4 अप्रैल 2026 का पंचांग: शनिवार को भद्रा का प्रभाव, जानें शुभ मुहूर्त और राहुकाल का समय
🗓️ दिनांक: 4 अप्रैल 2026
📅 वार: शनिवार
🌙 पक्ष: कृष्ण पक्ष
🪔 तिथि: द्वितीया (सुबह 10:08 तक), इसके बाद तृतीया (उदयातिथि अनुसार पूरे दिन द्वितीया मान्य)
🔍 मुख्य पंचांग विवरण (4 अप्रैल 2026)
शनिवार, 4 अप्रैल 2026 को बैशाख मास के कृष्ण पक्ष की द्वितीया तिथि है। ज्योतिषीय दृष्टि से यह दिन सामान्य कार्यों के लिए अनुकूल है, लेकिन भद्रा और राहुकाल के कारण कुछ कार्यों में सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।
🌅 सूर्योदय: सुबह 6:08 बजे
🌇 सूर्यास्त: शाम 6:41 बजे
🌙 चंद्रोदय: रात 9:01 बजे
🪐 नक्षत्र: स्वाती (रात 9:35 तक), फिर विशाखा
✨ योग: हर्षण योग (दोपहर 2:17 तक)
🧿 करण: गर करण (सुबह 10:08 तक)
शुभ मुहूर्त (Shubh Muhurat)
अगर आप कोई शुभ कार्य शुरू करना चाहते हैं, तो इन मुहूर्तों का विशेष ध्यान रखें:
🌄 ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 4:36 से 5:22 तक
🏆 अभिजित मुहूर्त: 11:59 से 12:49 तक
🚩 विजय मुहूर्त: 2:30 से 3:20 तक
🌆 गोधूलि मुहूर्त: 6:39 से 7:02 तक
💫 अमृत काल: 11:59 से 1:44 तक
🌟 सर्वार्थ सिद्धि योग: सुबह 6:08 से रात 9:35 तक
👉 इन मुहूर्तों में किए गए कार्य विशेष रूप से सफल और शुभ फलदायी माने जाते हैं।
अशुभ समय (Avoid These Timings)
शनिवार को कुछ समय ऐसे हैं जब नए कार्य या यात्रा से बचना चाहिए:
⛔ राहुकाल: सुबह 9:16 से 10:50 तक
⚠️ यमगंड: दोपहर 1:58 से 3:32 तक
⚠️ गुलिक काल: सुबह 6:08 से 7:42 तक
🚫 दुर्मुहूर्त: सुबह 6:08 से 6:58 तक
👉 राहुकाल में विशेष रूप से कोई नया काम शुरू न करें।
भद्रा काल का प्रभाव
4 अप्रैल को भद्रा का प्रभाव भी रहेगा, जो शुभ कार्यों में बाधा डाल सकता है।
भद्रा काल: रात 11:01 से अगले दिन सुबह 6:07 तक
👉 इस दौरान विवाह, गृह प्रवेश या नया व्यापार शुरू करने से बचें।
🧠 ज्योतिषीय सलाह
शनिवार का दिन शनि देव को समर्पित होता है—इस दिन दान, सेवा और संयम विशेष फलदायी होते हैं।
भद्रा और राहुकाल को ध्यान में रखते हुए ही महत्वपूर्ण निर्णय लें।
अमृत काल और सर्वार्थ सिद्धि योग में किए गए कार्य सफलता दिला सकते हैं।