भारतीय ज्योतिष शास्त्र में पंचांग का अपना महत्व है। पंचांग के अनुसार ही हम अपने धार्मिक क्रियाकलाप करते हैं। शुभ अशुभ का ज्ञान हमें प्राप्त होता है। आइये जानते हैं, आज के पंचांग के अनुसार कब है शुभ मुहूर्त और कब तक है राहुकाल और क्या है ग्रह चाल। 18 जुलाई 2026, शनिवार का दिन आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि का है। आज भगवान शनिदेव, भगवान शिव और श्रीहरि विष्णु की उपासना विशेष फलदायी मानी जाती है। पंचांग के अनुसार शुभ कार्य करने से पहले राहुकाल, शुभ मुहूर्त और तिथि-नक्षत्र की जानकारी अवश्य प्राप्त कर लेनी चाहिए।
हिन्दू पंचांग के अनुसार आज आषाढ़, शुक्ल, पंचमी, शनिवार है। सूर्य उत्तरायण, उत्तर गोल, वर्षा ऋतु। शक संवत 1948 , विक्रमी संवत 2083, 18 जुलाई 2026, राहुकाल सुबह 09 बजकर 00 मिनट से सुबह 10 बजकर 30 मिनट तक।
18 जुलाई 2026 का पंचांग
वार: शनिवार
मास: आषाढ़
पक्ष: शुक्ल पक्ष
तिथि: पंचमी अगले दिन तड़के 03 बजकर 42 मिनट तक उपरांत षष्ठी तिथि का आरंभ।
नक्षत्र: पूर्वा फाल्गुनी
योग: वरीयान
करण: बव, तत्पश्चात बालव
सूर्योदय: प्रातः 5:55 बजे (लगभग)
सूर्यास्त: सायं 7:10 बजे (लगभग)
चंद्रोदय: प्रातः 8:27 बजे (लगभग)
चंद्रास्त: रात्रि 9:55 बजे (लगभग)
शुभ मुहूर्त
अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 11:59 बजे से 12:54 बजे तक
ब्रह्म मुहूर्त: प्रातः 3:55 बजे से 4:41 बजे तक
अमृत काल : दोपहर 11 बजकर 45 मिनट से दोपहर 01 बजकर 19 मिनट तक
गोधूलि मुहूर्त: सायं 7:08 बजे से 7:30 बजे तक
अशुभ समय
राहुकाल: प्रातः 9:00 बजे से 10:30 बजे तक
यमगंड: दोपहर 1:32 बजे से 3:11 बजे तक
गुलिक काल: प्रातः 5:55 बजे से 7:35 बजे तक
आज का धार्मिक महत्व
आषाढ़ शुक्ल पंचमी का दिन भगवान विष्णु, माता लक्ष्मी और भगवान शिव की आराधना के लिए शुभ माना जाता है। शनिवार होने के कारण शनिदेव की पूजा, पीपल के वृक्ष की परिक्रमा तथा सरसों के तेल का दीपक जलाने का विशेष महत्व है। आज दान-पुण्य, गरीबों की सहायता और हनुमान चालीसा का पाठ करने से शनि दोष शांत होने की मान्यता है।
आज का शुभ रंग - गहरा नीला
आज का शुभ अंक - 8
आज का उपाय
शनिवार के दिन पीपल के वृक्ष के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाएं। काले तिल, उड़द की दाल अथवा लोहे की वस्तु का दान करें और "ॐ शं शनैश्चराय नमः" मंत्र की कम से कम 108 बार जप करें। साथ ही भगवान शिव का जलाभिषेक कर परिवार के सुख-समृद्धि की प्रार्थना करें।
कोई भी शुभ समय या मुहूर्त के दौरान, राहुकाल गुलिक काल, यमगण्ड काल से बचना चाहिए क्योंकि ये समय अशुभ माना जाता है। अपने दैनिक पंचांग को रोजाना देखें और किसी भी नए काम को शुरू करने के लिए इसका पालन करें जैसे कि वैवाहिक समारोह, सामाजिक मामलों, महत्वपूर्ण कार्यक्रमों, उद्घाटन, नए व्यापार उपक्रम आदि जैसे शुभ कार्यक्रम इसके अनुसार करें।