भारतीय ज्योतिष शास्त्र में पंचांग का अपना महत्व है। पंचांग के अनुसार ही हम अपने धार्मिक क्रियाकलाप करते हैं। शुभ अशुभ का ज्ञान हमें प्राप्त होता है। आइये जानते हैं, आज के पंचांग के अनुसार कब है शुभ मुहूर्त और कब तक है राहुकाल और क्या है ग्रह चाल। हिंदू पंचांग के अनुसार आज द्वादशी तिथि का दिन है, द्वादशी – प्रातः 07:09 बजे तक, फिर त्रयोदशी, जो धार्मिक दृष्टि से व्रत पारण और पूजा के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।वहीं,आज सोम प्रदोष व्रत है।
हिन्दू पंचांग के अनुसार आज सोमवार है। शक संवत 1948 , विक्रमी संवत 2083, 30 मार्च 2026, शुक्ल द्वादशी – प्रातः 07:09 बजे तक, फिर त्रयोदशी आज सोम प्रदोष व्रत है।
📅 पंचांग विवरण
तिथि: द्वादशी – प्रातः 07:09 बजे तक, फिर त्रयोदशी
पक्ष: शुक्ल पक्ष
वार: सोमवार
नक्षत्र: आश्लेषा (शाम तक), फिर मघा
चंद्रदेव मघा नक्षत्र में विराजमान रहेंगे। मघा नक्षत्र: सायं 02:48 बजे तक
योग: धृति
करण: विष्टि / बव (समयानुसार परिवर्तन)
🌅 सूर्योदय और सूर्यास्त
सूर्योदय: सुबह 06:12 बजे
सूर्यास्त: शाम 06:37 बजे
⏰ अशुभ मुहूर्त
राहुकाल: सुबह 07:47 से 09:20 बजे तक
यमगंड: 10:53 से 12:26 बजे तक
गुलिक काल: 01:59 से 03:32 बजे तक
✅ शुभ मुहूर्त
अभिजीत मुहूर्त: 12:04 से 12:52 बजे तक
अमृत काल: दोपहर 12:23 बजे से दोपहर 01:59 बजे तक
🌙 चंद्रमा की स्थिति
राशि: कर्क राशि
✨ आज का धार्मिक महत्व
आज सोम प्रदोष व्रत है।
'सोम प्रदोष व्रत'
प्रत्येक मास के दोनों पक्षों की त्रयोदशी तिथि को प्रदोष व्रत रखने का विधान है। जब यह तिथि सूर्यास्त के पश्चात प्रदोष काल के समय आती है, तब भगवान शिव की उपासना विशेष फलदायी मानी जाती है। सोमवार के दिन पड़ने के कारण इसे सोम प्रदोष कहा जाता है, जिसे महादेव की प्रसन्नता प्राप्त करने का उत्तम मार्ग माना गया है। यह उपवास न केवल मानसिक शांति प्रदान करता है, बल्कि घर-परिवार में खुशहाली और वैवाहिक जीवन में मधुरता भी लाता है।ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, कुंडली में चंद्रमा की स्थिति को अनुकूल बनाने और उससे संबंधित दोषों के निवारण के लिए यह व्रत अत्यंत प्रभावशाली है। इस दिन एक निर्धन ब्राह्मणी और उसके पुत्र की कथा का श्रवण करना शुभ माना जाता है। सच्ची निष्ठा के साथ की गई पूजा से जीवन में आपसी तालमेल बढ़ता है और तनाव से मुक्ति मिलती है। भक्तजन बड़ी सहजता के साथ इस पावन दिन पर शिव भक्ति में लीन रहते हैं।