धर्मशाला, 19 जुलाई। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) शिमला द्वारा जिला कांगड़ा के लिए 20 और 21 जुलाई 2026 को अत्यधिक भारी वर्षा का रेड अलर्ट जारी किए जाने के बाद जिला प्रशासन ने बड़ा एहतियाती फैसला लिया है। जिला दंडाधिकारी कांगड़ा हेमराज बैरवा (IAS) ने आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 की धारा-30 के तहत आदेश जारी करते हुए जिले के सभी सरकारी एवं निजी शिक्षण संस्थानों को दो दिनों के लिए बंद रखने के निर्देश दिए हैं।
जारी आदेशों के अनुसार, भारी बारिश के कारण भूस्खलन, अचानक बाढ़, पेड़ों के गिरने और सड़कें अवरुद्ध होने जैसी संभावित घटनाओं की आशंका को देखते हुए 20 और 21 जुलाई को जिले के सभी सरकारी एवं निजी स्कूल, शैक्षणिक संस्थान, तकनीकी संस्थान, कॉलेज, विश्वविद्यालय, केंद्रीय विश्वविद्यालय हिमाचल प्रदेश के सभी परिसर, एनआईएफटी कांगड़ा, केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय बलाहड़, क्रेच सेंटर तथा आंगनवाड़ी केंद्र बंद रहेंगे। केवल आवासीय (रेजिडेंशियल) संस्थानों को इस आदेश से छूट दी गई है।
आदेश में यह भी कहा गया है कि संबंधित संस्थानों के शिक्षण एवं प्रशासनिक कर्मचारियों को भी इन दोनों दिनों में उपस्थिति से छूट रहेगी। हालांकि, यदि किसी आपातकालीन प्रशासनिक कार्य की आवश्यकता हुई तो संस्थान प्रमुख आवश्यक कर्मचारियों की ड्यूटी लगा सकेंगे।
जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यदि इन दो दिनों के दौरान किसी भी सरकारी या निजी स्कूल, कॉलेज, विश्वविद्यालय अथवा अन्य शैक्षणिक संस्थान में परीक्षा निर्धारित है, तो उसे अगली तिथि तक स्थगित किया जाएगा। संबंधित संस्थान बाद में संशोधित परीक्षा कार्यक्रम जारी करेंगे।
आदेशों के प्रभावी क्रियान्वयन की जिम्मेदारी उच्च शिक्षा उपनिदेशक, प्रारंभिक शिक्षा उपनिदेशक, सभी शिक्षण संस्थानों के प्रमुख, जिला कार्यक्रम अधिकारी (आईसीडीएस) तथा अन्य संबंधित अधिकारियों को सौंपी गई है।
जिला दंडाधिकारी ने आदेश में स्पष्ट चेतावनी दी है कि आदेशों की अवहेलना, बाधा उत्पन्न करने अथवा अनुपालन न करने वाले किसी भी व्यक्ति, अधिकारी या संस्था के विरुद्ध आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 की धारा-51 के तहत सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
प्रशासन ने आम लोगों से भी अपील की है कि खराब मौसम के दौरान अनावश्यक यात्रा से बचें, नदी-नालों और भूस्खलन संभावित क्षेत्रों से दूर रहें तथा प्रशासन और मौसम विभाग द्वारा जारी सभी सुरक्षा निर्देशों का पालन करें। विद्यार्थियों, शिक्षकों और आम नागरिकों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए यह निर्णय एहतियातन लिया गया है।