क्रूज घोटाला, भू घोटाला, कबाड़ घोटाला, शराब घोटाले के लिए जानी जाएगी यह कांग्रेस सरकार
शिमला, भाजपा के नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर और प्रदेश अध्यक्ष डॉ राजीव बिंदल की अगवाई में प्रदेश के राज्यपाल महोदय शिव प्रताप शुक्ल को कांग्रेस सरकार के खिलाफ एक ज्ञापन सौंपा गया। इनके साथ भाजपा प्रदेश प्रभारी श्रीकांत शर्मा, सह प्रभारी संजय टंडन, पूर्व मंत्री, विधायक और प्रदेश पदाधिकारी उपस्थित रहे।
नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने कहा कि भाजपा ने राज्यपाल को वर्तमान कांग्रेस सरकार के 2 वर्ष के काले कारनामों का 'कच्चा चिट्ठा' सौंपा है। वर्तमान कांग्रेस सरकार का 2 वर्ष का यह कार्यकाल प्रदेश के इतिहास में काले अध्याय के रूप में जाना जाएगा क्योंकि इस दौरान भ्रष्टाचार में आकंठ डूबी इस सुक्खु सरकार ने 'मित्रों' को अनैतिक रूप से लाभ पहुँचाकर, फ़िजूल खर्ची को बढ़ावा देकर और आर्थिक कुप्रबंधन कर जहाँ प्रदेश को आर्थिक दिवालियापन के कगार पर खड़ा कर दिया वहीं क़ानून व्यवस्था को ठेंगा दिखाते हुए खनन, ड्रग, शराब, कबाड़, वन व भू माफिया को सरंक्षण दे प्रदेश में माफिया राज स्थापित कर दिया।
12. क्रूज घोटाला
* गोबिंदसागर झील में क्रूज उतारने में भी कथित तौर पर रिश्वत कांड का मामला उजागर हुआ है। इस रिश्वत कांड से एम. डी. एडवेंचर कंपनी के पार्टनर रहे श्री गौरव कुमार ने सरकार के एक प्रभावशाली मंत्री और जिला के प्रशासनिक अधिकारियों को 11 मई 2024 को मोरनी हिल्स में और कुछ दिन बाद घुमारवीं रेस्ट हाउस में लाखों रुपय रिश्वत देने का आरोप लगाया है। यही नहीं, गोबिंदसागर झील में उतारे गए क्रूज घटिया स्तर के हैं जिसके कारण कई दुर्घटनाएँ होते होते बची हैं। आरोप तो यह भी है कि यह क्रूज संबंधित अधिकारी से अनुभूति लिए बिना ही चल रहे हैं और इस संबंध में शिकायत भी संबंधित विभाग के अधिकारियों के समक्ष दर्ज की गई है । (Ann L: पर्यटन विभाग का नोटिस)
13. औद्योगिक क्षेत्र में घोटाला
* बद्दी औद्योगिक क्षेत्र के अंतर्गत मुख्य संसदीय सचिव रहे विधायक की पत्नी श्रीमती कुलदीप कौर ने M/S czar faucets Itd. और M/S Om Stainless Steel नाम की दो फैक्ट्रियाँ ख़रीदी और कुछ माह बाद ही 10 गुना ज़्यादा दाम पर बेच दी। अब प्रश्न यह उठता है कि उद्योग विभाग ने किस के दबाव में इन औद्योगिक इकाइयों को इस तरह बार-बार बेचने की अनुमति दी और क्या इस ख़रीद-फरोक्त में काले धन का इस्तेमाल कर सरकारी ख़ज़ाने को नुक़सान पहुंचाया । जानकारी मिली है कि इसकी अंतिम स्वीकृति तो माननीय मुख्यमंत्री महोदय ने स्वयं दी है! (Ann M: उद्योग विभाग द्वारा जारी एन. ओ. सी. की कॉपी)
14. पर्यटन निगम की गड़बड़ी
* पर्यटन निगम मुख्यमंत्री महोदय के विधान सभा क्षेत्र नादौन में एशियन विकास बैंक से क़र्ज़ लेकर पंच सितारा होटल बना रहा है जिसमे शुरू से ही भ्रष्टाचार की बू आ रही है. एक तो उस होटल के निर्माण का टेंडर L1 की बजाय L2 को दिया गया। दूसरा, जिस ज़मीन पर होटल बनना था उसपर अदालत से स्टे होने कि बावजूद प्रशासन ने छुट्टी वाले दिन ज़मीन को समतल करने का काम किया जो कि जनता में चर्चा का विषय बना कि आख़िर किसके दबाव में टेंडर देने में गड़बड़ी की गई और किसके सरंक्षण में कोर्ट के स्टे के बावजूद ज़मीन समतल की गई। चर्चा यही है कि मुख्यमंत्री महोदय स्वयं यह सब करवा रहे हैं। वैसे नादौन में पंच सितारा होटल आवश्यक भी है या नहीं, इस बात पर भी प्रश्न चिन्ह खड़ा किया जा रहा है। क्या इस होटल को भी बाद में अपने मित्रों को देने की योजना तो नहीं?
15. आउटसोर्स घोटाला
* हिमाचल प्रदेश की सुक्खू सरकार में ट्रामा सेंटर में मैन पॉवर उपलब्ध करवाने के नाम पर घोटाला हुआ। डेढ़ साल से बंद पड़ा आईजीएमसी का नवनिर्मित ट्रामा सेंटर सिर्फ कागजों में चल रहा था और वहां पर अलग-अलग समय में सपोर्टिव और पैरामेडिकल स्टाफ की नियुक्ति ठेकेदार के माध्यम से कर दी गई थी। अपने चहेतों को लाभ दिलवाने के लिए सभी कायदे कानून ताक पर रख दिए गए। एक बंद पड़े ट्रामा सेंटर में सैकड़ों कर्मचारी नियुक्ति की गई और बिना एक भी मरीज का इलाज किए ट्रामा सेंटर के मैन पॉवर के नाम पर दो करोड़ तीस लाख का बिल सरकार पर लाद दिया गया। मैंन पॉवर के लिए आने वाले खर्च को केंद्र सरकार द्वारा उठाया जा रहा है। यह केंद्र द्वारा जनहित के लिए भेजे गए पैसों की खुलेआम लूट है। फाइनेंस प्रूडेंश और फाइनेंस डिसिप्लिन के नाम पर कर्मचारियों का वेतन और पेंशनधारकों की पेंशन रोकने वाले पाले मुख्यमंत्री की नाक के नीचे इस तरह से जनहित के काम में आने वाले पैसों को अपने चहेतों में बाटा जा रहा है। आउटसोर्स एजेंसी के माध्यम से अभी नर्सों की आउटसोर्स पर भर्ती होनी थी, उसमें भी सरकार के दलाल प्रार्थियाँ से भर्ती करवाने की एवज में लाख-लाख रुपए ले रहे थे, परंतु मामला अदालत में जाने से भर्तियाँ अभी तक नहीं हो पाई।
16. कबाड़ घोटाला
* गुम्मा पेयजल परियोजना से लाखों का तांबे और कांसे का कबाड़ गायब हो गया है और कंपनी ने नगर निगम को घटना की भनक नहीं लगने दी। राजधानी की सबसे बड़ी गुम्मा पेयजल परियोजना से तांबे और कांसे का कई क्विंटल कबाड़ गायब हो गया है।
* औद्यगिक क्षेत्र बद्दी, बरोटीवाला, नालागढ़, काला अम्ब, ऊना, पोंटा साहिब आदि में भी कबाड़ माफिया सरकारी संरक्षण में फल-फूल रहा है, सरेआम उद्योगपतियों को डराया धमकाया जा रहा है और मनमर्जी के दाम पर स्क्रैप की बिक्री हो रही है। कई बार तो यह कबाड़ माफिया गुंडागर्दी पर भी उतारू हो जाते हैं और कई जगह गोलियां तक चल गई मगर प्रशासन चुपी साधे रखता है।
17. टेंडर घोटाला
* हिमाचल प्रदेश मार्केटिंग बोर्ड में केंद्र सरकार से आए लगभग 7 करोड़ के मंडियों को डिजिटलाइज करने के टेंडर को लेकर भी सवाल खड़े हुए हैं। मार्केटिंग बोर्ड के एम.डी. की अध्यक्षता वाली कमेटी ने टेंडर डालने वाली कंपनियों में से जिस कंपनी को टेक्निकल आधार पर रद्द किया था, प्रदेश सरकार के कृषि सचिव ने उसी कंपनी को टेंडर दे दिया था। भारतीय जानता पार्टी नेताओं द्वारा प्रेस वार्ताओं के माध्यम से इस मुद्दे को उठाने के बाद सरकार ने यह टेंडर रद्द कर दिया था। इसी तरह बिजली बोर्ड में 7 शहरों में बिजली के ढांचागत विकास को लेकर केंद्रीय योजना के तहत 175.73 करोड़ रू. आये थे जिस कार्य हेतु मात्र एक कंपनी ने ही टेंडर भरा और उसका रेट 40% ज़्यादा, यानी 240.84 करोड़ रू. था। वित्त विभाग के अधिकारियों की लिखित आपत्ति के बावजूद बिजली बोर्ड के अधिकारियों ने यह सिंगल टेंडर पारित कर दिया, जिसका विरोध भाजपा के नेताओं ने बिधानसभा के अंदर एवं बाहर प्रभावी ढंग से किया जिसके कारण प्रदेश सरकार ने यह टेंडर भी रद्द कर दिया। लोक निर्माण विभाग में पूरे प्रदेश के अंदर टेंडरों की बंदरबांट हो रही है। भाई-भतीजावाद के आधार पर सरकार के करणधारों के निर्देश पर ही लोक निर्माण अधिकारी काम दे रहे हैं। पूरे प्रदेश से इसकी शिकायतें मीडिया के माध्यम से प्रचारित होती रही हैं।
* इसी तरह, जल शक्ति विभाग में भी कई डिविजनों से टेंडर प्रक्रिया में अनियमितताएँ बरतने के आरोप लगे हैं। शिमला जल प्रबंधन निगम द्वारा शिमला शहर में 24 घंटे पेय जल आपूर्ति हेतु वर्ल्ड बैंक से स्वीकृत प्रोजेक्ट के 450 करोड़ में हुए टेंडर को रद्द कर अब सरकार ने दोबारा टेंडर कर, 872 crore में यह काम दिया। प्रश्न तो खड़ा हो ही गया कि आख़िर ऐसा क्यूँ कीया गया। (ANN: विधानसभा प्रश्न संख्या 1688 दिनांक 27/8/2024)
18. आपदा में घोटाला
• हिमाचल प्रदेश में पिछले वर्ष भारी बरसात के कारण आई आपदा में केंद्र सरकार द्वारा diye गए 1782 करोड़ रुपये और जानता द्वारा आपदा राहत कोष में दिए गए 251 करोड़ रुपये की धनराशि का जमकर दुरुपयोग हुआ। प्रदेश सरकार के मंत्रियों, विधायकों और यहाँ तक की जनता द्वारा हारे-नकारे लोगों ने अपने चहेतों को इस राशि को बांट दिया। विधानसभा के अंदर व बाहर बार बार मामला उठाने पर सरकार किसी तरह की जांच करने की जहमत नहीं उठा रही क्योंकि सरकार की सहमति से इस राशि की बंदरबाँट हुई और आपदा के कारण से वास्तविक रूप से प्रभावित लोग केंद्र डियरा भेजी इस राशि से वंचित रह गए, जिसकी ज़िम्मेदार सिर्फ और सिर्फ़ यह सुक्खु सरकार है।