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धर्मशाला | पहाड़ियों की ऊँचाइयों तक: ज्वालामुखी के पास छिपा एक अद्भुत स्थल

Updated on Saturday, March 21, 2026 19:58 PM IST

घने जंगलों, लोकधुनों और पश्चिमी क्षितिज के मनमोहक दृश्यों से भरपूर एक खास यात्रा

ज्वालामुखी (कांगड़ा), 21 मार्च: हिमाचल प्रदेश के शांत और हरित पर्वतीय क्षेत्र में स्थित सुरानी के पास, ज्वालाजी–खुंडियां मार्ग पर एक अनोखा और कम चर्चित स्थल अपनी प्राकृतिक सुंदरता और अद्वितीय दृश्यावलियों के कारण ध्यान आकर्षित कर रहा है। काली धार की हरियाली के बीच बसा यह पहाड़ी बिंदु रोमांच, शांति और सांस्कृतिक अनुभूति का अद्भुत संगम प्रस्तुत करता है।

इस यात्रा की शुरुआत केवल रास्तों से नहीं, बल्कि एक भावना से हुई। एक पारंपरिक कांगड़ी लोकगीत—“ठंडी-ठंडी हवा झुलदी, झुलदे चीड़ां दे डालू ओ, जीणा कांगड़े दा”—की मधुर धुन ने मन को इस कदर बांध लिया कि उस गीत में वर्णित प्रकृति को प्रत्यक्ष देखने की इच्छा जाग उठी।

परिवहन की सीमित सुविधा के चलते परिजन के साथ मोटरसाइकिल से यात्रा आरंभ की गई। घुमावदार और सर्पाकार सड़कों से गुजरते हुए लगभग एक घंटे में निर्धारित स्थान तक पहुंचा गया। इसके बाद असली चुनौती शुरू हुई।

घने जंगलों के बीच बनी संकरी और टेढ़ी-मेढ़ी पगडंडी पर पैदल चढ़ाई करनी पड़ी। पत्थरीले रास्ते, फिसलन और जंगली जानवरों—विशेषकर भेड़ियों व सरीसृपों—की आशंका ने इस सफर को कठिन बना दिया। बावजूद इसके, चीड़ के पेड़ों की ठंडी छांव ने इस थकान को कुछ हद तक कम किया।

चढ़ाई के बीच अचानक एक विस्तृत हरा-भरा घास का मैदान सामने आया, जो अंग्रेजी प्रकृति कविताओं में वर्णित एकांत वादियों की याद दिलाता है। यहीं आकर यह स्पष्ट हुआ कि कांगड़ी लोकगीतों में प्रकृति का इतना सुंदर वर्णन क्यों किया गया है।

शिखर पर लोहे और ईंटों से बना एक ढांचा स्थित है, जो इस क्षेत्र का सबसे ऊंचा बिंदु माना जाता है। स्थानीय लोगों के अनुसार, साफ मौसम में यहां से दूर स्थित लाहौर (पाकिस्तान) के आसपास के मैदानी क्षेत्र भी दूरबीन की सहायता से देखे जा सकते हैं। यद्यपि इस यात्रा के दौरान दूरबीन उपलब्ध नहीं थी, फिर भी बिना किसी अवरोध के विस्तृत क्षितिज ने पश्चिम दिशा के विशाल मैदानों की झलक स्पष्ट रूप से प्रस्तुत की।

सूर्यास्त के समय यह दृश्य और भी मनमोहक हो जाता है, जब आकाश और धरती एक अद्भुत रंगों के संगम में डूब जाते हैं। यह अनुभव न केवल आंखों को सुकून देता है, बल्कि मन को भी गहराई से छू जाता है।

यह स्थल अभी भी अपेक्षाकृत अनछुआ है, लेकिन रोमांच प्रेमियों और प्रकृति के चाहने वालों के लिए एक आदर्श गंतव्य बन सकता है। हालांकि, यहां आने वाले यात्रियों को अपनी शारीरिक क्षमता और सुरक्षा का विशेष ध्यान रखना आवश्यक है।

हिमाचल प्रदेश के लोकप्रिय पर्यटन स्थलों के बीच, काली धार का यह छिपा हुआ खजाना प्राकृतिक सौंदर्य की एक अनमोल झलक प्रस्तुत करता है।

ऐसी यात्राएं केवल गंतव्य तक पहुंचने के लिए नहीं होतीं, बल्कि प्रकृति, संस्कृति और आत्म-अनुभूति के अद्वितीय संगम को महसूस करने का अवसर भी देती हैं।

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