हिंदू धर्म में व्रत और त्योहारों की तिथि का निर्धारण सूर्योदय और उदया तिथि के आधार पर किया जाता है। पंचांग गणना के अनुसार इस वर्ष ज्येष्ठ अधिक पूर्णिमा तिथि 30 मई 2026, शनिवार को सुबह 11 बजकर 58 मिनट से आरंभ होगी और 31 मई 2026, रविवार को दोपहर 3 बजकर 15 मिनट तक रहेगी।
उदया तिथि के अनुसार अधिकमास पूर्णिमा का व्रत, पूजन और स्नान-दान रविवार, 31 मई 2026 को किया जाएगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार अधिकमास की पूर्णिमा पर पवित्र नदी में स्नान, भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की पूजा तथा दान-पुण्य करने से कई गुना पुण्य फल प्राप्त होता है।
मान्यता है कि इस दिन भगवान विष्णु के सत्यनारायण स्वरूप की पूजा करने से घर में सुख-समृद्धि और शांति बनी रहती है। श्रद्धालु इस अवसर पर व्रत रखकर कथा सुनते हैं और भगवान सत्यनारायण की आराधना करते हैं।
ज्येष्ठ अधिक पूर्णिमा पर स्नान और दान का विशेष महत्व बताया गया है। इस दिन जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र, जल, फल और धन का दान करना अत्यंत शुभ माना जाता है। धार्मिक ग्रंथों के अनुसार ऐसा करने से पापों का नाश होता है और जीवन में सुख-समृद्धि का आगमन होता है।
इस बार मई महीने में पड़ने वाली यह दूसरी पूर्णिमा है, जिसके कारण इसका महत्व और अधिक बढ़ गया है। मंदिरों और धार्मिक स्थलों पर विशेष पूजा-अर्चना और भजन-कीर्तन के आयोजन भी किए जाएंगे।