#30 अगस्त 2026 का पंचांग: तिथि, नक्षत्र, योग, करण और राहुकाल की पूरी जानकारी
भारतीय ज्योतिष शास्त्र में पंचांग का अपना महत्व है। पंचांग के अनुसार ही हम अपने धार्मिक क्रियाकलाप करते हैं। शुभ अशुभ का ज्ञान हमें प्राप्त होता है। आइये जानते हैं, आज के पंचांग के अनुसार कब है शुभ मुहूर्त और कब तक है राहुकाल और क्या है ग्रह चाल। 30 अगस्त 2026 का पंचांग:** रविवार को भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की द्वितीया तिथि रहेगी। दिन की शुरुआत उत्तराभाद्रपद नक्षत्र के साथ होगी। धार्मिक कार्यों, पूजा-पाठ और दैनिक शुभ कार्यों के लिए तिथि, नक्षत्र, योग और राहुकाल की जानकारी महत्वपूर्ण मानी जाती है। आइए जानते हैं 30 अगस्त 2026 का विस्तृत पंचांग।
हिन्दू पंचांग के अनुसार आज रविवार भाद्रपद, कृष्ण, द्वितीया है। सूर्य दक्षिणायन, उत्तर गोल, वर्षा ऋतु। शक संवत 1948 , विक्रमी संवत 2083, 30 अगस्त 2026, राहुकाल शाम 04 बजकर 30 मिनट से 06 बजकर 00 मिनट तक।
दिन:** रविवार
तारीख:** 30 अगस्त 2026
हिंदू मास:** भाद्रपद
पक्ष:** कृष्ण पक्ष
तिथि:** द्वितीया प्रातः 09 बजकर 36 मिनट तक उपरांत तृतीया तिथि का आरंभ।
नक्षत्र:** उत्तराभाद्रपद
चंद्र राशि:** मीन
सूर्य राशि:** सिंह
वार:** रविवार
विक्रम संवत:** 2083
शक संवत:** 1948
चंद्रमा की स्थिति
30 अगस्त को चंद्रमा **मीन राशि** में रहेगा। चंद्रमा की यह स्थिति भावनात्मक संवेदनशीलता, कल्पनाशीलता और आध्यात्मिक रुचि को बढ़ाने वाली मानी जाती है।
सूर्योदय और सूर्यास्त
सूर्योदय - प्रातः 05:58 बजे
सूर्यास्त का समय: - सायं 06:45 बजे
शुभ मुहूर्त
ब्रह्म मुहूर्त - सुबह 03 बजकर 55 मिनट से सुबह 04 बजकर 41 मिनट तक ।
अभिजीत मुहूर्त - दोपहर 11 बजकर 56 मिनट से 12 बजकर 47 मिनट तक ।
अमृत काल - रात्रि 10 बजकर 56 मिनट से अगले दिन तड़के 12 बजकर 32 मिनट (31 अगस्त) तक ।
अशुभ मुहूर्त
राहुकाल - शाम 04 बजकर 30 मिनट से 06 बजकर 00 मिनट तक।
गुलिक काल- दोपहर 03 बजकर 00 मिनट से शाम 04 बजकर 30 मिनट तक ।
यमगंड - दोपहर 12 बजकर 00 मिनट से 01 बजकर 30 मिनट तक ।
रविवार का धार्मिक महत्व
रविवार का दिन भगवान सूर्यदेव को समर्पित माना जाता है। इस दिन सुबह स्नान के बाद सूर्यदेव को तांबे के पात्र से जल अर्पित करना और सूर्य मंत्र का जाप करना शुभ माना जाता है। जरूरतमंद व्यक्ति को गेहूं, गुड़ या लाल वस्त्र का दान करना भी धार्मिक दृष्टि से पुण्यकारी माना जाता है।
आज क्या करें?
- सुबह सूर्यदेव को जल अर्पित करें।
* आदित्य हृदय स्तोत्र या सूर्य मंत्र का जाप करें।
* जरूरतमंद व्यक्ति को भोजन या अनाज का दान करें।
* घर में पूजा-पाठ और धार्मिक गतिविधियां करें।
* महत्वपूर्ण कार्यों में समय और मुहूर्त का ध्यान रखें।
- कोई भी शुभ समय या मुहूर्त के दौरान, राहुकाल गुलिक काल, यमगण्ड काल से बचना चाहिए क्योंकि ये समय अशुभ माना जाता है। अपने दैनिक पंचांग को रोजाना देखें और किसी भी नए काम को शुरू करने के लिए इसका पालन करें जैसे कि वैवाहिक समारोह, सामाजिक मामलों, महत्वपूर्ण कार्यक्रमों, उद्घाटन, नए व्यापार उपक्रम आदि जैसे शुभ कार्यक्रम इसके अनुसार करें।