ज्वालामुखी के समीप चुकाठ से सटे कटोई में उपमन्यु, वात्स्यायन और वत्स गोत्र ब्राह्मण परिवारों का वार्षिक समारोह श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के साथ आयोजित किया गया। कुल देवी जठेरी माता मंदिर परिसर में आयोजित इस समारोह में बड़ी संख्या में उपमन्यु, वात्स्यायन और वत्स गोत्र के ब्राह्मण परिवारों ने भाग लिया, जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय और यादगार बन गया। हर साल उपमन्यु और वत्स वत्स्यायन गोत्र के ब्राह्मण परिवार अपनी प्रिय कुलदेवी (कुल की देवी) के चरणों में एकत्रित होते हैं।
उपमन्यु, वत्स्यायन और वत्स गोत्र के ब्राह्मण परिवारों का मिलन समारोह बड़े धूमधाम और भव्यता से मनाया गया। इस अवसर पर सभी परिवारों के सदस्यों ने पारंपरिक रीति-रिवाजों का पालन किया और आपसी सद्भाव और स्नेह प्रदर्शित किया।
इस कार्यक्रम में वैदिक मंत्रों का पाठ, हवन (पवित्र अग्नि अनुष्ठान) और सामूहिक भोज शामिल थे। इसके अलावा, सांस्कृतिक कार्यक्रमों और आध्यात्मिक चर्चाओं ने समारोह को और भी यादगार बना दिया।
इस पवित्र मिलन के दौरान, सभी ने एक-दूसरे को आशीर्वाद दिया और परिवारों के बीच संबंधों को मजबूत करने का संकल्प लिया। ऐसे खुशी के अवसर समाज में सद्भाव और एकता को बढ़ावा देते हैं।
मंदिर परिसर में महर्षि उपमन्यु एवं महिषासुर मर्दिनी की प्रतिमाएं स्थापित हैं। आयोजन समिति के अनुसार इसी दिन कुल देवी यहां कन्या रूप में प्रार्दुभाव हुआ था , जिसके उपलक्ष्य में प्रतिवर्ष मई माह में इस धार्मिक समारोह का आयोजन किया जाता है। इस अवसर पर उत्तर भारत के विभिन्न राज्यों और शहरों से ब्राह्मण परिवार यहां एकत्रित होकर अपनी कुल देवी का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। यहाँ हवन (अग्नि अनुष्ठान), पूजा और एक भव्य सामुदायिक भोज (भंडारा) का आयोजन किया जाता है।
समारोह के दौरान विधिवत हवन-पूजन किया गया तथा विशाल भंडारे का आयोजन भी हुआ, जिसमें श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया। धार्मिक अनुष्ठानों के साथ-साथ आपसी मेल-मिलाप और पारिवारिक एकता का भी सुंदर दृश्य देखने को मिला।
आयोजन समिति के संयोजक सुरेश शास्त्री ने बताया कि यह आयोजन साल में दो बार, नवंबर और मई में होता है। हर वर्ष मई और नवंबर माह में यहां विशेष आयोजन किए जाते हैं। नवंबर माह के अंतिम रविवार को भी ममतामयी मातृशक्ति कुल देवी के चरणों में उपमन्यु, वात्स्यायन और वत्स गोत्र के ब्राह्मण परिवार एकत्रित होते हैं। उस दिन भी हवन-पूजन और विशाल भंडारे का आयोजन किया जाता है। उत्तर भारत के विभिन्न शहरों से ब्राह्मण परिवार इस अवसर पर एकत्रित होते हैं।
उन्होंने बताया कि यह मंदिर चुकाठ-सुधंगल सड़क मार्ग पर कटोई में स्थित है, जो ज्वालामुखी के पूर्व विधायक स्वर्गीय धनी राम चौधरी के निवास के समीप पड़ता है और यहां श्रद्धालु आसानी से पहुंच सकते हैं।
भारत विविध समुदायों का घर है, जिनमें से कई अपने समाज और जाति के आधार पर अलग-अलग देवी-देवताओं की पूजा करते हैं। ये समुदाय अपने कुलदेवी (कुल की देवी) और कुलदेवता (कुल के देवता) के साथ-साथ अपने पूर्वजों के देवताओं (पितृदेव) का भी आदर करते हैं।
हजारों वर्षों से भारतीय अपने कुलदेवी और कुलदेवता की पूजा करते आ रहे हैं। जन्म, विवाह और अन्य समारोहों जैसे शुभ अवसरों पर लोग अपने कुलदेवों के मंदिरों में जाकर प्रार्थना करते हैं या उनके सम्मान में भजन गाते हैं। इसके अलावा, एक विशेष दिन होता है जब कुल के सदस्य सामूहिक पूजा के लिए अपने देवता के मंदिर में एकत्रित होते हैं।