गुरुवार को मूल से पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र का संयोग, शाम 9:19 बजे तक सप्तमी—महत्वपूर्ण कार्यों से पहले देखें शुभ-अशुभ समय
भारतीय ज्योतिष शास्त्र में पंचांग का अपना महत्व है। पंचांग के अनुसार ही हम अपने धार्मिक क्रियाकलाप करते हैं। शुभ अशुभ का ज्ञान हमें प्राप्त होता है। आइये जानते हैं, आज के पंचांग के अनुसार कब है शुभ मुहूर्त और कब तक है राहुकाल और क्या है ग्रह चाल।
हिन्दू पंचांग के अनुसार सूर्य उत्तरायण, उत्तर गोल, वसंत ऋतु , शक संवत 1948 , विक्रमी संवत 2083, वैशाख कृष्ण सप्तमी तिथि 9 अप्रैल 2026 गुरुवार, सप्तमी तिथि रात्रि 09 बजकर 19 मिनट तक उपरांत अष्टमी तिथि का आरंभ। हालांकि उदयातिथि के आधार पर पूरे दिन सप्तमी का ही मान रहेगा। इस दिन मूल नक्षत्र के बाद पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र का प्रवेश होगा, जिससे दिन का ज्योतिषीय महत्व और बढ़ जाता है। यदि आप किसी शुभ कार्य की योजना बना रहे हैं, तो मुहूर्त और अशुभ समय की जानकारी जरूर देख लें।
तिथि: कृष्ण पक्ष सप्तमी रात्रि 09:19 बजे तक, फिर अष्टमी
नक्षत्र: मूल (सुबह 8:48 बजे तक), फिर पूर्वाषाढ़ा
योग: परिघ (शाम 5:58 बजे तक)
करण: विष्टि (सुबह 8:12 बजे तक)
सूर्योदय: सुबह 6:02 बजे
सूर्यास्त: शाम 6:43 बजे
शुभ मुहूर्त (Shubh Muhurat)
ब्रह्म मुहूर्त: 4:32 AM – 5:17 AM
अभिजित मुहूर्त: 11:58 AM – 12:48 PM
विजय मुहूर्त: 2:30 PM – 3:20 PM
गोधूलि मुहूर्त: 6:42 PM – 7:05 PM
सायाह्न संध्या: 6:43 PM – 7:51 PM
रवि योग: 6:02 AM – 8:48 AM
निशिता मुहूर्त: 12:00 AM – 12:45 AM (10 अप्रैल)
अशुभ समय (Ashubh Kaal)
राहुकाल: 1:58 PM – 3:33 PM
यमगण्ड: 6:02 AM – 7:38 AM
गुलिक काल: 9:13 AM – 10:48 AM
दुर्मुहूर्त: 10:16 AM – 11:07 AM
भद्रा: 6:02 AM – 8:12 AM
गण्ड मूल: 6:02 AM – 8:48 AM
9 अप्रैल का दिन धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, लेकिन कई अशुभ योग भी बन रहे हैं। कोई भी शुभ समय या मुहूर्त के दौरान, राहुकाल गुलिक काल, यमगण्ड काल से बचना चाहिए क्योंकि ये समय अशुभ माना जाता है। अपने दैनिक पंचांग को रोजाना देखें और किसी भी नए काम को शुरू करने के लिए इसका पालन करें जैसे कि वैवाहिक समारोह, सामाजिक मामलों, महत्वपूर्ण कार्यक्रमों, उद्घाटन, नए व्यापार उपक्रम आदि जैसे शुभ कार्यक्रम इसके अनुसार करें।