कांग्रेस नेता अलका लांबा ने दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को नैतिकता का पाठ पढाते हुये उन्हें पहले इस्तीफा देने की सलाह दी है। नैतिकता तो कहती हैं, जैसे मनीष सिसोदिया का इस्तीफा हुआ, सत्येंद्र जैन का इस्तीफ़ा हुआ, ठीक वैसे ही अरविंद केजरीवाल जी को भी इस्तीफा देना चाहिए - एक पार्टी - एक सरकार फिर नियम दो कैसे हो सकते हैं?
मेरा निजी तौर पर मानना है कि, #AAP के मुखिया और मुख्यमंत्री केजरीवाल जी ने अगर नई शराब नीति लाने से पहले #दिल्ली में #जनमत_संग्रह करवाया होता तो बेहतर होता, "#मेरी_दिल्ली ना ही कहती",
एक के साथ एक शराब की बोतल #फ्री देने से पहले #जनमत_संग्रह करवाया होता तो बेहतर होता, "#मेरी_दिल्ली ना ही कहती", शराब पीने की उम्र को 25 से घटा कर 21 करने से पहले #जनमत_संग्रह करवाया होता तो बेहतर होता, "#MeriDelhi ना ही कहती"
#CBI जांच के डर से नई शराब नीति वापस लें या ना लें पर #जनमत_संग्रह करवाया होता तो बेहतर होता, #मेरी_दिल्ली ना ही कहती,
#अगर यह सब तब करवाया होता तो आज ना जेल जाने का डर सताता, ना ही CM की कुर्सी जाने का, और ना ही #जनमत_संग्रह करवा पूछने की नौबत आती कि" इस्तीफ़ा दें या जेल से सरकार चलाएं". #नैतिकता तो यही कहती हैं कि #अरविंद_केजरीवाल को #मनीष_सिसौदिया और #सत्येंद्र_जैन की तरह #इस्तीफ़ा दें किसी दूसरे काबिल विधायक को जिम्मेदारी सौंपते हुए, कानूनी कार्रवाई का सामना करना चाहिए