भारतीय ज्योतिष शास्त्र में पंचांग का अपना महत्व है। पंचांग के अनुसार ही हम अपने धार्मिक क्रियाकलाप करते हैं। शुभ अशुभ का ज्ञान हमें प्राप्त होता है। आइये जानते हैं, आज के पंचांग के अनुसार कब है शुभ मुहूर्त और कब तक है राहुकाल और क्या है ग्रह चाल।
हिन्दू पंचांग के अनुसार आज शुक्रवार वैशाख कृष्ण अष्टमी है। सूर्य उत्तरायण, उत्तर गोल, वसंत ऋतु। शक संवत 1948 , विक्रमी संवत 2083, 10 अप्रैल 2026, अष्टमी तिथि रात्रि 11 बजकर 15 मिनट तक उपरांत नवमी तिथि का आरंभ। राहुकाल सुबह 10:30 से दोपहर 12:00 बजे तक।
शुक्रवार, 10 अप्रैल 2026 का दिन धार्मिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इस दिन वैशाख मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि पड़ रही है, जो कालाष्टमी के रूप में जानी जाती है। इस दिन भगवान भैरव की पूजा का विशेष महत्व है। साथ ही, शिव योग और सिद्ध योग जैसे शुभ संयोग भी बन रहे हैं, जिससे दिन कई धार्मिक और मांगलिक कार्यों के लिए अनुकूल रहेगा।
तिथि, वार और पंचांग विवरण
वार: शुक्रवार
तिथि: अष्टमी (रात 11:15 बजे तक), इसके बाद नवमी
माह: वैशाख (पूर्णिमांत) / चैत्र (अमांत)
संवत: विक्रम संवत 2083, शक संवत 1948
नक्षत्र, योग और करण
नक्षत्र: पूर्वाषाढ़ा (सुबह 11:27 बजे तक), फिर उत्तराषाढ़ा
योग: शिव योग (शाम 6:30 बजे तक), उसके बाद सिद्ध योग
करण: बालव (सुबह 10:21 बजे तक), कौलव (रात 11:16 बजे तक), फिर तैतिल
सूर्य और चंद्रमा की स्थिति
सूर्योदय: सुबह 6:14 बजे
सूर्यास्त: शाम 6:41 बजे
चंद्रोदय: रात 1:14 बजे
चंद्रास्त: दोपहर 12:56 बजे
चंद्र राशि: धनु से मकर में गोचर
शुभ मुहूर्त
अभिजीत मुहूर्त - दोपहर 11 बजकर 57 मिनट से 12 बजकर 48 मिनट तक
अमृत काल प्रात 06 बजकर 08 मिनट से 07 बजकर 54 मिनट तक
ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4 बजकर 33 मिनट से 5 बजकर 17 मिनट तक
राहुकाल और अशुभ समय
राहुकाल: सुबह 10:30 बजे से दोपहर 12:00 बजे तक
👉 इस दौरान कोई भी शुभ कार्य, यात्रा या निवेश करने से बचने की सलाह दी जाती है।
✨ क्यों खास है आज का दिन?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, कालाष्टमी के दिन भगवान भैरव की पूजा करने से नकारात्मक शक्तियों से रक्षा होती है और जीवन में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं। इसके साथ ही शिव योग और सिद्ध योग का संयोग दिन को और भी शुभ बना रहा है, जिससे पूजा-पाठ, व्रत और आध्यात्मिक कार्यों के लिए यह दिन विशेष फलदायी माना जा रहा है।
10 अप्रैल 2026 का दिन धार्मिक आस्था और साधना के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। जहां एक ओर कालाष्टमी का विशेष महत्व है, वहीं शुभ योगों का संयोग इसे सकारात्मक ऊर्जा से भर देता है। हालांकि, राहुकाल के समय सावधानी बरतना जरूरी है।
कोई भी शुभ समय या मुहूर्त के दौरान, राहुकाल गुलिक काल, यमगण्ड काल से बचना चाहिए क्योंकि ये समय अशुभ माना जाता है। अपने दैनिक पंचांग को रोजाना देखें और किसी भी नए काम को शुरू करने के लिए इसका पालन करें जैसे कि वैवाहिक समारोह, सामाजिक मामलों, महत्वपूर्ण कार्यक्रमों, उद्घाटन, नए व्यापार उपक्रम आदि जैसे शुभ कार्यक्रम इसके अनुसार करें।