हिमाचल के मंदिरों का प्रबंधन वैष्णो देवी मॉडल पर करने की मांग तेज
शिमला/धर्मशाला: हिमाचल प्रदेश के प्रमुख मंदिरों के प्रबंधन को श्री माता वैष्णो देवी मंदिर की तर्ज पर संचालित करने की मांग तेज हो गई है। विभिन्न धार्मिक और सामाजिक संगठनों ने राज्य सरकार से आग्रह किया है कि मंदिरों के संचालन के लिए एक स्वतंत्र और पारदर्शी श्राइन बोर्ड का गठन किया जाए, जिससे व्यवस्थाएं अधिक सुव्यवस्थित और जवाबदेह बन सकें।
वैष्णो देवी मॉडल क्यों?
मांग करने वाले संगठनों का कहना है कि Shri Mata Vaishno Devi Shrine Board के तहत मंदिर प्रबंधन का मॉडल देशभर में एक सफल उदाहरण माना जाता है। यहां श्रद्धालुओं के लिए ऑनलाइन पंजीकरण, आवास सुविधा, स्वच्छता व्यवस्था, सुरक्षा प्रबंधन और चिकित्सा सेवाएं बेहतर ढंग से संचालित होती हैं। साथ ही, मंदिर की आय का उपयोग सामाजिक और क्षेत्रीय विकास कार्यों में भी किया जाता है।
हिमाचल के प्रमुख मंदिरों पर नजर
प्रदेश के प्रसिद्ध शक्तिपीठ और आस्था केंद्र—श्री ज्वालामुखी मंदिर, श्री नैना देवी मंदिर, चिंतपूर्णी मंदिर और श्री ब्रजेश्वरी देवी मंदिर—में हर वर्ष लाखों श्रद्धालु पहुंचते हैं। मांग उठाने वालों का कहना है कि यहां भी एक समान प्रबंधन व्यवस्था लागू कर सुविधाओं को आधुनिक बनाया जा सकता है।
विरोध के स्वर भी उठे
हालांकि, इस प्रस्ताव को लेकर कुछ पारंपरिक प्रबंध समितियों और पुजारियों ने आशंका जताई है। उनका कहना है कि अत्यधिक सरकारी हस्तक्षेप से धार्मिक परंपराओं और स्थानीय अधिकारों पर असर पड़ सकता है। उनका सुझाव है कि किसी भी निर्णय से पहले सभी हितधारकों से व्यापक चर्चा की जानी चाहिए।
सरकार का रुख
राज्य सरकार के सूत्रों के अनुसार, यदि इस संबंध में औपचारिक प्रस्ताव आता है तो कानूनी, प्रशासनिक और धार्मिक पहलुओं का अध्ययन कर निर्णय लिया जाएगा। फिलहाल यह मुद्दा प्रदेश की राजनीति और धार्मिक समुदायों में चर्चा का विषय बना हुआ है।
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