नई दिल्ली | 19 जुलाई 2026- पर्यावरणविद् एवं शिक्षा सुधारक सोनम वांगचुक के अनिश्चितकालीन अनशन को लेकर राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में राजनीतिक और सामाजिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। करीब 20 दिनों से अधिक समय तक जंतर-मंतर पर भूख हड़ताल करने के बाद स्वास्थ्य बिगड़ने पर उन्हें दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनका उपचार जारी है।
इस बीच दिल्ली हाई कोर्ट ने वांगचुक की पत्नी गितांजलि आंगमो की उस याचिका पर तत्काल राहत देने से इनकार कर दिया, जिसमें उन्हें निजी अस्पताल में स्थानांतरित करने की मांग की गई थी। अदालत ने फिलहाल सफदरजंग अस्पताल में ही इलाज जारी रखने का निर्देश दिया है।
अस्पताल से जारी अपने संदेश में सोनम वांगचुक ने समर्थकों से आंदोलन को पूरी तरह शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक बनाए रखने की अपील की है। उन्होंने 20 जुलाई को प्रस्तावित 'चलो संसद' मार्च को लोकतांत्रिक तरीके से सफल बनाने का आह्वान किया।
आंदोलन से जुड़े आयोजकों ने स्पष्ट किया है कि वांगचुक के अस्पताल में भर्ती होने के बावजूद जंतर-मंतर से संसद तक प्रस्तावित मार्च अपने तय कार्यक्रम के अनुसार आयोजित किया जाएगा। बड़ी संख्या में लोगों के इसमें शामिल होने की संभावना जताई जा रही है।
वहीं, वांगचुक की पत्नी गितांजलि आंगमो ने कहा है कि यदि जनप्रतिनिधि अस्पताल पहुंचकर उनसे मुलाकात करें और उनकी प्रमुख मांगों को संसद में उठाने का भरोसा दें, तो वह अपना अनशन समाप्त करने पर विचार कर सकते हैं।
देशभर में इस घटनाक्रम पर नजर बनी हुई है। समर्थक इसे लोकतांत्रिक अधिकारों और जनभागीदारी से जुड़ा मुद्दा बता रहे हैं, जबकि प्रशासन का कहना है कि वांगचुक को स्वास्थ्य संबंधी कारणों से चिकित्सकीय निगरानी में रखा गया है।