राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने प्रेस से बात करते हुए कहा, “मोदी सरकार जो कहती है उसके तहत कभी नहीं चलती है। एक उदाहरण है, 50 लाख करोड़ का बजट को 12 मिनट में पास किया गया। वो हमेशा कहते थे कि संसद चलाने में विपक्षी पाटिर्यों की दिलचस्पी नहीं है। लेकिन बाधा तो सत्ता पक्ष ने डाला। जब भी हम बोलने के लिए उठते थे और हम नोटिस देते थे। नोटिस पर चर्चा की मांग करते थे।
तब वह हमको बोलने नहीं देते थे। ऐसा पहली बार हुआ कि सत्ता पक्ष ने ही संसद को चलने नहीं दिया। इसके पीछे वजह यही है कि जो हमने मुद्दे उठाए हैं, खास कर अडानी से जुड़े मुद्दे हैं।“
उन्होंने कहा कि 18 से 19 पार्टियों ने मिलकर इस कॉमन मुद्दे को उठाया। मुद्दा यह है अडानी को इतना महत्व क्यों दिया जा रहा है। अडानी की संपत्ति केवल ढाई साल में 12 लाख करोड़ रुपये कैसे बनी? सरकार से पैसा लिया, एलआईसी से लिया। बैंकों से लिया। सरकार का पैसा और पब्लिक सेक्टर की संपत्ति उन्होंने खरीदा। यानी पैसा भी सरकार का और संपत्ति भी सरकार की। वह संपत्ति बनाते गए। इतनी बड़ी संपत्ति वाला आदमी देश में या विदेश में कोई नहीं होगा। कांग्रेस अध्यक्ष ने पूछा कि किन-किन देशों के प्रधानमंत्रियों और उद्योगपतियों से वे (अडानी) मिले? इस पर चर्चा होनी चाहिए। हम जेपीसी की मांग कर रहे हैं। इसमें उन्हें कोई नुकसान नहीं होने वाला था। उनके पास बहुमत है तो ज्यादा लोग आपके रहेंगे। इसके बावजूद मोदी सरकार जेपीसी से क्यों डर रहे हैं?मार्च को लेकर कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा, लोकतंत्र में लोकतांत्रिक तरीके से लड़ना हमारा काम है। सरकार अगर नहीं मानती है तो ये हठधर्मी है। सरकार को हमेशा सकारात्मक रहना चाहिए, प्रतिक्रिया देनी चाहिए। अगर आप लोकतंत्र को जिंदा रखना चाहते हैं तो विपक्ष की भी बात सुननी चाहिए।