नई दिल्ली। भारत के पूर्व 14वें थलसेना प्रमुख जनरल वी. एन. शर्मा के निधन से देश ने एक महान सैनिक, दूरदर्शी सैन्य रणनीतिकार और प्रेरणादायी नेतृत्वकर्ता को खो दिया है। उनके निधन पर सेना, पूर्व सैनिकों और देशभर में शोक की लहर है। उनके योगदान को भारतीय सेना के इतिहास में सदैव सम्मान के साथ याद किया जाएगा।
जनरल वी. एन. शर्मा का जीवन देशभक्ति, अनुशासन और कर्तव्यनिष्ठा का प्रतीक रहा। उन्होंने अपने लंबे सैन्य जीवन में भारतीय सेना को नई दिशा देने के साथ-साथ राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनके नेतृत्व और निर्णय क्षमता की देश-विदेश में सराहना की जाती रही।
जनरल शर्मा ऐसे परिवार से संबंध रखते थे जिसने राष्ट्र सेवा की सर्वोच्च परंपराओं को जीवंत रखा। उनके छोटे भाई मेजर सोमनाथ शर्मा भारत के पहले परमवीर चक्र विजेता थे, जिन्होंने 1947-48 के युद्ध में अद्वितीय वीरता का परिचय देते हुए सर्वोच्च बलिदान दिया।
उनके पिता मेजर जनरल अमर नाथ शर्मा भारतीय सेना में डायरेक्टर मेडिकल सर्विसेज के पद पर रहे। उन्हें विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के महानिदेशक पद का प्रतिष्ठित प्रस्ताव भी मिला था, लेकिन उन्होंने राष्ट्र सेवा को प्राथमिकता देते हुए इसे स्वीकार नहीं किया।
जनरल वी. एन. शर्मा के बड़े भाई लेफ्टिनेंट जनरल सुरेंद्र नाथ शर्मा भारतीय सेना में इंजीनियर-इन-चीफ के पद पर कार्य कर चुके हैं। वहीं उनकी बहन ने भी आर्मी मेडिकल कॉर्प्स में ब्रिगेडियर के रूप में देश की सेवा की। इस प्रकार पूरा परिवार भारतीय सेना में उत्कृष्ट सेवा और समर्पण का अद्वितीय उदाहरण रहा है।
जनरल वी. एन. शर्मा का निधन भारतीय सेना और राष्ट्र के लिए अपूरणीय क्षति है। उनका जीवन आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत रहेगा। देश उनके साहस, नेतृत्व और राष्ट्र के प्रति समर्पण को सदैव याद रखेगा।
जनरल वी. एन. शर्मा को विनम्र श्रद्धांजलि।
ॐ शांति।