भारतीय ज्योतिष शास्त्र में पंचांग का अपना महत्व है। पंचांग के अनुसार ही हम अपने धार्मिक क्रियाकलाप करते हैं। शुभ अशुभ का ज्ञान हमें प्राप्त होता है। आइये जानते हैं, आज के पंचांग के अनुसार कब है शुभ मुहूर्त और कब तक है राहुकाल और क्या है ग्रह चाल। 23 अगस्त 2026 का पंचांग: आज रविवार के दिन श्रावण शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि है। इस दिन श्रावण पुत्रदा एकादशी का व्रत रखा जाएगा। आइए जानते हैं 23 अगस्त 2026 को सूर्योदय-सूर्यास्त का समय, राहुकाल, शुभ मुहूर्त, तिथि, नक्षत्र, योग, करण और आज के पंचांग का विशेष महत्व।
हिन्दू पंचांग के अनुसार आज रविवार, श्रावण, शुक्ल, एकादशी, है। सूर्य दक्षिणायन, उत्तर गोल, वर्षा ऋतु। शक संवत 1948 , विक्रमी संवत 2083, 23 अगस्त 2026 2026, राहुकाल शाम 04 बजकर 30 मिनट से 06 बजकर 00 मिनट तक।
23 अगस्त 2026 का पंचांग
दिन: रविवार
तिथि: श्रावण शुक्ल पक्ष एकादशी अगले दिन तड़के 04 बजकर 18 मिनट (24 अगस्त) तक उपरांत द्वादशी तिथि का आरंभ।
एकादशी व्रत: श्रावण पुत्रदा एकादशी
विक्रम संवत: 2083
शक संवत: 1948
ऋतु: वर्षा
चंद्र राशि: धनु
सूर्य राशि: सिंह
तिथि: एकादशी तिथि 24 अगस्त सुबह लगभग 4:18 बजे तक रहेगी।
नक्षत्र: मूल नक्षत्र शाम 5:44 बजे तक, इसके बाद पूर्वाषाढ़ा।
योग: विष्कम्भ सुबह 6:14 बजे तक, इसके बाद प्रीति योग।
करण: वणिज दोपहर 3:10 बजे तक, इसके बाद विष्टि करण।
सूर्योदय और सूर्यास्त
सूर्योदय: सुबह 5:54 बजे
सूर्यास्त: शाम 7:00 बजे
चंद्रोदय: शाम 4:10 बजे
चंद्रास्त: 24 अगस्त रात 1:49 बजे के आसपास
शुभ मुहूर्त
ब्रह्म मुहूर्त : सुबह में 03 बजकर 55 मिनट से सुबह 04 बजकर 41 मिनट तक ।
अभिजीत मुहूर्त : दोपहर 11 बजकर 58 मिनट से 12 बजकर 49 मिनट तक ।
अमृत काल : का समय प्रातः 10 बजकर 33 मिनट से दोपहर 12 बजकर 21 मिनट तक ।
अशुभ मुहूर्त
राहुकाल : शाम 04 बजकर 30 मिनट से 06 बजकर 00 मिनट तक ।
गुलिक काल : दोपहर 03 बजकर 00 मिनट से शाम 04 बजकर 30 मिनट तक ।
यमगंड : दोपहर 12 बजकर 00 मिनट से 01 बजकर 30 मिनट तक ।
23 अगस्त का विशेष महत्व
23 अगस्त 2026 को श्रावण पुत्रदा एकादशी का व्रत रखा जाएगा। धार्मिक मान्यता के अनुसार इस दिन भगवान विष्णु की पूजा, व्रत, मंत्र-जप और दान-पुण्य का विशेष महत्व माना जाता है। एकादशी व्रत का पारण अगले दिन द्वादशी तिथि में किया जाता है।
कोई भी शुभ समय या मुहूर्त के दौरान, राहुकाल गुलिक काल, यमगण्ड काल से बचना चाहिए क्योंकि ये समय अशुभ माना जाता है। अपने दैनिक पंचांग को रोजाना देखें और किसी भी नए काम को शुरू करने के लिए इसका पालन करें जैसे कि वैवाहिक समारोह, सामाजिक मामलों, महत्वपूर्ण कार्यक्रमों, उद्घाटन, नए व्यापार उपक्रम आदि जैसे शुभ कार्यक्रम इसके अनुसार करें।
नोट: पंचांग के समय स्थान के अनुसार कुछ मिनट आगे-पीछे हो सकते हैं। ऊपर दिए गए समय हिमाचल/उत्तर भारत के संदर्भ में रखे गए हैं।