भारतीय ज्योतिष शास्त्र में पंचांग का अपना महत्व है। पंचांग के अनुसार ही हम अपने धार्मिक क्रियाकलाप करते हैं। शुभ अशुभ का ज्ञान हमें प्राप्त होता है। आइये जानते हैं, आज के पंचांग के अनुसार कब है शुभ मुहूर्त और कब तक है राहुकाल और क्या है ग्रह चाल। धार्मिक दृष्टि से आज का दिन महत्वपूर्ण है। सोमवार होने के साथ-साथ कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि का विशेष महत्व है। पूजा-पाठ, व्रत और शुभ कार्यों के लिए दिनभर के मुहूर्त और समय का ध्यान रखना आवश्यक है।
हिन्दू पंचांग के अनुसार आज सोमवार है। शक संवत 1948 , विक्रमी संवत 2083, सूर्य उत्तरायण, उत्तर गोल, वसंत ऋतु। 6 अप्रैल 2026,चैत्र कृष्ण चतुर्थी तिथि दोपहर 02 बजकर 10 मिनट तक उपरांत पंचमी तिथि का आरंभ। राहुकाल प्रातः 07 बजकर 40 मिनट से 09 बजकर 15 मिनट तक। अनुराधा नक्षत्र रात्रि 02 बजकर 57 मिनट (7 अप्रैल) तक उपरांत ज्येष्ठा नक्षत्र का आरंभ।
दिन: सोमवार
तिथि: कृष्ण पक्ष चतुर्थी (दोपहर लगभग 2:10 बजे तक), इसके बाद पंचमी
मास: वैशाख मास
🌙 नक्षत्र, योग और करण
नक्षत्र: अनुराधा (रात्रि तक प्रभावी)
योग: सिद्धि योग (सुबह तक), इसके बाद अन्य योग
करण: बव से बालव तक
🌅 सूर्योदय और सूर्यास्त
सूर्योदय: सुबह 6:06 बजे
सूर्यास्त: शाम 6:42 बजे
⏰ आज के शुभ मुहूर्त
ब्रह्म मुहूर्त: 04:41 AM – 05:29 AM
अभिजीत मुहूर्त: 12:04 PM – 12:53 PM
अमृत काल: 03:18 PM – 05:06 PM
👉 ये समय पूजा, निवेश, नया काम शुरू करने और शुभ निर्णय लेने के लिए अनुकूल माने गए हैं।
⚠️ अशुभ समय राहुकाल
राहुकाल: 07:40 AM – 09:15 AM
यमगण्ड: 10:56 AM – 12:29 PM
गुलिक काल: 02:02 PM – 03:34 PM
👉 इन समयों में नए कार्य शुरू करने से बचना चाहिए।
🌙 ग्रह स्थिति
चंद्रमा: वृश्चिक राशि में
सूर्य: मीन राशि में
आज चंद्रदेव अनुराधा नक्षत्र में विराजमान रहेंगे।
अनुराधा नक्षत्र: रात्रि 02:57 बजे तक (7 अप्रैल)
धार्मिक महत्व
कृष्ण पक्ष की चतुर्थी होने के कारण आज भगवान गणेश की पूजा विशेष फलदायी मानी जाती है। विघ्नों को दूर करने और सफलता प्राप्त करने के लिए व्रत एवं गणेश पूजा का महत्व है।
कोई भी शुभ समय या मुहूर्त के दौरान, राहुकाल गुलिक काल, यमगण्ड काल से बचना चाहिए क्योंकि ये समय अशुभ माना जाता है। अपने दैनिक पंचांग को रोजाना देखें और किसी भी नए काम को शुरू करने के लिए इसका पालन करें जैसे कि वैवाहिक समारोह, सामाजिक मामलों, महत्वपूर्ण कार्यक्रमों, उद्घाटन, नए व्यापार उपक्रम आदि जैसे शुभ कार्यक्रम इसके अनुसार करें।