17 अप्रैल 2026, शुक्रवार – आज का पंचांग
भारतीय ज्योतिष शास्त्र में पंचांग का अपना महत्व है। पंचांग के अनुसार ही हम अपने धार्मिक क्रियाकलाप करते हैं। शुभ अशुभ का ज्ञान हमें प्राप्त होता है। आइये जानते हैं, आज के पंचांग के अनुसार कब है शुभ मुहूर्त और कब तक है राहुकाल और क्या है ग्रह चाल। आज बैशाख कृष्ण अमावस्या (वैशाख अमावस्या या दर्श) का पावन दिन है। यह तिथि पितरों की पूजा, तर्पण, स्नान-दान और अमावस्या व्रत के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है। आज शाम को अमावस्या तिथि समाप्त होने के बाद कल चंद्र दर्शन के साथ शुक्ल प्रतिपदा शुरू होगी।
हिन्दू पंचांग के अनुसार आज शुक्रवार है। सूर्य उत्तरायण, उत्तर गोल, वसंत ऋतु। 17 अप्रैल 2026 ,शक संवत 1948 , विक्रमी संवत 2083, वैशाख कृष्ण अमावस्या है
तिथि: अमावस्या – शाम लगभग 5:21 बजे तक (इसके बाद प्रतिपदा शुरू)
नक्षत्र: रेवती – सुबह लगभग 5:42 बजे तक, फिर अश्विनी नक्षत्र
योग: वैधृति – सुबह लगभग 7:21 बजे तक
करण: चतुष्पाद (सुबह तक), फिर नाग करण
चंद्र राशि: मीन राशि – दोपहर 12:02 बजे तक, उसके बाद मेष राशि
सूर्य राशि: मेष
सूर्य-चंद्र समय (नई दिल्ली अनुमानित):सूर्योदय: सुबह 5:54 से 5:57 बजे
सूर्यास्त: शाम 6:47 से 6:48 बजे
चंद्रोदय: सुबह 5:26 बजे के आसपास
चंद्रास्त: शाम 6:46 बजे के आसपास
विक्रम संवत: 2083 (वैशाख मास, कृष्ण पक्ष)
शक संवत: 1948 (पराभव)
ऋतु: वसंत
आज का शुभ मुहूर्त
अभिजीत मुहूर्त - दोपहर 11 बजकर 55 मिनट से 12 बजकर 47 मिनट तक
अमृत काल प्रातः 09 बजकर 50 मिनट से 11 बजकर 18 मिनट तक
ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4 बजकर 26 मिनट से 5 बजकर 10 मिनट तक
आज का अशुभ मुहूर्त
राहुकाल: सुबह 10:51 बजे से दोपहर 12:26 बजे तक (इस दौरान कोई नया शुभ कार्य न करें)
यमगंड: दोपहर 3:35 से 5:09 बजे तक (कुछ जगहों पर)
गुलिक काल: सुबह 7:42 से 9:17 बजे तक
खास बातें:आज अमावस्या होने से पितरों को जल अर्पण, काले तिल-गेहूं का दान और गंगा/पवित्र नदी में स्नान का विशेष फल मिलता है।
शुक्रवार होने के कारण माता लक्ष्मी की पूजा-अर्चना भी शुभ रहेगी। गंड मूल नक्षत्र का प्रभाव आज सुबह तक रह सकता है, इसलिए नए कार्य शुरू करने में थोड़ी सतर्कता रखें।
आज के उपाय: पितरों को तिल मिश्रित जल अर्पित करें।
“ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” या लक्ष्मी मंत्र का जाप करें।
गरीबों को अन्न या वस्त्र का दान करें।
कोई भी शुभ समय या मुहूर्त के दौरान, राहुकाल गुलिक काल, यमगण्ड काल से बचना चाहिए क्योंकि ये समय अशुभ माना जाता है। अपने दैनिक पंचांग को रोजाना देखें और किसी भी नए काम को शुरू करने के लिए इसका पालन करें जैसे कि वैवाहिक समारोह, सामाजिक मामलों, महत्वपूर्ण कार्यक्रमों, उद्घाटन, नए व्यापार उपक्रम आदि जैसे शुभ कार्यक्रम इसके अनुसार करें।