे धार्मिक आयोजनों की कामना की। कार्यक्रम में स्थानीय तथा बाहर से आए भक्तों ने बताया कि इतने बड़े संख्या में शालिग्राम भगवान के दर्शन का यह सौभाग्य उन्हें पहली बार प्राप्त हुआ है। महिलाओं और बच्चों की विशेष भीड़ देखी गई। इस अवसर पर विशेष हवन, आरती और भजन-कीर्तन का आयोजन भी किया गया।यह यात्रा अधिकमास के पावन अवसर पर आयोजित की जा रही है, जो भक्तों में उत्साह और आस्था का संचार कर रही है।
शालिग्राम शिलाएँ भगवान विष्णु का स्वयंभू रूप मानी जाती हैं। पुराणों के अनुसार एक शालिग्राम की पूजा हजारों मूर्तियों के बराबर पुण्य प्रदान करती है। 5508 शालिग्राम एक साथ विराजमान होना अत्यंत दुर्लभ और महान पुण्यदायी घटना है। इनकी पूजा से घर-परिवार में सुख-समृद्धि, शांति तथा पितरों का उद्धार होता है।