धर्म/ज्योतिष डेस्क:
16 मार्च 2026 (सोमवार) - भारतीय ज्योतिष शास्त्र में पंचांग का अपना महत्व है। पंचांग के अनुसार ही हम अपने धार्मिक क्रियाकलाप करते हैं। शुभ अशुभ का ज्ञान हमें प्राप्त होता है। आइये जानते हैं, आज के पंचांग के अनुसार कब है शुभ मुहूर्त और कब तक है राहुकाल और क्या है ग्रह चाल। हिन्दू पंचांग के अनुसार शक संवत 1947 , विक्रमी संवत 2082, चैत्र कृष्ण द्वादशी और त्रयोदशी है। कृष्ण द्वादशी तिथि प्रातः 09 बजकर 40 मिनट तक इसके बाद त्रयोदशी तिथि का आरंभ। राहुकाल प्रातः 08:00 बजे से प्रातः 09:30 बजे तक, 16 मार्च 2026 का दिन धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है। सोमवार होने के कारण आज भगवान शिव की पूजा का विशेष महत्व माना गया है। 'सोम प्रदोष व्रत' का विशेष अवसर है, जो भगवान शिव की कृपा पाने और मानसिक शांति के लिए बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है। इस दिन पूजा-पाठ, जप और दान करना शुभ फलदायी माना जाता है।
📅 पंचांग विवरण
वार: सोमवार
माह: फाल्गुन (अमांत) / चैत्र (पूर्णिमांत)
पक्ष: कृष्ण पक्ष
विक्रम संवत: 2083
शक संवत: 1947
ऋतु: वसंत
अयन: उत्तरायण
⏱ तिथि
कृष्ण द्वादशी – सुबह लगभग 09:41 बजे तक
इसके बाद कृष्ण त्रयोदशी तिथि प्रारंभ
⭐ नक्षत्र
धनिष्ठा नक्षत्र – सुबह लगभग 06:22 बजे तक
इसके बाद शतभिषा नक्षत्र प्रारंभ
🔯 योग
शिव योग – सुबह लगभग 09:36 बजे तक
इसके बाद सिद्ध योग
📌 करण
तैतिल करण – सुबह 09:41 बजे तक
इसके बाद गर करण
🌅 सूर्योदय व सूर्यास्त
सूर्योदय: सुबह लगभग 06:38 बजे
सूर्यास्त: शाम लगभग 06:32 बजे
⛔ राहुकाल
सुबह लगभग 08:07 बजे से 09:37 बजे तक
✨ आज का विशेष
प्रत्येक महीने के दोनों पक्षों की त्रयोदशी तिथि को प्रदोष व्रत रखने का विधान है। जब यह तिथि सूर्यास्त के पश्चात प्रदोष काल के समय व्याप्त होती है, तब महादेव की उपासना विशेष फलदायी मानी जाती है। सोमवार के दिन पड़ने के कारण इसे सोम प्रदोष पुकारा जाता है, जिसे शिव जी की कृपा प्राप्त करने का सर्वोत्तम मार्ग माना गया है। यह उपवास न केवल मन को शांति प्रदान करता है, बल्कि घर-परिवार में खुशहाली और वैवाहिक जीवन में मधुरता भी लाता है।
कोई भी शुभ समय या मुहूर्त के दौरान, राहुकाल गुलिक काल, यमगण्ड काल से बचना चाहिए क्योंकि ये समय अशुभ माना जाता है। अपने दैनिक पंचांग को रोजाना देखें और किसी भी नए काम को शुरू करने के लिए इसका पालन करें जैसे कि वैवाहिक समारोह, सामाजिक मामलों, महत्वपूर्ण कार्यक्रमों, उद्घाटन, नए व्यापार उपक्रम आदि जैसे शुभ कार्यक्रम इसके अनुसार करें।