भारतीय ज्योतिष शास्त्र में पंचांग का अपना महत्व है। पंचांग के अनुसार ही हम अपने धार्मिक क्रियाकलाप करते हैं। शुभ अशुभ का ज्ञान हमें प्राप्त होता है। आइये जानते हैं, आज के पंचांग के अनुसार कब है शुभ मुहूर्त और कब तक है राहुकाल और क्या है ग्रह चाल। 13 अगस्त 2026, गुरुवार को श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि है। इस दिन से चंद्रमा के बढ़ते पक्ष यानी शुक्ल पक्ष की शुरुआत होती है। पंचांग के अनुसार आज तिथि, नक्षत्र, योग और करण के साथ शुभ-अशुभ समय की जानकारी धार्मिक कार्यों और दैनिक जीवन की योजना बनाने में उपयोगी मानी जाती है।
हिन्दू पंचांग के अनुसार आज श्रावण, शुक्ल, प्रतिपदा, गुरुवार है। सूर्य दक्षिणायन, उत्तर गोल, वर्षा ऋतु। शक संवत 1948 , विक्रमी संवत 2083, 13 अगस्त 2026, राहुकाल दोपहर 02 बजकर 00 मिनट से दोपहर 03 बजकर 30 मिनट तक।
📅 13 अगस्त 2026 का पंचांग
पंचांग विवरण
दिन गुरुवार
तिथि श्रावण शुक्ल प्रतिपदा तिथि रात्रि 08 बजकर 41 मिनट तक उपरांत द्वितीया तिथि का आरंभ।
पक्ष शुक्ल पक्ष
मास श्रावण
विक्रम संवत 2083
शक संवत 1948
नक्षत्र मघा
नक्षत्र समाप्ति 14 अगस्त प्रातः लगभग 4:38 बजे
योग वरियान
योग समाप्ति दोपहर लगभग 12:16 बजे
करण किंस्तुघ्न, फिर बव
वार गुरुवार
सूर्य राशि कर्क
चंद्र राशि सिंह
इन तिथियों और समयों में स्थान के अनुसार कुछ मिनट का अंतर हो सकता है।
🌅 सूर्योदय और सूर्यास्त
13 अगस्त को सूर्योदय और सूर्यास्त का समय स्थान के अनुसार अलग रहेगा। उदाहरण के लिए, पंचांग गणना में नासिक के लिए सूर्योदय सुबह 6:14 बजे और सूर्यास्त शाम 7:05 बजे दिया गया है। इसलिए कांगड़ा/धर्मशाला क्षेत्र में प्रकाशन के लिए स्थानीय समय अलग से रखना उचित होगा।
🕉️ शुभ मुहूर्त
ब्रह्म मुहूर्त : सुबह में 03 बजकर 55 मिनट से सुबह 04 बजकर 41 मिनट तक ।
अभिजीत मुहूर्त : दोपहर 11 बजकर 59 मिनट से 12 बजकर 52 मिनट तक ।
अमृत काल : का समय अगले दिन तड़के 02 बजकर 23 मिनट से 03 बजकर 53 मिनट (14 अगस्त) तक ।
अशुभ मुहूर्त
राहुकाल : दोपहर 02 बजकर 00 मिनट से 03 बजकर 30 मिनट तक ।
गुलिक काल : सुबह 09 बजकर 00 मिनट से 10 बजकर 30 मिनट तक ।
यमगंड : सुबह 06 बजकर 00 मिनट से 07 बजकर 30 मिनट तक ।
🙏 धार्मिक महत्व
श्रावण शुक्ल प्रतिपदा से शुक्ल पक्ष का आरंभ होता है। श्रावण मास भगवान शिव की आराधना के लिए विशेष माना जाता है। इस दौरान शिवलिंग पर जलाभिषेक, बेलपत्र अर्पित करने, महामृत्युंजय मंत्र का जाप और दान-पुण्य करने की धार्मिक मान्यता है।
कोई भी शुभ समय या मुहूर्त के दौरान, राहुकाल गुलिक काल, यमगण्ड काल से बचना चाहिए क्योंकि ये समय अशुभ माना जाता है। अपने दैनिक पंचांग को रोजाना देखें और किसी भी नए काम को शुरू करने के लिए इसका पालन करें जैसे कि वैवाहिक समारोह, सामाजिक मामलों, महत्वपूर्ण कार्यक्रमों, उद्घाटन, नए व्यापार उपक्रम आदि जैसे शुभ कार्यक्रम इसके अनुसार करें।