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विपशयना साधना | Breaking news--दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद Kejriwal विपशयना साधना करेंगे

Updated on Saturday, December 24, 2022 11:28 AM IST

दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल आज अपनी विपशयना साधना के लिये रवाना होंगे। व अगले सात दिन तक दिल्ली सरकार के कामकाज व राजनिति से दूर रहेंगे। हालांकि यह साधना कहां करेंगे। इसकी जानकारी अभी नहीं मिल पाई है। लेकिन माना जा रहा है कि केजरीवाल हिमाचल प्रदेश के धर्मशाला या दक्षिण भारत जायेंगे।

विपश्यना आज से लगभग 2500 वर्ष पूर्व की एक विद्या है, जिसे गौतम बुद्ध ने विकसित की थी। माना जात है कि यह विद्या गौतम बुद्ध से पूर्व भी लगभग 7000 वर्ष पूर्व भारत के योगियों के पास मौजूद थी। माना जाता है कि बुध ने अंगुलिमाल जैसे डाकू को, जिसने 999 लोगो की हत्या कर दी थी इसी विद्या के द्वारा सद्गति प्रदान की थी.पर समय के साथ यह विद्या धीरे-धीरे विलुप्त होती चली गयी। भगवान् बुध ने अपने प्रयासो से इसे एक नया जीवन दिया और इस महान विद्या को जन-जन तक पहुँचाया।

इस विद्या में साधक अपनी साँसो के आवागमन पर ध्यान देते हुए धीरे-धीरे अपने समस्त संस्कारो को क्षीण कर मुक्ति को प्राप्त करता है।
विपश्यना की इस विद्या को भारत और सम्पूर्ण विश्व में सिखाने वाले सेन्टर, विपश्यना मेडीटेसन सेन्टर्स के नाम से पहचाने जाते है। श्री एस.एन.गोयनका के प्रयासो से इन सेन्टर्स की स्थापना की गयी। श्री गोयनका का जन्म और शिक्षा-दीक्षा म्यांमार में हुई।अपनी युवावस्था के दिनों में गोयनका जी एक विशेष प्रकार के माइग्रेन से पीडित हो गये, जिसमे हर 15 दिन मे सिर में दर्द होता था। इसका कोई इलाज नहीं था। इसलिए उन्हें म़ॉरफीन के इनजेक्सन दिए जाने लगे। पर इन इनजेक्सनो के वे Addict हुए जा रहे थे। इसलिए उन्होने अपना इलाज स्विटजरलैंड,अमेरिका,जापान,U.K. जैसे कई विकसित देशों में कराया,परन्तु कोई लाभ नही हुआ।

अन्त में अपने एक करीबी के कहने पर उन्होने Shri Sayagyi U Ba Khin से विपश्यना की विद्या सीखी। और केवल उनका रोग ही ठीक नही हुआ, उन्हे एक नया जीवन मिला। फिर उन्होने भारत आकर मात्र 10 लोगो को अपना पहला शिविर लगा कर विपश्यना सिखायी। और फिर शिविर पर शिविर लगते चले गये और धीरे-धीरे विपश्यना मेडीटेसन सेन्टर्स की स्थापना होती चली गई।


अपने टिवट्र हैंडल से केजरीवाल ने इसकी जानकारी देते हुये कहा कि , आज विपासना साधना के लिये जा रहा हूँ। साल में एक बार जाने की कोशिश करता हूँ। 1 जनवरी को लौटूँगा कई सौ साल पहले भगवान बुद्ध ने ये विद्या सिखाई थी। क्या आपने विपासना की है? अगर नहीं, तो एक बार ज़रूर कीजिए। मानसिक, शारीरिक और आध्यात्मिक बहुत लाभ होता है।

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