भारतीय ज्योतिष शास्त्र में पंचांग का अपना महत्व है। पंचांग के अनुसार ही हम अपने धार्मिक क्रियाकलाप करते हैं। शुभ अशुभ का ज्ञान हमें प्राप्त होता है। आइये जानते हैं, आज के पंचांग के अनुसार कब है शुभ मुहूर्त और कब तक है राहुकाल और क्या है ग्रह चाल। हिंदू पंचांग के अनुसार 11 जून 2026 का दिन धार्मिक एवं आध्यात्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है। किसी भी शुभ कार्य, पूजा-पाठ, यात्रा या मांगलिक कार्य से पहले पंचांग का अध्ययन करना लाभकारी माना जाता है।
हिन्दू पंचांग के अनुसार आज गुरुवार को ज्येष्ठ कृष्ण एकादशी है। सूर्य उत्तरायण, उत्तर गोल, ग्रीष्म ऋतु। शक संवत 1948 , विक्रमी संवत 2083, 11 जून 2026 , राहुकाल दोपहर 02:00 से 03:30 बजे तक।
पंचांग विवरण
दिनांक: 11 जून 2026
वार: गुरुवार
विक्रम संवत: 2083
शक संवत: 1948
अयन: उत्तरायण
ऋतु: ग्रीष्म ऋतु
मास: ज्येष्ठ
पक्ष: कृष्ण पक्ष
तिथि: एकादशी ( रात्रि 10:36 बजे तक ), तत्पश्चात द्वादशी
नक्षत्र: अश्विनी
योग: सुकर्मा
करण: बालव, कौलव
सूर्योदय एवं सूर्यास्त
सूर्योदय: प्रातः 5:22 बजे
सूर्यास्त: सायं 7:24 बजे
(समय स्थान विशेष के अनुसार कुछ मिनट आगे-पीछे हो सकता है।)
चंद्रमा की स्थिति
चंद्र राशि: मेष
चंद्रमा उदय: प्रातः
चंद्रमा अस्त: रात्रि
शुभ मुहूर्त
अभिजीत मुहूर्त - दोपहर 11:55 बजे से 12:49 बजे तक
अमृत काल प्रातः 05 बजकर 59 मिनट से 07 बजकर 30 मिनट तक, फिर रात्रि 11 बजकर 49 मिनट से मध्यरात्रि बाद 01 बजकर 17 मिनट (12 जून) तक।
ब्रह्म मुहूर्त सुबह 3 बजकर 52 मिनट से 4 बजकर 38 मिनट तक।
अशुभ मुहूर्त
राहुकाल - दोपहर 2:300 बजे से 3:30 बजे तक
यमगण्ड - सुबह 6:00 बजे से 7:30 बजे तक
गुलिक काल - सुबह 9:00 बजे से 10:30 बजे तक
आज का धार्मिक महत्व
गुरुवार भगवान विष्णु एवं देवगुरु बृहस्पति की पूजा के लिए विशेष माना जाता है। आज पीले वस्त्र धारण करना, विष्णु सहस्रनाम का पाठ करना तथा केले के वृक्ष की पूजा करना शुभ फलदायी माना जाता है।
आज का विशेष उपाय
भगवान विष्णु को पीले पुष्प अर्पित करें।
बेसन के लड्डू या चने की दाल का दान करें।
"ॐ नमो भगवते वासुदेवाय" मंत्र का 108 बार जप करें।
जरूरतमंदों को पीली वस्तुओं का दान करें।
निष्कर्ष
11 जून 2026 का दिन गुरुवार होने के कारण भगवान विष्णु और बृहस्पति देव की कृपा प्राप्त करने के लिए उत्तम माना गया है। धार्मिक कार्यों, जप-तप और दान-पुण्य से विशेष लाभ प्राप्त हो सकता है।
कोई भी शुभ समय या मुहूर्त के दौरान, राहुकाल गुलिक काल, यमगण्ड काल से बचना चाहिए क्योंकि ये समय अशुभ माना जाता है। अपने दैनिक पंचांग को रोजाना देखें और किसी भी नए काम को शुरू करने के लिए इसका पालन करें जैसे कि वैवाहिक समारोह, सामाजिक मामलों, महत्वपूर्ण कार्यक्रमों, उद्घाटन, नए व्यापार उपक्रम आदि जैसे शुभ कार्यक्रम इसके अनुसार करें।