बरागटा ने दावा किया कि वर्ष 2025 में करीब 45 हजार बागवानों ने एमआईएस के तहत सेब दिया था और इनमें 7 हजार से अधिक ऐसे बागवान हैं जिनकी आपूर्ति 100 बोरियों से अधिक थी। उन्होंने कहा कि यदि इतनी बड़ी संख्या में किसानों-बागवानों के भुगतान पर सवाल खड़े किए जा रहे हैं तो सरकार को पूरी प्रक्रिया सार्वजनिक करनी चाहिए।
उन्होंने मांग की कि MIS योजना के अंतर्गत हुई पूरी खरीद की उच्चस्तरीय, स्वतंत्र और समयबद्ध जांच करवाई जाए, दोषी अधिकारियों और प्रिक्योरमेंट असिस्टेंट्स पर कड़ी कार्रवाई की जाए तथा ईमानदार बागवानों को तुरंत राहत दी जाए।
डोगरा ने ज़ोर देकर कहा कि सड़ी सेब की बोरियां अब बागवानों के लिए एक आफत बन चुकी हैं और नदियों तथा नालों में फेंका जा रहा यह सड़ा सेब जनस्वास्थ्य के लिए एक गंभीर खतरा बन गया है।