हिमाचल में आयुष्मान योजना से 86,093 मरीजों को मिला उपचार
मंडी में सबसे अधिक, लाहौल-स्पीति में सबसे कम लाभार्थी; 45,768 आशा-आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को भी मिली स्वास्थ्य सुविधा
शिमला, 12 मार्च — Prataprao Jadhav, केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री, ने संसद में जानकारी देते हुए बताया कि प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (आयुष्मान भारत) के अंतर्गत वर्ष 2024-25 के दौरान हिमाचल प्रदेश में कुल 86,093 रोगियों का उपचार किया गया। यह जानकारी उन्होंने राज्यसभा सांसद Indu Bala Goswami के प्रश्न के लिखित उत्तर में दी।
केंद्रीय मंत्री ने बताया कि इस योजना के माध्यम से आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को बड़ी राहत मिल रही है और उन्हें महंगे इलाज के लिए अस्पतालों में कैशलेस उपचार की सुविधा प्रदान की जा रही है। हिमाचल प्रदेश के विभिन्न सरकारी और सूचीबद्ध निजी अस्पतालों में इस योजना के तहत मरीजों का इलाज किया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि जिलों के आंकड़ों के अनुसार मंडी जिला योजना का सबसे बड़ा लाभार्थी रहा, जहां वर्ष 2024-25 के दौरान 19,233 मरीजों का उपचार किया गया। वहीं, लाहौल-स्पीति जिला में सबसे कम 504 मरीजों को इस योजना के तहत उपचार सुविधा मिली।
केंद्रीय मंत्री द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार प्रदेश के अन्य जिलों में उपचारित मरीजों की संख्या इस प्रकार रही—
बिलासपुर – 5,430
चम्बा – 3,744
हमीरपुर – 6,978
कांगड़ा – 14,573
किन्नौर – 778
कुल्लू – 7,737
लाहौल-स्पीति – 504
मंडी – 19,233
शिमला – 6,849
सिरमौर – 7,167
सोलन – 6,931
ऊना – 6,169
सरकार के अनुसार यह योजना हिमाचल प्रदेश में गरीब और जरूरतमंद परिवारों के लिए एक बड़ी राहत साबित हो रही है। दूरदराज और पहाड़ी क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को भी अब बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच मिल रही है।
Prataprao Jadhav ने यह भी बताया कि 28 फरवरी 2026 तक हिमाचल प्रदेश में 45,768 आशा और आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को भी इस योजना के अंतर्गत स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ दिया गया है। इन फ्रंटलाइन कार्यकर्ताओं को स्वास्थ्य सुरक्षा प्रदान करना सरकार की प्राथमिकता है, क्योंकि ये ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की पहली कड़ी हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के प्रभावी क्रियान्वयन से प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच और बेहतर हुई है। योजना के तहत पात्र परिवारों को प्रति वर्ष निर्धारित सीमा तक मुफ्त उपचार की सुविधा दी जाती है, जिससे गरीब परिवारों पर इलाज का आर्थिक बोझ काफी कम हुआ है।
स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार आने वाले समय में योजना के दायरे को और मजबूत करने तथा ज्यादा से ज्यादा लोगों तक इसका लाभ पहुंचाने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।