भारतीय ज्योतिष शास्त्र में पंचांग का अपना महत्व है। पंचांग के अनुसार ही हम अपने धार्मिक क्रियाकलाप करते हैं। शुभ अशुभ का ज्ञान हमें प्राप्त होता है। आइये जानते हैं, आज के पंचांग के अनुसार कब है शुभ मुहूर्त और कब तक है राहुकाल और क्या है ग्रह चाल। 11 अगस्त 2026, मंगलवार को श्रावण मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि रहेगी। इस दिन सावन शिवरात्रि का पावन पर्व मनाया जाएगा। मंगलवार होने के कारण मंगला गौरी व्रत का भी विशेष संयोग रहेगा। भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा के लिए यह दिन बेहद शुभ माना जाता है।
हिन्दू पंचांग के अनुसार आज श्रावण, कृष्ण, चतुर्दशी, मंगलवार है। सूर्य दक्षिणायन, उत्तर गोल, वर्षा ऋतु। शक संवत 1948 , विक्रमी संवत 2083, 11 अगस्त 2026 , राहुकाल दोपहर 03 बजकर 30 मिनट से सायं 05 बजकर 00 मिनट तक।
11 अगस्त 2026 का दैनिक पंचांग
वार: मंगलवार
तारीख: 11 अगस्त 2026
मास: श्रावण
पक्ष: कृष्ण पक्ष
तिथि: चतुर्दशी
नक्षत्र: पुनर्वसु के बाद पुष्य
योग: सिद्धि
करण: विष्टि के बाद शकुनि
ऋतु: वर्षा
चंद्र राशि: कर्क
तिथि का समय
चतुर्दशी तिथि 11 अगस्त को रहेगी और इसके बाद अमावस्या तिथि प्रारंभ होगी। सावन शिवरात्रि का व्रत और पूजन चतुर्दशी तिथि के आधार पर किया जाएगा।
सावन शिवरात्रि 2026
11 अगस्त को सावन शिवरात्रि का पर्व श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जाएगा। इस दिन भगवान शिव का जलाभिषेक और रुद्राभिषेक करने का विशेष महत्व है। भक्त शिवलिंग पर जल, दूध, बेलपत्र, धतूरा और सफेद फूल अर्पित कर भगवान शिव की पूजा करते हैं।
मंगला गौरी व्रत
मंगलवार होने के कारण सावन का मंगला गौरी व्रत भी इसी दिन रहेगा। विवाहित महिलाएं पति की लंबी आयु और परिवार की सुख-समृद्धि के लिए माता गौरी की पूजा और व्रत करती हैं।
शुभ मुहूर्त
ब्रह्म मुहूर्त : सुबह में 03 बजकर 55 मिनट से सुबह 04 बजकर 41 मिनट तक ।
अभिजीत मुहूर्त : दोपहर 12 बजकर 00 मिनट से 12 बजकर 53 मिनट तक ।
अमृत काल : प्रातः 07 बजकर 59 मिनट से प्रातः 09 बजकर 25 मिनट तक ।
अशुभ मुहूर्त
राहुकाल : दोपहर 03 बजकर 30 मिनट से 05 बजकर 00 मिनट तक ।
गुलिक काल : दोपहर 12 बजकर 00 मिनट से 01 बजकर 30 मिनट तक ।
यमगंड : सुबह 09 बजकर 00 मिनट से 10 बजकर 30 मिनट तक ।
शिव पूजा: प्रदोष काल एवं रात्रि में विशेष रूप से शुभ
निशीथ काल: मध्यरात्रि के आसपास शिव पूजा का विशेष महत्व
मुहूर्तों में स्थान के अनुसार अंतर हो सकता है। हिमाचल प्रदेश के स्थानीय समय के अनुसार पूजा का सटीक मुहूर्त निर्धारित करना बेहतर रहेगा।
आज का धार्मिक उपाय
सावन शिवरात्रि के दिन सुबह स्नान के बाद भगवान शिव का जलाभिषेक करें। शिवलिंग पर बेलपत्र और सफेद पुष्प अर्पित करें तथा कम से कम 108 बार “ॐ नमः शिवाय” का जाप करें।
आज का विशेष मंत्र - ॐ नमः शिवाय
पंचांग का महत्व
हिंदू धर्म में पंचांग के माध्यम से तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण की जानकारी प्राप्त की जाती है। इन्हीं के आधार पर व्रत, पर्व, पूजा और शुभ कार्यों के लिए समय निर्धारित किया जाता है।
कोई भी शुभ समय या मुहूर्त के दौरान, राहुकाल गुलिक काल, यमगण्ड काल से बचना चाहिए क्योंकि ये समय अशुभ माना जाता है। अपने दैनिक पंचांग को रोजाना देखें और किसी भी नए काम को शुरू करने के लिए इसका पालन करें जैसे कि वैवाहिक समारोह, सामाजिक मामलों, महत्वपूर्ण कार्यक्रमों, उद्घाटन, नए व्यापार उपक्रम आदि जैसे शुभ कार्यक्रम इसके अनुसार करें।
नोट: पंचांग के सूर्योदय, सूर्यास्त, राहुकाल और पूजा मुहूर्त स्थान के अनुसार बदलते हैं। इसलिए स्थानीय स्थान के अनुसार समय में कुछ अंतर संभव है।