Laureate Institute of Pharmacy में Pharma Anveshan 2026 आयोजित, Pharmacy Council of India अध्यक्ष ने AI आधारित सिलेबस, इंडस्ट्री लिंक और सख्त नियमों पर जोर दिया।
Pharma Anveshan 2026 में फार्मेसी शिक्षा में बड़े बदलावों की घोषणा—सिलेबस अपडेट, ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन और AMR पर सख्ती जैसे अहम मुद्दों पर चर्चा।
Pharma Anveshan 2026: राष्ट्रीय फार्मेसी शिक्षा दिवस पर कांगड़ा में भव्य आयोजन, PCI अध्यक्ष ने किए बड़े ऐलान
कांगड़ा, हिमाचल प्रदेश: - राष्ट्रीय फार्मेसी शिक्षा दिवस के उपलक्ष्य में ज्वालामुखी स्थित Laureate Institute of Pharmacy में ‘Pharma Anveshan 2026’ का भव्य आयोजन किया गया, जिसमें देशभर से फार्मेसी शिक्षा, अनुसंधान, उद्योग और नियामक संस्थाओं से जुड़े विशेषज्ञों, शिक्षकों और विद्यार्थियों ने बड़ी संख्या में भाग लिया। यह आयोजन न केवल एक औपचारिक कार्यक्रम रहा, बल्कि भारत में फार्मेसी शिक्षा और प्रैक्टिस को नए सिरे से परिभाषित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मंच साबित हुआ, जहां मौजूदा चुनौतियों, खामियों और संभावनाओं पर विस्तार से चर्चा की गई और भविष्य के लिए एक स्पष्ट रोडमैप प्रस्तुत किया गया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि Dr. Montu Kumar M. Patel (अध्यक्ष, Pharmacy Council of India) ने अपने विस्तृत संबोधन में कहा कि भारत में फार्मेसी शिक्षा का ढांचा अब एक निर्णायक मोड़ पर खड़ा है, जहां केवल पारंपरिक शिक्षण पद्धतियों के सहारे आगे बढ़ना संभव नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वर्तमान समय में इंडस्ट्री, रिसर्च और प्रैक्टिकल प्रैक्टिस के बीच जो अंतर मौजूद है, उसे समाप्त करना ही सबसे बड़ी प्राथमिकता है और इसी दिशा में ठोस कदम उठाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि लंबे समय तक फार्मेसी शिक्षा अधिकतर सैद्धांतिक रही, जिसके कारण छात्र जब पढ़ाई पूरी करके इंडस्ट्री या मार्केट में प्रवेश करते हैं तो उन्हें वास्तविक परिस्थितियों का सामना करने में कठिनाई होती है। इस समस्या को दूर करने के लिए अब सिलेबस को पूरी तरह से प्रैक्टिकल, स्किल-आधारित और इंडस्ट्री-ओरिएंटेड बनाया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि नए पाठ्यक्रम में इस बात पर विशेष ध्यान दिया गया है कि छात्र जो भी सीखें, वह सीधे उनके करियर में उपयोगी साबित हो। इसके तहत इंडस्ट्री विजिट को अनिवार्य बनाया जा रहा है ताकि छात्रों को वास्तविक कार्यस्थल का अनुभव मिल सके और वे पढ़ाई के दौरान ही इंडस्ट्री के माहौल को समझ सकें। इसके साथ ही आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डेटा एनालिटिक्स और आधुनिक तकनीकों को भी पाठ्यक्रम में शामिल किया जा रहा है, जिससे छात्र भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार हो सकें। उन्होंने यह भी कहा कि फार्मास्युटिकल सेक्टर तेजी से तकनीकी बदलावों के दौर से गुजर रहा है और यदि छात्र और शिक्षक समय के साथ खुद को अपडेट नहीं करेंगे तो वे पीछे रह जाएंगे।
कार्यक्रम में यह भी बताया गया कि देशभर में फार्मासिस्टों के रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया को पूरी तरह डिजिटल बनाने की दिशा में काम किया जा रहा है। यह कदम पारदर्शिता बढ़ाने और प्रक्रियाओं को सरल बनाने के उद्देश्य से उठाया जा रहा है, जिससे छात्रों और पेशेवरों को अनावश्यक देरी और जटिलताओं का सामना न करना पड़े। ऑनलाइन सिस्टम लागू होने के बाद रजिस्ट्रेशन और रिन्यूअल की प्रक्रिया अधिक तेज, सुगम और भरोसेमंद हो जाएगी। इसके साथ ही यह सुनिश्चित किया जाएगा कि निर्धारित समय सीमा के भीतर सभी योग्य उम्मीदवारों को रजिस्ट्रेशन मिल सके।
अपने संबोधन में मुख्य अतिथि ने फार्मेसी क्षेत्र में बढ़ रही अनैतिक गतिविधियों पर भी गंभीर चिंता व्यक्त की और कहा कि अब इस दिशा में सख्त कदम उठाने का समय आ गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि फर्जी सर्टिफिकेट, गलत प्रैक्टिस और नियमों के उल्लंघन को किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। ऐसे मामलों में दोषी पाए जाने पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी, जिसमें आर्थिक दंड के साथ-साथ लाइसेंस निलंबन या रद्द करने तक के प्रावधान शामिल हैं। उन्होंने यह भी कहा कि फार्मेसी एक जिम्मेदार पेशा है, जहां मरीजों की सुरक्षा सर्वोपरि होती है, इसलिए इसमें किसी भी प्रकार की लापरवाही या अनैतिकता की कोई जगह नहीं होनी चाहिए।
कार्यक्रम के दौरान एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस (AMR) के बढ़ते खतरे पर भी विशेष रूप से चर्चा की गई। मुख्य अतिथि ने इसे आने वाले समय की सबसे बड़ी स्वास्थ्य चुनौतियों में से एक बताया और कहा कि यदि इस पर समय रहते नियंत्रण नहीं किया गया तो इसके गंभीर परिणाम सामने आ सकते हैं। उन्होंने कहा कि बिना प्रिस्क्रिप्शन दवाइयों की बिक्री इस समस्या को और बढ़ा रही है और इसे नियंत्रित करना बेहद जरूरी है। उन्होंने फार्मासिस्टों से अपील की कि वे अपनी जिम्मेदारी को समझें और दवाइयों के वितरण में पूरी सावधानी बरतें, ताकि मरीजों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
इसके अलावा उन्होंने फार्मेसी को केवल एक व्यापारिक गतिविधि के रूप में देखने की प्रवृत्ति पर भी सवाल उठाए और कहा कि इसे एक प्रोफेशनल प्रैक्टिस के रूप में विकसित करना जरूरी है। उन्होंने कहा कि जब तक फार्मेसी को एक जिम्मेदार और सेवा-आधारित पेशे के रूप में स्थापित नहीं किया जाएगा, तब तक इसकी वास्तविक पहचान और सम्मान प्राप्त नहीं हो पाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि समाज और सरकार दोनों की नजर में फार्मासिस्टों की भूमिका को मजबूत बनाने के लिए यह जरूरी है कि वे अपनी पेशेवर जिम्मेदारियों को पूरी ईमानदारी और समर्पण के साथ निभाएं।
कार्यक्रम में भाग लेने वाले विशेषज्ञों और शिक्षकों ने भी इस बात पर सहमति जताई कि फार्मेसी शिक्षा में सुधार की दिशा में उठाए जा रहे ये कदम समय की मांग हैं और इनसे छात्रों को बेहतर अवसर मिलेंगे। उन्होंने कहा कि यदि शिक्षा, उद्योग और प्रैक्टिस के बीच तालमेल स्थापित किया जाता है तो भारत का फार्मास्युटिकल सेक्टर वैश्विक स्तर पर और अधिक मजबूत हो सकता है। छात्रों ने भी इस आयोजन को बेहद उपयोगी बताया और कहा कि इससे उन्हें अपने करियर को लेकर नई दिशा और स्पष्टता मिली है।
इस अवसर पर विभिन्न तकनीकी सत्रों, प्रस्तुतियों और चर्चाओं का भी आयोजन किया गया, जिसमें फार्मेसी के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया। कार्यक्रम में यह संदेश स्पष्ट रूप से सामने आया कि आने वाले समय में फार्मेसी शिक्षा और प्रैक्टिस में बड़े बदलाव देखने को मिलेंगे और इसके लिए सभी संबंधित पक्षों को मिलकर काम करना होगा।
अंत में यह कहा जा सकता है कि ‘Pharma Anveshan 2026’ केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि एक व्यापक पहल है, जिसका उद्देश्य भारत में फार्मेसी शिक्षा और प्रैक्टिस को एक नई दिशा देना है। यह आयोजन इस बात का संकेत है कि देश में फार्मेसी क्षेत्र को मजबूत और आधुनिक बनाने के लिए ठोस कदम उठाए जा रहे हैं और आने वाले समय में इसका सकारात्मक प्रभाव देखने को मिलेगा।