भारतीय ज्योतिष शास्त्र में पंचांग का अपना महत्व है। पंचांग के अनुसार ही हम अपने धार्मिक क्रियाकलाप करते हैं। शुभ अशुभ का ज्ञान हमें प्राप्त होता है। आइये जानते हैं, आज के पंचांग के अनुसार कब है शुभ मुहूर्त और कब तक है राहुकाल और क्या है ग्रह चाल। 31 अगस्त 2026 को सोमवार के दिन भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि रहेगी। यह दिन धार्मिक दृष्टि से विशेष है, क्योंकि इसी दिन कजरी तीज का व्रत रखा जाएगा। तृतीया तिथि के बाद चतुर्थी तिथि शुरू होगी, जिसके चलते गणेश आराधना से जुड़ा संकष्टी व्रत भी महत्वपूर्ण रहेगा। जानिए 31 अगस्त का पूरा पंचांग, जिसमें तिथि, वार, नक्षत्र, योग, करण, चंद्र राशि, सूर्योदय, सूर्यास्त, राहुकाल और शुभ मुहूर्त की जानकारी शामिल है।
हिन्दू पंचांग के अनुसार आज भाद्रपद, कृष्ण, तृतीया, सोमवार है। सूर्य दक्षिणायन, उत्तर गोल, वर्षा ऋतु। शक संवत 1948 , विक्रमी संवत 2083, 31 अगस्त 2026, राहुकाल सुबह 07 बजकर 30 मिनट से 09 बजकर 00 मिनट तक।
31 अगस्त 2026 का पंचांग
दिन: सोमवार
तारीख: 31 अगस्त 2026
मास: भाद्रपद
पक्ष: कृष्ण पक्ष
तिथि: कृष्ण तृतीया, सुबह लगभग 8:50 बजे तक, इसके बाद चतुर्थी
विक्रम संवत: 2083
शक संवत: 1948
अयन: दक्षिणायन
ऋतु: वर्षा ऋतु
तिथि
31 अगस्त को भाद्रपद कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि रहेगी। तृतीया तिथि 30 अगस्त को सुबह लगभग 9:36 बजे शुरू हुई और 31 अगस्त को सुबह लगभग 8:50 बजे समाप्त होगी। उदया तिथि के आधार पर कजरी तीज का व्रत 31 अगस्त को रखा जाएगा। इसके बाद कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि शुरू होगी, जिसके कारण इसी दिन रात में संकष्टी चतुर्थी का व्रत भी माना जा रहा है।
नक्षत्र
31 अगस्त को चंद्रमा के नक्षत्र में परिवर्तन होगा। उपलब्ध पंचांग गणना के अनुसार दिन में रेवती नक्षत्र का प्रभाव रहेगा। नक्षत्र के चरण और परिवर्तन के समय में स्थान के अनुसार थोड़ा अंतर हो सकता है।
चंद्र राशि
इस दिन चंद्रमा मीन राशि में रहेगा।
सूर्य राशि
सूर्य सिंह राशि में स्थित रहेगा। सूर्य के नक्षत्र में भी दिन के दौरान परिवर्तन का उल्लेख पंचांग गणना में मिलता है।
योग
दिन के पंचांग में योग का परिवर्तन रहेगा। दैनिक पूजा, धार्मिक अनुष्ठान या शुभ कार्य के लिए स्थानीय पंचांग में दिए गए समय को प्राथमिकता देना उचित रहेगा।
करण
तृतीया तिथि समाप्त होने के बाद चतुर्थी तिथि शुरू होगी और उसी के अनुसार करण में भी परिवर्तन होगा। करण पंचांग के पांच प्रमुख अंगों में से एक है और तिथि के आधे भाग से संबंधित होता है।
सूर्योदय और सूर्यास्त
सूर्योदय: लगभग सुबह 5:59 बजे
सूर्यास्त: लगभग शाम 6:51 बजे
दिन की अवधि: लगभग 12 घंटे 52 मिनट।
शुभ मुहूर्त
ब्रह्म मुहूर्त - सुबह में 03 बजकर 55 मिनट से सुबह 04 बजकर 41 मिनट तक रहेगा।
अभिजीत मुहूर्त - दोपहर 11 बजकर 56 मिनट से 12 बजकर 47 मिनट तक रहेगा।
अमृत काल - अगले दिन तड़के 01 बजकर 01 मिनट से तड़के 02 बजकर 36 मिनट (1 सितंबर) तक रहेगा।
अशुभ मुहूर्त
राहुकाल - सुबह 07 बजकर 30 मिनट से 09 बजकर 00 मिनट तक ।
गुलिक काल- दोपहर 01 बजकर 30 मिनट से 03 बजकर 00 मिनट तक ।
यमगंड - सुबह 10 बजकर 30 मिनट से दोपहर 12 बजकर 00 मिनट तक ।
31 अगस्त के प्रमुख व्रत एवं पर्व
कजरी तीज
31 अगस्त 2026, सोमवार को कजरी तीज का व्रत रखा जाएगा। यह भाद्रपद कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि को मनाया जाता है। विवाहित महिलाएं पति की लंबी आयु, सुखी दांपत्य जीवन और परिवार की समृद्धि की कामना से व्रत रखती हैं। अविवाहित कन्याएं भी अच्छे जीवनसाथी की कामना से इस व्रत को करती हैं।
संकष्टी चतुर्थी
तृतीया सुबह समाप्त होने के बाद चतुर्थी तिथि शुरू होने के कारण 31 अगस्त की रात संकष्टी चतुर्थी का व्रत भी पड़ता है। संकष्टी व्रत में चंद्रोदय के बाद भगवान गणेश की पूजा और चंद्रमा को अर्घ्य देने की परंपरा है।
कजरी तीज पर क्या करें
भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करें।
सुहागिन महिलाएं श्रृंगार सामग्री अर्पित कर सकती हैं।
कजरी तीज की कथा का श्रवण करें।
व्रत रखने वाले श्रद्धालु अपनी परंपरा के अनुसार व्रत करें।
शाम को पूजा के बाद चंद्रमा के दर्शन और अर्घ्य की परंपरा वाले क्षेत्रों में उसका पालन करें।
जरूरतमंदों को भोजन, वस्त्र या अन्य सामग्री का दान करना शुभ माना जाता है।
कोई भी शुभ समय या मुहूर्त के दौरान, राहुकाल गुलिक काल, यमगण्ड काल से बचना चाहिए क्योंकि ये समय अशुभ माना जाता है। अपने दैनिक पंचांग को रोजाना देखें और किसी भी नए काम को शुरू करने के लिए इसका पालन करें जैसे कि वैवाहिक समारोह, सामाजिक मामलों, महत्वपूर्ण कार्यक्रमों, उद्घाटन, नए व्यापार उपक्रम आदि जैसे शुभ कार्यक्रम इसके अनुसार करें।