5 जून 2026 पंचांग: आज पंचमी तिथि, श्रवण नक्षत्र का संयोग, जानें शुभ मुहूर्त और राहुकाल
भारतीय ज्योतिष शास्त्र में पंचांग का अपना महत्व है। पंचांग के अनुसार ही हम अपने धार्मिक क्रियाकलाप करते हैं। शुभ अशुभ का ज्ञान हमें प्राप्त होता है। आइये जानते हैं, आज के पंचांग के अनुसार कब है शुभ मुहूर्त और कब तक है राहुकाल और क्या है ग्रह चाल।
धार्मिक दृष्टि से 5 जून 2026, शुक्रवार का दिन विशेष महत्व रखता है। आज अधिक ज्येष्ठ मास के कृष्ण पक्ष की पंचमी तिथि है। श्रवण नक्षत्र और ब्रह्म योग का शुभ संयोग कई मांगलिक कार्यों के लिए अनुकूल माना जा रहा है। यदि आप आज किसी नए कार्य, पूजा-पाठ, यात्रा या शुभ आयोजन की योजना बना रहे हैं, तो पंचांग में दिए गए शुभ-अशुभ समय की जानकारी अवश्य देखें।
हिन्दू पंचांग के अनुसार आज शुक्रवार अधिक मास कृष्ण पंचमी है। सूर्य उत्तरायण, उत्तर गोल, वसंत ऋतु। शक संवत 1948 , विक्रमी संवत 2083, 5 जून 2026,राहुकाल सुबह 10:30 से दोपहर 12:00 बजे तक।
आज का पंचांग – 5 जून 2026
विवरण जानकारी
वार शुक्रवार
मास अधिक ज्येष्ठ मास
पक्ष कृष्ण पक्ष
तिथि पंचमी ( अगले दिन तड़के 01 बजकर 20 मिनट (6 जून) तक उपरांत षष्ठी तिथि का आरंभ।)
नक्षत्र श्रवण
योग ब्रह्म योग, इसके बाद ऐन्द्र योग
करण कौलव, तत्पश्चात तैतिल
चंद्र राशि मकर
सूर्य राशि वृषभ
सूर्योदय और सूर्यास्त
सूर्योदय: प्रातः 5:21 बजे (लगभग)
सूर्यास्त: सायं 7:21 बजे (लगभग)
शुभ मुहूर्त
✅ ब्रह्म मुहूर्त: प्रातः 3:46 बजे से 4:34 बजे तक
✅ अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 11:51 बजे से 12:46 बजे तक
✅ अमृत काल: सायं 6:38 बजे से 8:23 बजे तक
✅ सर्वार्थ सिद्धि योग: दिनभर शुभ प्रभाव
अशुभ समय
❌ राहुकाल: प्रातः 10:35 बजे से 12:19 बजे तक
❌ यमगण्ड काल: अपराह्न 3:20 बजे से 4:56 बजे तक
❌ गुलिक काल: प्रातः 7:19 बजे से 8:55 बजे तक
❌ वर्ज्य काल: प्रातः 8:05 बजे से 9:50 बजे तक
धार्मिक महत्व
आज शुक्रवार होने के कारण माता लक्ष्मी की पूजा का विशेष महत्व है। साथ ही अधिक मास में भगवान विष्णु की आराधना, श्रीमद्भागवत पाठ, विष्णु सहस्रनाम का जप और दान-पुण्य करना अत्यंत शुभ माना गया है। श्रद्धालु आज तुलसी पूजन और जरूरतमंदों को अन्न-वस्त्र दान कर पुण्य लाभ प्राप्त कर सकते हैं।
आज का शुभ संदेश
"सत्कर्म, श्रद्धा और सेवा ही जीवन को सफलता और शांति की ओर ले जाते हैं।"
कोई भी शुभ समय या मुहूर्त के दौरान, राहुकाल गुलिक काल, यमगण्ड काल से बचना चाहिए क्योंकि ये समय अशुभ माना जाता है। अपने दैनिक पंचांग को रोजाना देखें और किसी भी नए काम को शुरू करने के लिए इसका पालन करें जैसे कि वैवाहिक समारोह, सामाजिक मामलों, महत्वपूर्ण कार्यक्रमों, उद्घाटन, नए व्यापार उपक्रम आदि जैसे शुभ कार्यक्रम इसके अनुसार करें।