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बैजनाथ | अनोखा है हिमाचल का महाकाल मंदिर

Updated on Wednesday, November 19, 2025 08:56 AM IST

कांगड़ा जिला के बैजनाथ में जहां शिव मंदिर लोगों की श्रद्धा का केन्द्र है, वहीं बैजनाथ से करीब पांच किलोमीटर की दूरी पर महाकाल मंदिर अपने आप में अनूठा है। महाकाल मंदिर के बारे में कई किस्से कहानियां सुनने को मिलती हैं। वहीं आजकल हर साल यहां मेला लगता है। देश भर में शनि के दो ही मंदिर हैं, नासिक उज्जैन के बाद बैजनाथ के पास महाकाल में ही शनि का दूसरा मंदिर है जहाँ पर हर वर्ष भादों मास में शनिवार मेलों का आयोजन धूमधाम से किया जाता है।

मान्यता है कि भगवान शिव के तेज से प्रकट हुआ यहां स्थापित स्वयंभू शिवलिंग कई रहस्यों व अनसुलझे सवालों को अपने आप में समेटे है। यहां शिवलिंग पर चढऩ़े वाला पानी या दूध कहीं भी बाहर नहीं निकलता है। जिसको लेकर आज तक कई महात्मा व मंदिर के पुजारी इस पर कोशिशें कर चुके हैं लेकिन आज तक पता नहीं चल पाया है कि शिवलिंग पर चढ़ाया पानी या दूध जाता कहां है।

बताया जाता है कि यहां पर आदि काल में सप्त ऋषियों के कूल्लू प्रवास के समय यहां सात कुंडों की स्थापना की थी। जिसमें चार कुंड ब्रह्म कुंड, विष्णु कुं ड, शिव कुंड व सत्ती कुंड आज भी मंदिर में मौजूद हैं, जबकि तीन कुंड लक्ष्मी, कुंती व सूर्य कुंड मंदिर परिसर के बाहर हैं।

मंदिर के पुजारी राम प्रसाद ने बताया कि किंवदंती है कि अज्ञात वास के दौरान महाकाल मंदिर का निर्माण पांडवों द्वारा किया गया था। इसके बाद पांडवों ने यहां अपनी माता कुंती के साथ महाकाल की आराधना की थी। इसके अलावा यह मंदिर अघोरी साधना व तंत्र विद्या का केंद्र माना जाता है। उन्होंने बताया कि मंदिर में महाकाल के रूप में साक्षात भगवान शिव पिंडी के रूप में विराजमान हैं जबकि उनके साथ यहां अपरोक्ष रूप में महाकाली का वास है।

पुजारी ने बताया कि पूर्व समय में किसी दिन अगर महाकाल में कोई शव जलने नहीं आता था तो घास का पुतला जलाया जाता था। उन्होंने बताया कि वर्ष 1905 में आए भीषण भूकंप में मंदिर का आधा भाग ढह गया था जिसके बाद आधे भाग को दोबारा बनाया गया है।

जानकारी मिली कि मां दुर्गा के मंदिर की स्थापना मंडी के तत्कालीन राजा सुशैन ने करीब 450 वर्ष पूर्व की थी। उस समय राजा के इकलौते बेटे के निधन के बाद राजा ने मां दुर्गा की मूॢत की स्थापना करने से इंकार कर दिया। इसके बाद जिस किसी ने भी मूॢत की स्थापना करनी चाही, उसके या परिवार के साथ कोई न कोई हादसा घटित होता रहा। इसके बाद वर्ष 1982 में स्वामी रामानंद ने मां दुर्गा की मूर्ति की स्थापना की। भारत में केवल दो शनि के मंदिर हैं। पहला उज्जैन में है तो दूसरा बैजनाथ के समीप महाकाल में।

मान्यता है कि यहां शनि प्रतिमा पर तिल, मास व कड़वा तेल चढ़ाने से नवग्रह की शांति मिलती है। इसके अलावा यहां भाद्रपद मास में शनिवार के मेले भी लगते हैं, जिसमें देश भर के कोने-कोने से हजारों श्रद्धालु यहां दर्शनों के लिए आते हैं। जो महाकाल मंदिर के साथ शनि मंदिर में भी पूजा अर्चना करते हैं। शनि मंदिर के साथ ही शनि प्रतिमा पर तिल, कड़वा तेल व माह चढ़ाकर अपने ग्रहों की शांति का उपाय करते हैं.

शिव कुंड के पानी से होता है महाकाल का जलाभिषेक : राम प्रसाद
मंदिर के पुजारी राम प्रसाद शर्मा ने बताया कि ब्रह्म कुंड का पानी पीने के लिए प्रयोग होता है। शिव कुंड के पानी का प्रयोग महाकाल के अभिषेक व नहाने के लिए किया जाता है लेकिन सती कुंड के पानी का प्रयोग नहीं किया जाता। मान्यता है कि किसी समय में यहां प्रदेश के मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के वंशज की 3 महारानियां सती हुई थीं।

मंदिर के सौंदर्यीकरण पर देंगे बल
कांगड़ा के जिलाधीश ने बताया कि मंदिर न्यास व प्रशासन जल्द ही मंदिर के सौंदर्यीकरण पर बल देगा। इसके तहत मंदिर सराय भवन के ऊपर श्रद्धालुओं को ठहरने के लिए हाल का निर्माण, मंदिर के साथ सटे श्मशानघाट का जीर्णोद्धार, गौसदन व नहाने के लिए बनाए गए तालाब का जीर्णोद्धार शामिल रहेगा। उन्होंने बताया कि महाकाल मंदिर को हाल ही में सीसीटीवी कैमरों से लैस किया जा चुका है।

महाकाल मंदिर में भादों के मेले के दौरान प्रशासन की तरफ से श्रद्धालुओं की व्यवस्था के लिए पुख्ता इंतजाम किये जाते हैं। बैजनाथ की एसडीएम सुनयना शर्मा ने बताया कि पहले मेले को लेकर प्रशासन पूरी तरह से तैयार है। उन्होंने बताया कि मंदिर को सैक्टरों में बांटा गया है, जबकि मंन्दिर परिसर में मौजूद दूसरे छोटे मंदिरों को फूलों से सजाया गया है। उन्होंने बताया कि श्रद्धालुओं की भीड़ को काबू करने के लिए मंदिर न्यास के सदस्य,पुलिस बल और स्वयंसेवियों का सहयोग लिया जा रहा है।

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