कांगड़ा घाटी रेलमार्ग पर ट्रेन सेवा बहाल न होने से नाराज जनता ने आज कोपर लाहड़ रेलवे स्टेशन पर जोरदार प्रदर्शन किया। इस प्रदर्शन में स्थानीय लोगों के साथ-साथ टैक्सी ऑपरेटर, वरिष्ठ नागरिक, महिलाएं, युवा और बच्चे बड़ी संख्या में शामिल हुए।
प्रदर्शनकारियों ने रेलवे विभाग, रेल मंत्रालय और हिमाचल प्रदेश के सांसदों को आड़े हाथों लेते हुए जमकर नारेबाजी की और उनके इस्तीफे की मांग तक कर डाली।
जनता ने कांगड़ा घाटी रेल को क्षेत्र की “जीवनरेखा” बताते हुए कहा कि इसके बंद रहने से आम लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। लोगों का कहना था कि चक्की पुल के निर्माण के बाद उन्हें उम्मीद थी कि जल्द ही रेल सेवा बहाल होगी, लेकिन रेलवे विभाग अलग-अलग कारणों का हवाला देकर लगातार देरी कर रहा है।
प्रदर्शन के दौरान लोगों ने जनप्रतिनिधियों की चुप्पी पर भी नाराजगी जताई और चेतावनी दी कि अब इसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
प्रदर्शनकारियों ने बताया कि कांगड़ा घाटी रेल गरीब वर्ग के लिए सस्ता और सुगम परिवहन साधन है। इसके संचालन से धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलता है, शक्तिपीठों के श्रद्धालुओं को सुविधा मिलती है, स्थानीय बाजारों में रोजगार के अवसर बढ़ते हैं, छात्रों और मरीजों—खासतौर पर टांडा अस्पताल जाने वालों—को राहत मिलती है।
रेलवे संघर्ष समिति के अध्यक्ष पीसी विश्वकर्मा ने कहा कि चक्की पुल बने चार महीने से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन फिर भी रेल सेवा बहाल नहीं की जा रही। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ नेताओं के दबाव में रेलवे बहाली को टाला जा रहा है।
इस दौरान कई वरिष्ठ नागरिकों और बुद्धिजीवियों ने भी रेलवे की कार्यप्रणाली की आलोचना की।
🏛️ संघर्ष समिति की नई कार्यकारिणी घोषित
रेलवे संघर्ष समिति ने अपनी नई कार्यकारिणी की घोषणा भी की।
अध्यक्ष: पीसी विश्वकर्मा
वरिष्ठ उपाध्यक्ष: बलवीर सिंह, विजय शर्मा
उपाध्यक्ष: अशोक कुमार
संयोजक: राजेश नंदपुरी
महासचिव: अभिनव शर्मा
सचिव: मलकीत सिंह, नरेश सलारिया
प्रेस सचिव: संजीव कुमार
संयुक्त सचिव: विजय पठानियां
प्रवक्ता: नवीन वर्मा, गगनदीप शर्मा
सोशल मीडिया प्रभारी: संजीव कुमार, सुमित गुलेरिया, पवन धीमान
कार्यकारिणी सदस्य: विजय कुमार, विरेन्द्र अटवाल, लखवीर सिंह, संजीव कुमार, विपन अटवाल, कुलविंद्र सिंह
⚠️ आंदोलन तेज करने की चेतावनी
संघर्ष समिति ने साफ चेतावनी दी है कि यदि जल्द रेल सेवा बहाल नहीं की गई, तो आंदोलन को और उग्र किया जाएगा।
समिति ने कहा कि प्रधानमंत्री के संभावित देहरा दौरे के दौरान सांसदों का काले झंडों से स्वागत कर विरोध दर्ज कराया जाएगा और प्रधानमंत्री के समक्ष अपनी मांग को मजबूती से रखा जाएगा।