देश दुनिया में अपनी दिव्यता के लिये मशहूर कांगड़ा जिला के ज्वालामुखी में नये साल के पहले दिन ठाकुर फतेह सिंह परिवार की ओर से भैंरों मंदिर में विशाल भंडारा आयोजित किया गया। इस अवसर पर पंजाब के जाने माने भजन गायक शाही मान ने अपने साथियों सहित माता का गुणगान किया।
ज्वालामुखी से सटी कालीधार में स्थित भैंरों मंदिर में धर्मिक श्रद्धा एवं उल्लास के साथ लोगों ने नये साल का पहला दिन मनाया। बड़ी तादाद में श्रद्धालु यहां बाबा भैरव के मंदिर में सुबह से ही दर्शनों को आने शुरू हो गये थे। जिससे महौल भक्तिमय बना रहा। उन्होंने यहां भैरव को खुश करने के लिये अभिषेक किया। जिससे यहां भक्तिमय माहौल बना रहा। भैरव मंदिर के आसपास के सुनसान जंगल में भी आज अनोखा ही नजारा बना रहा।
स्थानीय विधायक संजय रतन ने अपनी धर्मपत्नि सहित यहां भैरव मंदिर में पूजा अर्चना की।
प्रसिद्ध शक्तिपीठ ज्वालामुखी से सटी कालीधार के आंचल में स्थित हजारों साल पुराने इस मंदिर का अपना एक महत्व है। यहां आज भी भक्त भैरव को प्रसन्न करने व अपनी मन्नत पूरी होने पर मदिरा से भैरव का अभिषेक करते हैं। इस जंगल में आज के दिन जब लोग यहां जुटते हैं तो यहां जगल में मंगल वाली कहावत सिद्ध होती है। घने जंगल में भक्तों की मौजूदगी से रौनक देखते ही बनती है।
बाबा भैरव के दरबार में आज दिन भर उल्लास का माहौल रहा।
ऐसा माना जाता है कि सती के अंग विभिन्न स्थानों पर गिरे तो शक्तिपीठ बने वहीं भगवान शंकर वहां वहां भैरव रूप में अवतरित हुये। ज्वालामुखी में उन्मत्त भैरव रूप में स्थापित हैं। हजारों साल पुरानी इस प्रस्तर प्रतिमा पर श्रद्धालु नतमस्तक हो अपनी मनौतियां मांगते हैं। यहां प्रसाद के रूप में बाकायदा मदिरा भी चढ़ाई जाती है। पहले पशु बलि का भी विधान था। लेकिन हिमाचल हाईकोर्ट के आदेशों के चलते इसे रोका गया है।
ठाकुर फतेह सिंह के परिवार की ओर से यहां श्रद्धालुओं के लिये विशेष भंडारे की व्यवस्था पूरा दिन के लिये की गई थी। खासकर जलेबी और गुलाब जामुन का लंगर आकर्षण का केन्द्र रहा।
आचार्य प्रबल शास्त्री ने बताया कि इस साल भी यहां पूरा दिन श्रद्धालुओं ने अपने आराध्य देव का पूजन किया,उन्होंने कहा कि भैरव को दंडाधिपति भी कहा जाता है। उनका वाहन कुत्ता है। उन्होंने बताया कि भगवान भैरव को खुश करने के लिए विशेषकर चमेली के तेल व खुशबूदार फूलों से अभिषेक किया जाता है। उनकी पूजा रात्रि काल में ही होती है। उन्होंने बताया कि भैरव अकाल मृत्यु के भय से मुक्ति दिलाते हैं। शिव के इस भैरव रूप की उपासना करने वाले भक्तों के सभी प्रकार के पाप, ताप एवं कष्ट दूर हो जाते हैं. इनकी भक्ति मनोवांछित फल देने वाली कही गयी है।