भारतीय ज्योतिष शास्त्र में पंचांग का अपना महत्व है। पंचांग के अनुसार ही हम अपने धार्मिक क्रियाकलाप करते हैं। शुभ अशुभ का ज्ञान हमें प्राप्त होता है। आइये जानते हैं, आज के पंचांग के अनुसार कब है शुभ मुहूर्त और कब तक है राहुकाल और क्या है ग्रह चाल। 27 अगस्त 2026, गुरुवार का दिन धार्मिक और ज्योतिषीय दृष्टि से महत्वपूर्ण रहेगा। इस दिन **श्रावण मास, शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि** प्रातः लगभग **9:09 बजे तक** रहेगी, इसके बाद **पूर्णिमा तिथि** प्रारंभ होगी। चंद्रमा दिन के अधिकांश समय **मकर राशि** में रहेगा और बाद में कुंभ राशि में प्रवेश करेगा। धनिष्ठा नक्षत्र का प्रभाव रहेगा। पंचांग के समय स्थान के अनुसार कुछ मिनटों का अंतर हो सकता है।
हिन्दू पंचांग के अनुसार आज श्रावण, शुक्ल, चतुर्दशी, गुरुवार है। सूर्य दक्षिणायन, उत्तर गोल, वर्षा ऋतु। शक संवत 1948 , विक्रमी संवत 2083, 27 अगस्त 2026 , राहुकाल दोपहर 01 बजकर 30 मिनट से 03 बजकर 00 मिनट तक।
आज का पंचांग
* दिनांक: 27 अगस्त 2026
* वार: गुरुवार
* मास: श्रावण
* पक्ष: शुक्ल पक्ष
* तिथि: चतुर्दशी प्रातः 9:09 बजे तक, इसके बाद पूर्णिमा तिथि का आरंभ।
* नक्षत्र: धनिष्ठा
* योग: शोभन प्रातः 7:54 बजे तक, इसके बाद अतिगंड
* करण: वणिज प्रातः 9:09 बजे तक, इसके बाद विष्टि (भद्रा)
* चंद्र राशि: मकर, बाद में कुंभ
* सूर्य राशि: सिंह
* विक्रम संवत: 2083
* शक संवत: 1948
* अयन: दक्षिणायन
* ऋतु: वर्षा
शुभ मुहूर्त
- ब्रह्म मुहूर्त: प्रातः 3:55 से 4:42 बजे तक
* अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 11:0257 से 12:50बजे तक
* विजय मुहूर्त: स्थानीय पंचांग के अनुसार
* गोधूलि मुहूर्त: सूर्यास्त के आसपास
- अमृत काल : दोपहर बाद 03 बजकर 13 मिनट से सायं 04 बजकर 55 मिनट तक ।
अशुभ काल
- राहुकाल: दोपहर 1:30 से 3:00 बजे तक
* यमगंड काल: प्रातः 6:07 से 7:30 बजे तक
* गुलिक काल: प्रातः 9:00 से 10:30 बजे तक
सूर्योदय - प्रातः 05:56 बजे
सूर्यास्त - सायं 06:48 बजे
भारत के अलग-अलग शहरों में सूर्योदय और सूर्यास्त के अनुसार थोड़ा बदल सकते हैं।
आज का विशेष महत्व
27 अगस्त को चतुर्दशी के बाद पूर्णिमा तिथि प्रारंभ हो रही है। पूर्णिमा तिथि का संबंध पूजा-पाठ, स्नान, दान और धार्मिक कार्यों से विशेष रूप से माना जाता है। अगले दिन पूर्णिमा के अवसर पर रक्षाबंधन सहित विभिन्न धार्मिक अनुष्ठान मनाए जाएंगे।
27 अगस्त 2026 का दिन गुरुवार, श्रावण शुक्ल पक्ष और पूर्णिमा तिथि के आगमन के कारण विशेष महत्व रखता है। राहुकाल और अन्य अशुभ समय से बचते हुए शुभ कार्यों की योजना बनाई जा सकती है।
कोई भी शुभ समय या मुहूर्त के दौरान, राहुकाल गुलिक काल, यमगण्ड काल से बचना चाहिए क्योंकि ये समय अशुभ माना जाता है। अपने दैनिक पंचांग को रोजाना देखें और किसी भी नए काम को शुरू करने के लिए इसका पालन करें जैसे कि वैवाहिक समारोह, सामाजिक मामलों, महत्वपूर्ण कार्यक्रमों, उद्घाटन, नए व्यापार उपक्रम आदि जैसे शुभ कार्यक्रम इसके अनुसार करें।