टीबी मुक्त भारत की दिशा में बड़ा कदम: रेनबो। इंटरनेशनल में जागरूकता कार्यशाला
🩺 300 से अधिक युवाओं ने लिया हिस्सा, जनभागीदारी से टीबी उन्मूलन का संकल्प
* डॉ छवि कश्यप द्वारा अभियान में निक्षय मित्र के रूप में उत्कृष्ट योगदान
कांगड़ा, 5 अप्रैल - टीबी मुक्त भारत अभियान के अंतर्गत रेनबो इंटरनेशनल स्कूल, नगरोटा बगवां, कांगड़ा में एक जागरूकता कार्यशाला का आयोजन किया गया, जिसमें 300 से अधिक छात्रों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
इस अवसर पर मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ विवेक करोल मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। जिला स्वास्थ्य अधिकारी डॉ आर के सूद एवं उनकी टीम ने भी कार्यशाला में सक्रिय सहभागिता निभाई।
कार्यक्रम के दौरान मुख्य अतिथि ने विद्यालय की निदेशक डॉ छवि कश्यप के टीबी अभियान में निक्षय मित्र के रूप में उत्कृष्ट योगदान की सराहना की। उन्होंने टीबी रोगियों को पोषण एवं मनोसामाजिक सहयोग प्रदान करने में उनके प्रयासों को सराहनीय बताते हुए उन्हें एक प्रेरणास्रोत बताया।
छात्रों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि टीबी एक गंभीर संक्रामक रोग है, परंतु यह पूर्णतः रोके जाने योग्य, उपचार योग्य एवं ठीक होने वाला रोग है। उन्होंने बताया कि सरकार द्वारा टीबी की जांच एवं उपचार की निःशुल्क सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।
उन्होंने यह भी बताया कि टीबी हवा के माध्यम से फैलती है तथा कई मामलों में रोगी बिना लक्षण के भी हो सकते हैं। ऐसे में समय पर जांच, विशेषकर छाती के एक्स-रे जैसी स्क्रीनिंग, अत्यंत आवश्यक है।
डॉ आर के सूद ने उच्च जोखिम समूहों के लिए टीबी निवारक उपचार के महत्व पर प्रकाश डाला, जिससे टीबी संक्रमण को सक्रिय रोग में बदलने से रोका जा सकता है। उन्होंने टीबी से जुड़े मिथकों एवं सामाजिक कलंक को दूर करने पर जोर देते हुए कहा कि टीबी कोई अभिशाप नहीं है और रोगियों को समाज का सहयोग मिलना चाहिए, न कि उन्हें अलग-थलग किया जाए।
उन्होंने सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) के अंतर्गत टीबी उन्मूलन के लिए सामुदायिक सहभागिता को अत्यंत महत्वपूर्ण बताया।
कार्यक्रम में संतुलित आहार एवं पोषण को टीबी की रोकथाम और उपचार का महत्वपूर्ण आधार बताया गया। उचित पोषण से रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है, जिससे रोगियों के शीघ्र स्वस्थ होने में मदद मिलती है।
विद्यालय की निदेशक डॉ छवि कश्यप ने सभी से इस सामाजिक अभियान से जुड़ने एवं इसे जनभागीदारी के माध्यम से एक जन आंदोलन बनाने का आह्वान किया।
कार्यक्रम का समापन टीबी मुक्त भारत की शपथ के साथ हुआ, जिसमें छात्रों एवं स्टाफ ने सक्रिय भागीदारी निभाते हुए जागरूकता, पोषण एवं सामुदायिक जिम्मेदारी के संदेश को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया।