साहिर लुधियानवी की लंबी नज्म परछाईयां शामिल है। परछाईयां के अलावा खून फिर खून है !, मेरे एहद के हसीनों, जवाहर लाल नेहरू, ऐ शरीफ इन्सानों, जश्ने गालिब गांधी हो या गालिब हो, लेनिन और जुल्म के खिलाफ जैसी शानदार नज्में इसी किताब में शामिल हैं। यह किताब वाकई साहिर का शाहकार है।