भारतीय ज्योतिष शास्त्र में पंचांग का अपना महत्व है। पंचांग के अनुसार ही हम अपने धार्मिक क्रियाकलाप करते हैं। शुभ अशुभ का ज्ञान हमें प्राप्त होता है। आइये जानते हैं, आज के पंचांग के अनुसार कब है शुभ मुहूर्त और कब तक है राहुकाल और क्या है ग्रह चाल। आज रविवार का दिन धार्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। विशेष रूप से एकादशी व्रत के कारण श्रद्धालुओं में भक्ति और पूजा-पाठ का उत्साह देखने को मिलेगा। मंदिरों में सुबह से ही भगवान विष्णु की आराधना और व्रत-पूजन का आयोजन किया जाएगा।
हिन्दू पंचांग के अनुसार आज रविवार है। शक संवत 1948 , विक्रमी संवत 2083, 29 मार्च 2026 शुक्ल एकादशी – प्रातः 07:46 बजे तक, फिर द्वादशी, - चैत्र शुक्ल एकादशी के अवसर पर 'कामदा एकादशी' का पावन व्रत रखा जाएगा।
🔸 तिथि: शुक्ल पक्ष की एकादशी प्रातः 07:46 बजे तक, फिर द्वादशी
🔸 वार: रविवार
🔸 पक्ष: शुक्ल पक्ष
🔸 नक्षत्र: सुबह तक आश्लेषा, इसके बाद मघा नक्षत्र का आरंभ
🔸 योग: धृति योग (स्थिरता और सफलता देने वाला योग)
🔸 करण: वणिज के बाद विष्टि (भद्रा)
🌅 सूर्योदय: सुबह 06:15बजे
🌇 सूर्यास्त: शाम 06:37 बजे
शुभ मुहूर्त
अभिजीत मुहूर्त - दोपहर 12:01 बजे से दोपहर 12:51 बजे तक
अमृत काल - दोपहर 01:02 बजे से दोपहर 02:38 बजे तक
⚠️ अशुभ समय (राहुकाल):
शाम 05:30 बजे से 06:37 बजे तक—इस दौरान कोई भी शुभ कार्य शुरू करने से बचना चाहिए।
⏳ अन्य अशुभ मुहूर्त:
यमगंड: दोपहर के समय - दोपहर 12:26 बजे से दोपहर 01:59 बजे तक
गुलिक काल: सायं 03:32 बजे से सायं 05:04 बजे तक
ज्योतिषीय दृष्टि से संकेत:
आज का दिन मानसिक शांति, आध्यात्मिक उन्नति और पारिवारिक सौहार्द के लिए अच्छा रहेगा। धृति योग के कारण किए गए कार्यों में स्थिरता और सफलता मिलने की संभावना है।
👉 कुल मिलाकर, 29 मार्च 2026 का दिन धार्मिक आस्था, व्रत, पूजा और सकारात्मक ऊर्जा से भरपूर रहने वाला है। श्रद्धालु इस दिन का पूरा लाभ उठाकर आध्यात्मिक प्रगति की ओर कदम बढ़ा सकते हैं।
🔔 आज का धार्मिक महत्व:
आज एकादशी व्रत रखा जाएगा, जिसे हिंदू धर्म में अत्यंत पुण्यदायी माना गया है। मान्यता है कि इस दिन भगवान विष्णु की पूजा, व्रत और भजन-कीर्तन करने से पापों का नाश होता है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है। कई श्रद्धालु आज दिनभर उपवास रखकर रात्रि में पारण की तैयारी करते हैं।चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को कामदा एकादशी के रूप में मनाया जाता है। चैत्र नवरात्रि और राम नवमी के पश्चात आने वाली यह पहली एकादशी अत्यंत प्रभावशाली मानी जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस व्रत के प्रभाव से मनुष्य के समस्त संचित पापों का शमन हो जाता है। शास्त्रों में इसे अत्यंत जटिल कष्टों और दोषों से मुक्ति दिलाने वाला बताया गया है। इस पावन अवसर पर गंधर्व ललित और ललिता की पौराणिक कथा का श्रवण करना विशेष फलदायी होता है। भक्त पूरी श्रद्धा के साथ भगवान विष्णु की उपासना करते हैं। व्रत का पारण अगले दिन सूर्योदय के उपरांत द्वादशी तिथि समाप्त होने से पूर्व करना आवश्यक है। पारण के समय 'हरि वासर' की अवधि का ध्यान रखना चाहिए, जो द्वादशी का प्रथम चौथाई भाग होता है। सुबह का समय व्रत खोलने के लिए श्रेष्ठ है, जबकि दोपहर में पारण करने से बचना चाहिए।
📿 क्या करें आज:
सुबह स्नान के बाद भगवान विष्णु का पूजन करें
व्रत रखकर फलाहार का सेवन करें
“ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जाप करें
गरीबों और जरूरतमंदों को दान दें
कोई भी शुभ समय या मुहूर्त के दौरान, राहुकाल गुलिक काल, यमगण्ड काल से बचना चाहिए क्योंकि ये समय अशुभ माना जाता है। अपने दैनिक पंचांग को रोजाना देखें और किसी भी नए काम को शुरू करने के लिए इसका पालन करें जैसे कि वैवाहिक समारोह, सामाजिक मामलों, महत्वपूर्ण कार्यक्रमों, उद्घाटन, नए व्यापार उपक्रम आदि जैसे शुभ कार्यक्रम इसके अनुसार करें।