Sanjay Rattan – राजनीतिक टाइमलाइन (2003–2026)
ज्वालामुखी विधानसभा क्षेत्र (जिला कांगड़ा, हिमाचल प्रदेश) की राजनीति में Sanjay Rattan एक महत्वपूर्ण कांग्रेस नेता के रूप में जाने जाते हैं। उनका राजनीतिक सफर संघर्ष, हार-जीत और संगठनात्मक सक्रियता से भरा रहा है।
1. राजनीति में शुरुआत (2003)
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संजय रतन ने सक्रिय राजनीति में प्रवेश Indian National Congress के माध्यम से किया।
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2003 हिमाचल प्रदेश विधानसभा चुनाव में उन्होंने Jawalamukhi Assembly Constituency से पहली बार चुनाव लड़ा।
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इस चुनाव में उन्हें भाजपा के वरिष्ठ नेता Ramesh Chand Dhawala से हार का सामना करना पड़ा।
2. दूसरा चुनाव (2007)
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2007 विधानसभा चुनाव में भी उन्होंने ज्वालामुखी सीट से कांग्रेस उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ा।
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इस बार भी मुकाबला कड़ा रहा, लेकिन जीत हासिल नहीं कर सके और सीट भाजपा के पास रही।
3. पहली बड़ी जीत (2012)
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2012 हिमाचल प्रदेश विधानसभा चुनाव में उन्होंने बड़ी राजनीतिक वापसी की।
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इस चुनाव में उन्होंने भाजपा के दिग्गज नेता Ramesh Chand Dhawala को लगभग 4,000 से अधिक मतों से हराया।
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इसी जीत के साथ वे पहली बार हिमाचल प्रदेश विधानसभा के सदस्य बने।
4. हार का दौर (2017)
5. दोबारा वापसी (2022)
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2022 हिमाचल प्रदेश विधानसभा चुनाव में संजय रतन ने फिर जोरदार वापसी की।
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उन्होंने ज्वालामुखी सीट से चुनाव जीतकर दूसरी बार विधायक बनने में सफलता हासिल की।
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उसी चुनाव में राज्य में कांग्रेस की सरकार बनी, जिसका नेतृत्व Sukhvinder Singh Sukhu ने संभाला।
6. विधायक के रूप में कार्य (2022–2026)
विधायक बनने के बाद उन्होंने अपने क्षेत्र में कई विकास कार्यों और योजनाओं पर जोर दिया:
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ज्वालामुखी मंदिर क्षेत्र के विकास से जुड़े प्रस्ताव और योजनाएँ।
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सड़क और पर्यटन सुविधाओं को मजबूत करने की पहल।
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शिक्षा संस्थानों के उन्नयन और स्वास्थ्य सुविधाओं में सुधार की मांग।
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मंदिर ट्रस्ट के माध्यम से सामाजिक और राहत कार्यों में योगदान।
7. राजनीतिक छवि
✅ संक्षेप में:
Sanjay Rattan का राजनीतिक सफर कई उतार-चढ़ाव से भरा रहा है—दो चुनाव हारने के बाद 2012 में पहली जीत और 2022 में दूसरी जीत ने उन्हें ज्वालामुखी की राजनीति में एक स्थापित नेता बना दिया।