भारतीय ज्योतिष शास्त्र में पंचांग का अपना महत्व है। पंचांग के अनुसार ही हम अपने धार्मिक क्रियाकलाप करते हैं। शुभ अशुभ का ज्ञान हमें प्राप्त होता है। आइये जानते हैं, आज के पंचांग के अनुसार कब है शुभ मुहूर्त और कब तक है राहुकाल और क्या है ग्रह चाल।
हिंदू धर्म में पंचांग का विशेष महत्व माना जाता है। पंचांग के आधार पर ही व्रत, त्योहार, शुभ कार्य और धार्मिक अनुष्ठानों का समय निर्धारित किया जाता है। 31 मई 2026, रविवार का दिन ज्येष्ठ पूर्णिमा के पावन पर्व के रूप में मनाया जाएगा। इस दिन भगवान विष्णु, माता लक्ष्मी और चंद्रदेव की पूजा का विशेष महत्व है।
हिन्दू पंचांग के अनुसार आज रविवार ज्येष्ठ शुक्ल पूर्णिमा है। सूर्य उत्तरायण, उत्तर गोल, वसंत ऋतु। शक संवत 1948 , विक्रमी संवत 2083, 31 मई 2026, राहुकाल सायं 04:30 से 06:00 बजे तक।
31 मई 2026 का पंचांग
दिन: रविवार
पक्ष: शुक्ल पक्ष
तिथि: पूर्णिमा (दोपहर 2:14 बजे तक), इसके बाद कृष्ण पक्ष प्रतिपदा
नक्षत्र: अनुराधा (शाम 4:11 बजे तक), इसके बाद ज्येष्ठा
योग: सिद्ध योग
करण: बव करण (दोपहर 2:14 बजे तक), इसके बाद बालव
चंद्र राशि: वृश्चिक
सूर्य राशि: वृषभ
सूर्योदय और सूर्यास्त
सूर्योदय: प्रातः 5:45 बजे
सूर्यास्त: सायं 7:04 बजे
शुभ मुहूर्त
अभिजीत मुहूर्त -दोपहर 11 बजकर 51 मिनट से 12 बजकर 47 मिनट तक।
अमृत काल कोई नहीं।
ब्रह्म मुहूर्त सुबह 3 बजकर 52 मिनट से 4 बजकर 38 मिनट तक।ज का विशेष महत्व
अशुभ मुहूर्त
सायं 04:30 से 06:00 बजे तक राहुकाल रहेगा।
दोपहर 03:30 से 04:30 बजे तक गुलिक काल रहेगा।
दोपहर 12:00 से 01:30 बजे तक यमगंड रहेगा।
31 मई 2026 को ज्येष्ठ पूर्णिमा का पर्व मनाया जाएगा। पूर्णिमा तिथि पर स्नान, दान, जप, तप और भगवान सत्यनारायण की पूजा का विशेष फल प्राप्त होता है। अधिक मास (पुरुषोत्तम मास) की पूर्णिमा होने के कारण इस दिन का धार्मिक महत्व और भी बढ़ जाता है।
क्या करें?
भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा करें।
सत्यनारायण कथा का श्रवण करें।
जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र और धन का दान दें।
चंद्रमा को अर्घ्य अर्पित करें।
परिवार की सुख-समृद्धि के लिए श्रीहरि का स्मरण करें।
कोई भी शुभ समय या मुहूर्त के दौरान, राहुकाल गुलिक काल, यमगण्ड काल से बचना चाहिए क्योंकि ये समय अशुभ माना जाता है। अपने दैनिक पंचांग को रोजाना देखें और किसी भी नए काम को शुरू करने के लिए इसका पालन करें जैसे कि वैवाहिक समारोह, सामाजिक मामलों, महत्वपूर्ण कार्यक्रमों, उद्घाटन, नए व्यापार उपक्रम आदि जैसे शुभ कार्यक्रम इसके अनुसार करें।