भारतीय ज्योतिष शास्त्र में पंचांग का अपना महत्व है। पंचांग के अनुसार ही हम अपने धार्मिक क्रियाकलाप करते हैं। शुभ अशुभ का ज्ञान हमें प्राप्त होता है। आइये जानते हैं, आज के पंचांग के अनुसार कब है शुभ मुहूर्त और कब तक है राहुकाल और क्या है ग्रह चाल। 24 सितंबर 2026 का पंचांग धार्मिक और ज्योतिषीय दृष्टि से खास है। गुरुवार के दिन भाद्रपद शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि रहेगी। इस दिन प्रदोष व्रत का संयोग होने से भगवान शिव की पूजा का विशेष महत्व रहेगा। जानिए दिनभर की तिथि, नक्षत्र, योग, करण, चंद्र राशि, राहुकाल और शुभ-अशुभ मुहूर्त की पूरी जानकारी।
हिन्दू पंचांग के अनुसार आज गुरुवार भाद्रपद , शुक्ल त्रयोदशी है। सूर्य दक्षिणायन, उत्तर गोल, शरद ऋतु। शक संवत 1948 , विक्रमी संवत 2083,राहुकाल दोपहर 02 बजकर 00 मिनट से 03 बजकर 30 मिनट तक।
वार: गुरुवार
विक्रम संवत: 2083
मास: भाद्रपद
पक्ष: शुक्ल पक्ष
ऋतु: शरद
तिथि और नक्षत्र
तिथि: शुक्ल पक्ष त्रयोदशी रात 11:18 बजे तक, इसके बाद चतुर्दशी शुरू होगी।
नक्षत्र: धनिष्ठा सुबह 10:35 बजे तक, इसके बाद शतभिषा नक्षत्र रहेगा।
योग: धृति, इसके बाद शूल योग।
करण: कौलव सुबह 11:09 बजे तक, इसके बाद तैतिल करण रहेगा।
चंद्र राशि: कुंभ
सूर्य राशि: कन्या
सूर्योदय और सूर्यास्त
सूर्योदय - प्रातः 06:10 बजे
सूर्यास्त - सायं 06:16 बजे
शुभ मुहूर्त
ब्रह्म मुहूर्त -सुबह 4:35 से 5:22 बजे तक
अभिजीत मुहूर्त - दोपहर 11 बजकर 49 मिनट से 12 बजकर 37 मिनट तक ।
अमृत काल - अगले दिन तड़के 03 बजकर 56 मिनट से प्रातः 05 बजकर 35 मिनट (25 सितंबर) तक ।
अशुभ मुहूर्त
राहुकाल - दोपहर 02 बजकर 00 मिनट से 03 बजकर 30 मिनट तक ।
गुलिक काल- सुबह 09 बजकर 00 मिनट से 10 बजकर 30 मिनट तक ।
यमगंड - सुबह 06 बजकर 00 मिनट से 07 बजकर 30 मिनट तक ।
गुरु प्रदोष व्रत
24 सितंबर को गुरु प्रदोष व्रत रखा जाएगा। शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि होने के कारण यह दिन भगवान शिव की आराधना के लिए विशेष माना जाता है। श्रद्धालु प्रदोष काल में भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा-अर्चना कर सकते हैं।
कोई भी शुभ समय या मुहूर्त के दौरान, राहुकाल गुलिक काल, यमगण्ड काल से बचना चाहिए क्योंकि ये समय अशुभ माना जाता है। अपने दैनिक पंचांग को रोजाना देखें और किसी भी नए काम को शुरू करने के लिए इसका पालन करें जैसे कि वैवाहिक समारोह, सामाजिक मामलों, महत्वपूर्ण कार्यक्रमों, उद्घाटन, नए व्यापार उपक्रम आदि जैसे शुभ कार्यक्रम इसके अनुसार करें।
विशेष: पंचांग में दिए गए सूर्योदय, सूर्यास्त और मुहूर्त के समय स्थान के अनुसार कुछ मिनट का अंतर हो सकता है।