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चैत्र नवरात्रि | नवरात्रि में इस बार 8 दिन ही व्रत रखा जाएगा , हाथी पर सवार होकर आएंगी मां दुर्गा

Updated on Saturday, March 29, 2025 09:02 AM IST

चैत्र नवरात्रि की शुरुआत चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से होती है। इस साल नवरात्रि 30 मार्च, रविवार से शुरू हो रही हैं। खास बात यह है कि इस बार चैत्र नवरात्रि की शुरुआत सर्वार्थ सिद्धि समेत कई शुभ योग में हो रही है। इनकी वजह से नवरात्रि पर मां दुर्गा का पूजन अति फलदायी होने वाला है। हालांकि, रविवार से शुरू हो रही नवरात्रि में इस बार 8 दिन ही व्रत रखा जाएगा, लेकिन माता के नौ स्वरूपों की पूजा होगी। आइये विस्तारपूर्वक जानते हैं, इस बार नवरात्रि पर कौन-कौन से शुभ संयोग लग रहे हैं और क्यों 9 की जगह 8 दिन ही व्रत रखा जाएगा।

आठ दिन ही रखे जाएंगे व्रत
चैत्र शुक्ल प्रतिपदा 30 मार्च को है। इस वजह से नवरात्रि रविवार को शुरू होगी। पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा की जाएगी। लेकिन, द्वितीया और तृतीया तिथि 31 मार्च को एक ही दिन लग रही है, इसलिए तृतीया तिथि का क्षय हो रहा है। इस कारण चैत्र नवरात्रि पर 8 दिन ही व्रत रखा जाएगा। देखिए किस दिन कौनसा व्रत रखा जाएगा-
30 मार्च प्रतिपदा (मां शैलपुत्री पूजन)
31 मार्च द्वितीया तिथि (मां ब्रह्मचारिणी पूजन) सुबह 9.12 बजे तक है, इसके बाद तृतीया तिथि (मां चंद्रघंटा पूजन) लगेगी, लेकिन इसका क्षय होगा
1 अप्रैल चतुर्थी तिथि (मां कूष्मांडा पूजन)
2 अप्रैल पंचमी (मां स्कंदमाता पूजन)
3 अप्रैल षष्ठी (मां कात्यायनी पूजन)
4 अप्रैल सप्तमी (मां कालरात्रि पूजन)
5 अप्रैल अष्टमी (मां महागौरी पूजन)
6 अप्रैल नवमी (मां सिद्धिदात्री पूजन)
7 अप्रैल दशहरा/नवरात्रि पारण
किन शुभ योग में शुरू होगी नवरात्रि
नवरात्रि की शुरुआत कई शुभ योग के साथ हो रही है। इस बार सर्वार्थ सिद्धि योग, ऐंद्र योग, बुधादित्य योग, शुक्रादित्य योग और लक्ष्मीनारायण योग बन रहे हैं। ये लाभदायक और उन्नतिकारक योग हैं। मां दुर्गा की भक्तिभाव से पूजा करके आप इन योग में अपने जीवन को सुखी और समृ्द्ध बना सकते हैं।
नवरात्रि पूजन का शुभ मुहूर्त
चैत्र नवरात्रि का आरंभ 30 मार्च को सूर्योदय के साथ होगा और यह 6 मार्च को नवमी तिथि के समाप्त होगी। इसमें पूजा का आरंभ करने के लिए दोपहर में अभिजीत मुहूर्त उत्तम है, जिसमें घटस्थापना करना बेहद शुभ होगा। वैसे सूर्योदय के साथ भी आप नवरात्रि पूजन शुरू कर सकते हैं, लेकिन सुबह 10.30 बजे से दोपहर 12.00 बजे के बीच घटस्थापना करने से बचें।

हाथी पर सवार होकर आएंगी मां दुर्गा
इस बार मां दुर्गा हाथी पर सवार होकर आएंगी। माता का हाथी पर सवार होकर आना शुभ माना जाता है। हाथी को शांति और शुभता का प्रतीक माना जाता है। मां का हाथी पर आना खुशहाली और धन-धान्य में बढ़ोतरी का संकेत समझा जाता है।
मां दुर्गा के सभी स्वरूपों के नाम का अर्थपहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा की जाती है, मां को पहाड़ों की पुत्री माना जाता है। दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी का पूजन होता है, मां ब्रह्म के समान आचरण करने वाली हैं। तीसरे दिन मां चंद्रघंटा की पूजा होगी, माता चांद की तरह चमकने वाली हैं। चौथे दिन मां कूष्मांडा का पूजन होता है। मां के पूरे संसार में पैर फैले हैं। पांचवें दिन स्कंदमाता की पूजा होती है। मां कार्तिक स्वामी की माता हैं। छठे दिन मां कात्यायनी की पूजा की जाती है, मां का जन्म कात्यायन आश्रम में हुआ था इसलिए उन्हें इस नाम से जाना जाता है। सातवें दिन कालरात्रि की पूजा होगी, मां काल का नाश करती हैं। आठवें दिन मां महागौरी का पूजन होगा, मां सफेद रंग वाली हैं और 9वें दिन सभी सिद्धियां प्रदान करने वाली मां सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है।

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