भारतीय ज्योतिष शास्त्र में पंचांग का अपना महत्व है। पंचांग के अनुसार ही हम अपने धार्मिक क्रियाकलाप करते हैं। शुभ अशुभ का ज्ञान हमें प्राप्त होता है। आइये जानते हैं, आज के पंचांग के अनुसार कब है शुभ मुहूर्त और कब तक है राहुकाल और क्या है ग्रह चाल।
हिंदू धर्म में पंचांग का विशेष महत्व है। पंचांग के माध्यम से तिथि, नक्षत्र, योग, करण तथा शुभ-अशुभ समय की जानकारी प्राप्त होती है। 12 जून 2026, शुक्रवार का दिन भगवान विष्णु की आराधना, एकादशी व्रत के पारण तथा धार्मिक कार्यों के लिए विशेष माना जाता है। आइए जानते हैं 12 जून 2026 का संपूर्ण पंचांग।
हिन्दू पंचांग के अनुसार आज शुक्रवार ज्येष्ठ कृष्ण द्वादशी है। सूर्य उत्तरायण, उत्तर गोल, ग्रीष्म ऋतु। शक संवत 1948 , विक्रमी संवत 2083, 12 जून 2026, राहुकाल सुबह 10:30 से दोपहर 12:00 बजे तक।
📅 12 जून 2026 का पंचांग
वार -शुक्रवार
विक्रम संवत - 2083
शक संवत - 1948
अयन - उत्तरायण
ऋतु - ग्रीष्म ऋतु
मास - अधिक आषाढ़ मास (क्षेत्रीय पंचांग के अनुसार भिन्नता संभव)
पक्ष - कृष्ण पक्ष
तिथि - द्वादशी तिथि सायं 07 बजकर 36 मिनट तक उपरांत त्रयोदशी तिथि का आरंभ
नक्षत्र - अश्विनी नक्षत्र प्रातः 06 बजकर 28 मिनट तक उपरांत भरणी नक्षत्र
योग - शोभन योग (पंचांगानुसार परिवर्तन संभव)
करण - कौलव एवं तैतिल
चन्द्र राशि - मेष राशि
सूर्योदय
प्रातः 5:20 बजे (लगभग)
सूर्यास्त - सायं 7:24 बजे (लगभग)
चंद्रोदय - प्रातः काल
चंद्रास्त - सायंकाल
⏰ शुभ मुहूर्त
अभिजीत मुहूर्त - 11:55 पूर्वाह्न से 12:50 अपराह्न तक
विजय मुहूर्त - 02:42 अपराह्न से 03:37 अपराह्न तक
अमृत काल - स्थानीय पंचांगानुसार देखें
⚠️ अशुभ समय
राहुकाल - 10:30 पूर्वाह्न से 12:00 अपराह्न तक
यमगण्ड काल - 03:30 अपराह्न से 05:00 अपराह्न तक
गुलिक काल -07:30 पूर्वाह्न से 09:00 पूर्वाह्न तक
दुर्मुहूर्त - 08:20 पूर्वाह्न से 09:10 पूर्वाह्न तक
🙏 12 जून 2026 का धार्मिक महत्व
12 जून 2026 को कृष्ण पक्ष द्वादशी है। इस दिन एकादशी व्रत का पारण किया जाता है। भगवान श्रीहरि विष्णु की पूजा, तुलसी अर्चन, दान-पुण्य तथा धार्मिक अनुष्ठान विशेष फलदायी माने जाते हैं।
द्वादशी तिथि को विष्णु सहस्रनाम का पाठ, तुलसी पूजन तथा जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र और जल का दान करने से शुभ फल प्राप्त होता है। शुक्रवार होने के कारण माता लक्ष्मी की पूजा का भी विशेष महत्व है।
🌿 आज का शुभ उपाय
श्री लक्ष्मी-नारायण मंदिर में जाकर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी को पीले पुष्प अर्पित करें। घी का दीपक जलाकर "ॐ नमो भगवते वासुदेवाय" मंत्र का 108 बार जप करें।
कोई भी शुभ समय या मुहूर्त के दौरान, राहुकाल गुलिक काल, यमगण्ड काल से बचना चाहिए क्योंकि ये समय अशुभ माना जाता है। अपने दैनिक पंचांग को रोजाना देखें और किसी भी नए काम को शुरू करने के लिए इसका पालन करें जैसे कि वैवाहिक समारोह, सामाजिक मामलों, महत्वपूर्ण कार्यक्रमों, उद्घाटन, नए व्यापार उपक्रम आदि जैसे शुभ कार्यक्रम इसके अनुसार करें।