झंडा चढ़ाने की रस्म के साथ ज्वालामुखी में चैत्र नवरात्र मेले का शुभारंभ
ज्वालामुखी मंदिर में आज झंडा चढ़ाने की पारंपरिक रस्म के साथ चैत्र नवरात्र मेले का विधिवत शुभारंभ हो गया। स्थानीय विधायक संजय रतन ने मंदिर अधिकारी अजय मंडयाल तथा प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी में मंदिर में झंडा चढ़ाया। सुबह से ही बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचने लगे और मंदिर परिसर माता के जयकारों से गूंज उठा।
चैत्र नवरात्र मेले के दौरान मंदिर की आभा और भी निखर गई है। देशभर से आए श्रद्धालु मां के दरबार में अपनी आस्था, श्रद्धा और भक्ति अर्पित कर रहे हैं, जिससे पूरा क्षेत्र भक्तिमय वातावरण में डूबा हुआ है।
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, ज्वालामुखी शक्तिपीठों में से एक प्रमुख स्थल है, जहां माता सती की महाजिह्वा गिरी थी। तांत्रिक ग्रंथ तंत्र चूड़ामणि में भी इसका उल्लेख मिलता है। यहां देवी ज्योति स्वरूप में विराजमान हैं, जो इसे अन्य मंदिरों से अलग और विशेष बनाता है।
शिवालिक पहाड़ियों की गोद में स्थित इस मंदिर के गर्भगृह में नौ पवित्र ज्योतियां निरंतर प्रज्वलित रहती हैं—महाकाली, अन्नपूर्णा, चंडी, हिंगलाज, विंध्यवासिनी, महालक्ष्मी, सरस्वती, अंबिका और अंजना। श्रद्धालु इन ज्योतियों की परिक्रमा करते हैं। यह विश्व का अनूठा मंदिर है, जहां प्रतिमा नहीं बल्कि ज्योति की पूजा की जाती है।
मंदिर में प्रतिदिन पांच आरतियां होती हैं—सुबह पांच बजे मंगल आरती, इसके बाद अन्य आरतियां और दोपहर 12 बजे भोग आरती, शाम 7 बजे संध्या आरती तथा रात्रि साढ़े 9 बजे शयन आरती। आरती के समय मंदिर का दृश्य अत्यंत दिव्य और मनमोहक होता है, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल होते हैं।
एसडीएम ज्वालामुखी संजीव शर्मा के अनुसार, नवरात्रों के दौरान श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए प्रशासन ने व्यापक इंतजाम किए हैं। शहर की सफाई व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए अतिरिक्त सफाई कर्मचारियों की तैनाती की गई है।
वहीं, देहरा के पुलिस अधीक्षक मयंक चौधरी ने बताया कि सुरक्षा व्यवस्था के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। शहर के विभिन्न स्थानों पर सुरक्षा केंद्र स्थापित किए गए हैं, जहां से सुरक्षा कर्मी चौबीसों घंटे निगरानी रखेंगे। इसके साथ ही श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए मंदिर परिसर में अस्थायी स्वास्थ्य शिविर भी स्थापित किया गया है, ताकि किसी भी स्वास्थ्य समस्या का तुरंत समाधान किया जा सके।