भारतीय ज्योतिष शास्त्र में पंचांग का अपना महत्व है। पंचांग के अनुसार ही हम अपने धार्मिक क्रियाकलाप करते हैं। शुभ अशुभ का ज्ञान हमें प्राप्त होता है। आइये जानते हैं, आज के पंचांग के अनुसार कब है शुभ मुहूर्त और कब तक है राहुकाल और क्या है ग्रह चाल। 17 जुलाई 2026 का पंचांग: आज शुक्रवार, आषाढ़ शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि का संयोग है। आज चंद्रमा सिंह राशि में विराजमान रहेंगे तथा मघा से पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र का परिवर्तन होगा। यदि आप किसी शुभ कार्य, पूजा-पाठ, गृह प्रवेश, यात्रा, निवेश या नए कार्य की शुरुआत करने की योजना बना रहे हैं, तो पहले आज का पंचांग अवश्य जान लें। यहां पढ़ें 17 जुलाई 2026 का संपूर्ण पंचांग, जिसमें तिथि, वार, नक्षत्र, योग, करण, सूर्योदय-सूर्यास्त, राहुकाल, शुभ मुहूर्त और आज का धार्मिक महत्व विस्तार से दिया गया है।
हिन्दू पंचांग के अनुसार आज शुक्रवार, आषाढ़ शुक्ल पक्ष चतुर्थी है। सूर्य उत्तरायण, उत्तर गोल, वर्षा ऋतु। शक संवत 1948 , विक्रमी संवत 2083, 17 जुलाई 2026, राहुकाल सुबह 10 बजकर 30 मिनट से दोपहर 12 बजकर 00 मिनट तक।
दिनांक: 17 जुलाई 2026
वार: शुक्रवार
विक्रम संवत: 2083 , शक संवत: 1948
अयन: दक्षिणायन
ऋतु: वर्षा ऋतु
मास: श्रावण (अमान्त) / आषाढ़ (पूर्णिमांत)
पक्ष: शुक्ल पक्ष
पंचांग
तिथि: शुक्ल तृतीया प्रातः 06:29 बजे तक, इसके बाद शुक्ल चतुर्थी प्रारंभ
नक्षत्र: मघा सायं 06:37 बजे तक, इसके बाद पूर्वा फाल्गुनी
योग: व्यतीपात दोपहर 01:45 बजे तक, इसके बाद वरीयान
करण: गरज प्रातः 06:29 बजे तक, इसके बाद वणिज, फिर विष्टि (भद्रा)
ग्रह स्थिति
सूर्य: कर्क राशि
चंद्रमा: सिंह राशि
सूर्योदय एवं सूर्यास्त
सूर्योदय: प्रातः 5:35 बजे
सूर्यास्त: सायं 7:24 बजे
शुभ मुहूर्त
अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 12:02 बजे से 12:57 बजे तक
अमृत काल: सायं 04:18 बजे से 05:49 बजे तक
ब्रह्म मुहूर्त: प्रातः 3:55 बजे से 4:41 बजे तक
अशुभ समय
राहुकाल: प्रातः 10:30 बजे से दोपहर 12:00 बजे तक
यमगण्ड: अपराह्न 03:30 बजे से 05:00बजे तक
गुलिक काल: प्रातः 07:30बजे से 08:59 बजे तक
दुर्मुहूर्त: प्रातः 08:12 बजे से 09:07 बजे तक
आज का विशेष महत्व
शुक्ल चतुर्थी का शुभ संयोग
भगवान श्री गणेश की पूजा एवं विघ्न विनाश के लिए श्रेष्ठ दिन
श्रावण मास में भगवान शिव की आराधना का विशेष महत्व
नए कार्य, शिक्षा, व्यापार एवं धार्मिक अनुष्ठानों के लिए शुभ दिन
आज का शुभ उपाय
प्रातः स्नान के बाद भगवान शिव का जलाभिषेक करें तथा भगवान श्री गणेश को दूर्वा, मोदक और लाल पुष्प अर्पित करें। "ॐ गं गणपतये नमः" एवं "ॐ नमः शिवाय" मंत्र का 108 बार जाप करने से कार्यों में सफलता, सुख-समृद्धि और विघ्नों का नाश होता है। कोई भी शुभ समय या मुहूर्त के दौरान, राहुकाल गुलिक काल, यमगण्ड काल से बचना चाहिए क्योंकि ये समय अशुभ माना जाता है। अपने दैनिक पंचांग को रोजाना देखें और किसी भी नए काम को शुरू करने के लिए इसका पालन करें जैसे कि वैवाहिक समारोह, सामाजिक मामलों, महत्वपूर्ण कार्यक्रमों, उद्घाटन, नए व्यापार उपक्रम आदि जैसे शुभ कार्यक्रम इसके अनुसार करें।