धर्म-डेस्क | 5 मई 2026, भारतीय ज्योतिष शास्त्र में पंचांग का अपना महत्व है। पंचांग के अनुसार ही हम अपने धार्मिक क्रियाकलाप करते हैं। शुभ अशुभ का ज्ञान हमें प्राप्त होता है। आइये जानते हैं, आज के पंचांग के अनुसार कब है शुभ मुहूर्त और कब तक है राहुकाल और क्या है ग्रह चाल।
मंगलवार - 5 मई 2026 का दिन धार्मिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण है। इस दिन कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि पड़ रही है, जिसे संकष्टी चतुर्थी के रूप में मनाया जाता है। भगवान गणेश को समर्पित यह व्रत विशेष रूप से कष्टों के निवारण और मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए रखा जाता है। पंचांग के अनुसार आज ज्येष्ठा और मूल नक्षत्र का संयोग बन रहा है, साथ ही शिव और सिद्ध जैसे शुभ योग भी प्रभाव में रहेंगे। आइए जानते हैं दिनभर का विस्तृत पंचांग—
हिन्दू पंचांग के अनुसार आज मंगलवार है। सूर्य उत्तरायण, उत्तर गोल, वसंत ऋतु। शक संवत 1948 , विक्रमी संवत 2083, ज्येष्ठ कृष्ण चतुर्थी , 5 मई 2026 , राहुकाल: दोपहर 03:30 से 04:30 बजे तक।
📅 तिथि
कृष्ण पक्ष चतुर्थी - प्रारंभ: सुबह 05:24 बजे
समाप्त: 6 मई सुबह 07:51 बजे
नक्षत्र
ज्येष्ठा नक्षत्र दोपहर 12:54 बजे तक , इसके बाद मूल नक्षत्र प्रारंभ
⚡ योग
शिव योग रात 12:16 बजे तक इसके बाद सिद्ध योग
करण
बव करण शाम 06:38 बजे तक
इसके बाद बालव करण
सूर्योदय व सूर्यास्त
सूर्योदय: 05:55 AM
सूर्यास्त: 06:52 PM
चंद्रमा की स्थिति
चंद्रमा सुबह तक वृश्चिक राशि में
दोपहर बाद धनु राशि में गोचर
शुभ मुहूर्त
अभिजीत मुहूर्त
दोपहर 11 बजकर 51 मिनट से 12 बजकर 45 मिनट तक।
अमृत काल आज कोई नहीं है।
ब्रह्म मुहूर्त सुबह 04 बजकर 08 मिनट से 04 बजकर 52 मिनट तक।
राहुकाल
दोपहर 03:30 PM से 04 30PM तक
विशेष महत्व
मंगलवार के दिन पड़ने वाली संकष्टी चतुर्थी (अंगारक चतुर्थी) का विशेष महत्व माना जाता है। आज भगवान गणेश के 'एकदंत' रूप की पूजा की जाती है। पौराणिक कथा के अनुसार, भगवान गणेश ने धैर्य और साहस का परिचय देते हुए धर्म की रक्षा की थी। मान्यता है कि इस दिन व्रत रखने और गणेश जी की आराधना करने से जीवन की सभी बाधाएं दूर होती हैं। श्रद्धालु रात में चंद्रमा को अर्घ्य देकर अपना व्रत पूरा करते हैं। यह दिन बुद्धि और सुख-समृद्धि पाने के लिए बहुत खास माना गया है।
✅ क्या करें / क्या न करें
✔️ गणेश जी की पूजा-अर्चना और व्रत रखें
✔️ चंद्र दर्शन के बाद व्रत खोलना शुभ
❌ राहुकाल में नए कार्य की शुरुआत से बचें
कोई भी शुभ समय या मुहूर्त के दौरान, राहुकाल गुलिक काल, यमगण्ड काल से बचना चाहिए क्योंकि ये समय अशुभ माना जाता है। अपने दैनिक पंचांग को रोजाना देखें और किसी भी नए काम को शुरू करने के लिए इसका पालन करें जैसे कि वैवाहिक समारोह, सामाजिक मामलों, महत्वपूर्ण कार्यक्रमों, उद्घाटन, नए व्यापार उपक्रम आदि जैसे शुभ कार्यक्रम इसके अनुसार करें।