शिमला। हनुमान_जन्मोत्सव के अवसर पर आज हिमाचल के मंदिरों में सुबह से बजरंगबली का गुणगान हो रहा है। खासकर शिमला के प्रसिद्ध हनुमान मंदिर जाखू खासी रौनक देखने को मिल रही है। यहां सुबह चार बजे मंदिर के कपाट खुल गए, व विशेष पूजा व आरती हुई। और बडी तादाद में श्रद्धालु दर्शनों को आ रहे हैं। यहां रामचरित मानस का पाठ किया जा रहा है।
घने देवदार के पेड़ों के बीच हिमाचल प्रदेश के शिमला का जाखू मंदिर, जाखू पहाड़ी पर समुद्र तल से 8048 फीट की ऊँचाई पर स्थित है। यह बर्फीली चोटियों, घाटियों और शिमला शहर का सुंदर और मनोरम दृश्य प्रस्तुत करता है। 108 फुट ऊँची इस प्रतिमा को शिमला के किसी भी कोने से देखा जा सकता है। यह विशालकाय प्रतिमा स्थित है जाखू मंदिर में जो समुद्र तल से 8048 फुट की ऊँचाई पर जाखू पहाड़ पर स्थित है।
भगवान हनुमान को समर्पित इस मंदिर को लेकर मान्यता पौराणिक कथा के अनुसार राम तथा रावण के मध्य हुए युद्ध के दौरान मेघनाद के तीर से भगवान राम के अनुज लक्ष्मण घायल एवं मूर्छित हो गए थे। उस समय सब उपचार निष्फल हो जाने के कारण वैद्यराज सुषेण ने कहा कि अब एक ही उपाय शेष बचा है। हिमालय की संजीवनी बूटी से लक्ष्मण की जान बचायी जा सकती है। इस संकट की घड़ी में रामभक्त हनुमान ने कहा प्रभु मैं संजीवनी लेकर आता हूँ। हनुमानजी हिमालय की और उड़े, रास्ते में उन्होंने नीचे पहाड़ी पर ’याकू’ नामक ऋषि को देखा तो वे नीचे पहाड़ी पर उतरे। जिस समय हनुमान पहाड़ी पर उतरे, उस समय पहाड़ी उनका भार सहन न कर सकी। परिणाम स्वरूप पहाड़ी जमीन में धंस गई। मूल पहाड़ी आधी से ज्यादा धरती में समा गई। इस पहाड़ी का नाम ’जाखू’ है।
ब्ताया जाता है कि यह ’जाखू’ नाम ऋषि याकू के नाम पर पड़ा था। हनुमान ने ऋषि को नमन कर संजीवनी बूटी के बारे में विस्तृत जानकारी प्राप्त की तथा ऋषि को वचन दिया कि संजीवनी लेकर आते समय ऋषि के आश्रम पर ज़रूर आएंगे। हनुमान ने रास्ते में ’कालनेमी’ नामक राक्षस द्वारा रास्ता रोकने पर युद्ध करके उसे परास्त किया। इस दौड़धूप तथा समयाभाव के कारण हनुमान ऋषि के आश्रम नहीं जा सके। हनुमान याकू ऋषि को नाराज नहीं करना चाहते थे, इस कारण अचानक प्रकट होकर और अपना विग्रह बनाकर अलोप हो गए। ऋषि याकू ने हनुमान की स्मृति में मंदिर का निर्माण करवाया। मंदिर में जहां हनुमानजी ने अपने चरण रखे थे, उन चरणों को संगमरमर पत्थर से बनवाकर रखा गया है। ऋषि ने वरदान दिया कि बंदरों के देवता हनुमान जब तक यह पहाड़ी है, लोगों द्वारा पूजे जाएंगे। ऐसा माना जाता है कि उनके वानर साथियों ने यह समझकर कि बजरंगबली उनसे नाराज होकर अकेले ही गए हैं, उनका यहीं पहाड़ी पर वापस लौटने का इंतजार करते रहे। इसी के परिणामस्वरूप आज भी यहाँ व्यापक संख्या में वानर पाए जाते हैं।
यह प्रतिमा इतनी विशाल है कि लगभग शिमला के प्रत्येक कोने से देखी जा सकती है। ‘प्राइड ऑफ शिमला’ कही जाने वाली यह प्रतिमा विश्व की कुछ सबसे ऊँची प्रतिमाओं में से एक है। हिमाचल प्रदेश की यात्रा में जाने वाले श्रद्धालु शिमला के इस हनुमान मंदिर की यात्रा अवश्य करते हैं।
हनुमानजी चार धाम परियोजना के तहत देश भर में चारों दिशाओं में स्थापित की जा रही 4 प्रतिमाओं में से यह दूसरी प्रतिमा है। इस प्रतिमा की स्थापना पश्चिम में मोरबी में परम पूज्य बापू केशवानंद जी के आश्रम में की गई है। इस श्रृंखला में हनुमान जी की पहली प्रतिमा की स्थापना वर्ष 2010 में उत्तर में शिमला में की गई थी। दक्षिण में रामेश्वरम में हनुमान जी की प्रतिमा पर काम शुरू हो गया है।